Saharsa News : मिथिला की संस्कृति व परंपरा अद्वितीय : पीठाधीश्वर

कांची कामकोटि पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी विजेंद्र सरस्वती का आगमन हुआ.
महिषी (सहरसा) से दीपांकर की रिपोर्ट Saharsa News : सनातन संस्कृति के प्रमुख संवाहक आचार्य मंडन की तपोभूमि महिषी बुधवार को एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना, जब कांची कामकोटि पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी विजेंद्र सरस्वती का आगमन हुआ. उनके आगमन को लेकर क्षेत्र में विशेष उत्साह का माहौल रहा. कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच वे दरभंगा से सड़क मार्ग द्वारा निजी वाहन से महिषी पहुंचे. मंडन धाम पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत किया गया. दर्जनों आचार्य एवं वेदपाठी बच्चों ने स्वस्तिवाचन मंत्रों के साथ पुष्प वर्षा कर उनका अभिनंदन किया. पूरा परिसर वैदिक मंत्रोच्चार से गूंज उठा. जिससे वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया. स्थानीय ग्रामीणों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए मौजूद थे. इस अवसर पर यज्ञ के यजमान डॉ नंद किशोर चौधरी ने शंकराचार्य को अभिनंदन पत्र समर्पित किया एवं मंडन धाम को शिक्षा एवं शोध का केंद्र बनाने की दिशा में पहल करने का अनुरोध किया. उन्होंने कहा कि यह स्थान ना केवल धार्मिक, बल्कि ऐतिहासिक और शैक्षणिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है. श्रद्धालुओं को संबोधित करते शंकराचार्य स्वामी विजेंद्र सरस्वती ने कहा कि कांची कामकोटि पीठ पिछले पांच दशकों से देश के विभिन्न राज्यों में विद्या, वैद्य एवं वेद के प्रचार-प्रसार में जुटी है. उन्होंने मिथिला को माता सीता की पावन जन्मभूमि बताते कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व की सर्वोत्तम संस्कृतियों में से एक है. जो मानवता को सही दिशा प्रदान करती है. उन्होंने कहा कि आचार्य मंडन ने आदि गुरु शंकराचार्य के साथ मिलकर भारत में वैदिक एवं सनातन धर्म की स्थापना एवं संरक्षण में अहम भूमिका निभाई. कांची कामकोटि पीठ में आचार्य मंडन सुरेश्वराचार्य के रूप में प्रतिष्ठित हैं. उन्होंने ज्ञान की परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया. जो आज भी प्रेरणा का स्रोत है. शंकराचार्य ने मिथिला वासियों की जीवन शैली एवं आचरण की सराहना करते कहा कि यहां की संस्कृति एवं परंपरा अद्वितीय है. इस पावन भूमि पर आकर उन्हें अत्यंत सुखद अनुभूति हो रही है. उन्होंने यह भी बताया कि उनके गुरु भी पूर्व में महिषी आ चुके हैं. जिससे इस स्थान का आध्यात्मिक महत्व और बढ़ जाता है. उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद सभी लोग प्रसाद ग्रहण कर अपने घर जायें एवं धर्म के मार्ग पर चलें. साथ ही उन्होंने भगवती तारा से महिषी एवं समूचे मिथिला क्षेत्र के समग्र विकास एवं कल्याण की कामना की. शंकराचार्य ने जानकारी दी कि गुरुवार को सहरसा में शंकर नेत्रालय का उद्घाटन एवं शुभारंभ किया जायेगा. इस अस्पताल के शुरू होने से क्षेत्र के लोगों को बेहतर नेत्र चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी. उद्घाटन से पूर्व शक्ति पीठ में चंडी हवन का आयोजन किया जायेगा. जिसमें सभी जीवों एवं वनस्पतियों के कल्याण की कामना की जायेगी. कार्यक्रम के अंत में मौजूद श्रद्धालुओं ने शंकराचार्य की पादुका का दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया एवं अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना की. मौके पर श्रीनारायण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के चेयरमैन आर के सिंह, ईस्ट एंड वेस्ट समूह के चेयरमैन रजनीश रंजन, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष दिवाकर सिंह सहित अन्य मौजूद थे.
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