पुलिस रेड से बौखलाए अभिषेक ने मीडिया से कहा-मैं कुछ छिपा रहा हूं तो तलाशी लेने वालों से पूछिए
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 13 Jun 2026 1:52 PM
रेड से नाराज नजर आए अभिषेक बनर्जी
Abhishek Banerjee : बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस की स्थिति बहुत खराब हो गई है और उसके नेता अभिषेक बनर्जी काफी विपरीत परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं. कभी उनपर हमला होता है, तो कभी पार्टी के बागी नेता उन्हें अस्वीकार कर देते हैं और यह कह देते हैं कि दीदी को पार्टी के कार्यकर्ताओं और अभिषेक बनर्जी में से किसी एक को चुनना होगा और अब उनके घर रेड हुआ है.
Abhishek Banerjee : टीएमसी के नेता और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को अपने घर पर देर रात हुई रेड पर नाराजगी जताई. उन्होंने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि क्या मैं कुछ छिपा रहा हूं. मेरे घर के एक-एक कमरे की तलाशी ली गई है.
अभिषेक ने कहा- वे ताला तोड़कर घर में घुसे
बंगाल पुलिस और केंद्रीय बलों की रेड के बारे में पूछे गए सवालों से नाराज होकर अभिषेक ने मीडियाकर्मियों से कहा किआप इंवेस्टिगेशन एजेंसियों से सर्च के बारे में पूछ सकते हैं, क्या मैंने अंदर कुछ छिपाया है? उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने उनके घर का ताला तोड़ा, घर में घुसे और हर कमरे की तलाशी ली. वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में यह तलाशी ली गई है. जब मीडिया कर्मियों ने पूछा कि क्या आपने सुमित रॉय को अपने घर पर छिपा रखा है, तो उन्होंने कहा कि पुलिस ने हर कमरे की तलाशी ली है, आप उनसे पूछिए.
अभिषेक के घर तलाशी से बंगाल में बढ़ा राजनीतिक तापमान
अभिषेक के कालीघाट स्थित घर पर सुबह-सुबह पुलिस की कार्रवाई के बाद टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी जल्दबाजी में वहां पहुंची. इससे राजनीतिक अटकलें तेज हो गईं और पार्टी पर दबाव बढ़ गया, जो पहले से ही कानूनी लड़ाइयों, अंदरूनी बगावत और विधानसभा चुनाव में हार के नतीजों का सामना कर रही है. पुलिस कर्मी चार घंटे से अधिक समय तक उनके घर की तलाशी लेते रहे. इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए, टीएमसी ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ पुलिस एक्शन की आलोचना की. पार्टी की ओर से एक्स पर लिखा गया कि यह राजनीतिक बदले की भावना से की गई कार्रवाई है और प्रदेश में स्थिति बद से बदतर होती जा रही है. पार्टी के नेता कीर्ति आजाद ने इसे घिनौनी राजनीति करार दिया. उन्होंने कहा कि सुबह तीन बजे पुलिस पहुंचती है और ताला तोड़कर सर्च करती है, मिलता कुछ नहीं है. यह कितनी गंदी राजनीति है इसे पूरा देश देख रहा है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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