सिनुवाइर के जरिये लोगों का दर्द बांट रहे हैं अनिल

Published at :17 Jan 2016 6:47 PM (IST)
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सिनुवाइर के जरिये लोगों का दर्द बांट रहे हैं अनिल

सिनुवाइर के जरिये लोगों का दर्द बांट रहे हैं अनिल प्रभात खासजैविक खेती के लिए लोगों को कर रहे जागरूकशहर के बटराहा मोहल्ले में रहते हैं अनिल कुमारकुमार आशीष, सहरसा नगरदर्जी की दुकानों पर उड़ते हुए बिसात न थी, मां ने किया लपेट लिया मासूम की छांव बन गयी… शायर कश्यप की यह पंक्ति बटराहा […]

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सिनुवाइर के जरिये लोगों का दर्द बांट रहे हैं अनिल प्रभात खासजैविक खेती के लिए लोगों को कर रहे जागरूकशहर के बटराहा मोहल्ले में रहते हैं अनिल कुमारकुमार आशीष, सहरसा नगरदर्जी की दुकानों पर उड़ते हुए बिसात न थी, मां ने किया लपेट लिया मासूम की छांव बन गयी… शायर कश्यप की यह पंक्ति बटराहा कृष्णा नगर मोहल्ले के अनिल कुमार पर सटीक बैठती है. अनिल कुमार ने सड़क किनारे मिलने वाले जैविक पौधा को आंगन में लगा अनमोल बना दिया. सिनुवाइर का यह पौधा जीवन का उद्देश्य बन चुका है. उन्होंने इस पौधे को स्वयं के बगीचे में लगाया ही नहीं इसके गुणकारी तत्वों पर प्रकाश डालते लोगों को भी पौधारोपण के प्रति जागरूक किया है. श्री कुमार की प्रेरणा से भारत व नेपाल के दौ सौ से अधिक लोगों ने सिनुवाइर को अपने अहाते में शामिल कर शारीरिक दर्द को लेकर बाजार की दवाईयों से परिवार को सुरक्षित कर लिया है. अनिल बताते हैं कि इस प्रकार की औषधि की खेती से स्वास्थ्य के साथ समृद्धि भी मिलती है. सिनुवाइर के क्या हैं फायदेकिसान अनिल कुमार बताते हैं कि सिनुवाइर का पौधा कोई भी व्यक्ति अपने आंगन में लगा सकता है. इस पौधे के पत्ते का दवाई के रूप में काढ़ा बना कर उपयोग किया जाता है. उन्होंने बताया कि शरीर की थकान मिटाने के लिए सिनुवाइर का काढ़ा रामबाण साबित होता है. आर्युवेद में भी इसकी चर्चा की गयी है. उन्होंने बताया कि बाजार में मिलने वाले दर्दनाशक दवाईयों के कुप्रभाव भी होते हैं, लेकिन सिनुवाइर का कोई साइड इफैक्ट नहीं रहता है. प्रसूता के लिए जीवनदायिनीअनिल बताते हैं कि प्रसव बाद महिलाओं के शरीर में काफी असहनीय दर्द होता है. ऐसे में सिनुवाइर का जूस शरीर को राहत प्रदान करता है. उन्होंने बताया कि दस दिनों तक सिनुवाइर का काढ़ा पीने से प्रसूता चंगी हो जाती है. पिता की पीड़ा ने दिखायी रोशनीसिनुवाइर की खोज से संबंधित आपबीती बताते अनिल कहते हैं कि उनके पिता ताराकांत झा की तबीयत अचानक खराब रहने लगी थी. शरीर के विभिन्न हिस्सों में दर्द ने कब्जा जमा लिया था. पिता की वेदना ने खोजी प्रवृति को जागृत कर दी थी. इसके बाद किसी ने बात ही बात में सिनुवाइर का जिक्र किया था. इसके बाद काफी मशक्कत के बाद बनगांव में पौधे की टहनी मिली. फिर पिता के बहाने ही सही लोगों के दर्द को बांटना व उन्हें पौधा लगाने के प्रति जागृत करने को अपना मिशन बना लिया. फोटो- पौधा 2 – अपने बगीचे में सिनुवाइर के पौधे को दिखाते अनिल कुमार

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