PURNIA : तीन दशकों के सियासी सफर में लेशी सिंह की आठवीं बार मंत्री पद पर ताजपोशी

Published by :AMIT KUMAR SINH
Published at :07 May 2026 12:55 PM (IST)
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PURNIA : तीन दशकों के सियासी सफर में लेशी सिंह की आठवीं बार मंत्री पद पर ताजपोशी

विधानसभा चुनाव में इस बार छठी बार रिकार्ड मतों से पूर्णिया के धमदाहा सीट से जीतने वाली लेशी सिंह अपने करीब तीन दशकों के सियासी सफर में आठवीं बार बिहार में मंत्री बनीं हैं.

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पूर्णिया से अरुण कुमार की रिपोर्ट :

विधानसभा चुनाव में इस बार छठी बार रिकार्ड मतों से पूर्णिया के धमदाहा सीट से जीतने वाली लेशी सिंह अपने करीब तीन दशकों के सियासी सफर में आठवीं बार बिहार में मंत्री बनीं हैं. लेशी सिंह का मंत्री बनना इस बात का संकेत है कि नेतृत्व ने उनके अनुभव और कार्यशैली पर एक बार फिर भरोसा जताया है. सीमांचल क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ और जनता के बीच उनकी लोकप्रियता उन्हें सरकार के अहम चेहरों में शामिल करती है.

संघर्ष से शिखर तक का सफर

लेशी सिंह की राजनीति सिर्फ जीत की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, साहस और समर्पण का जीवंत उदाहरण है. वर्ष 2000 में पति मधुसूदन सिंह उर्फ बूटन सिंह की हत्या के बाद उन्होंने पहली बार घर की चौखट लांघी और समता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचीं. उस दौर में राजनीतिक हालात चुनौतीपूर्ण थे, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों को अवसर में बदला. इसके बाद 2005, 2010, 2015 और 2020 और 2025 में जदयू के टिकट पर लगातार जीत दर्ज कर उन्होंने अपनी पकड़ और मजबूत की. जनता से सीधा जुड़ाव और क्षेत्र के विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें एक अलग पहचान दिलाई.

जनता के बीच ‘नेता’ नहीं, ‘अपनापन’

लेशी सिंह की सबसे बड़ी ताकत उनका व्यवहार और जनता से जुड़ने का अंदाज रहा है. उन्होंने कभी खुद को सिर्फ विधायक या मंत्री तक सीमित नहीं रखा, बल्कि क्षेत्र में बहू और बेटी बनकर लोगों के बीच काम किया. यही कारण है कि सामाजिक और जातीय समीकरणों से परे जाकर जनता ने हमेशा उन्हें अपना समर्थन दिया.धमदाहा में मुस्लिम और यादव मतदाताओं की बहुलता के बावजूद उन्होंने सभी वर्गों का विश्वास जीता और हर घर से एक पारिवारिक रिश्ता कायम किया. उनके इसी सहज और मृदु स्वभाव ने विरोधी समीकरणों को बार-बार कमजोर किया.

विकास और विश्वास की राजनीति

लेशी सिंह की लोकप्रियता का सबसे बड़ा आधार क्षेत्र में किए गए विकास कार्य और जनता के प्रति उनकी संवेदनशीलता रही है. उन्होंने हमेशा जनता के सुख-दुख में साथ निभाया और यही भरोसा उन्हें बार-बार जीत दिलाता रहा.आज लेशी सिंह सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि पूर्णिया और सीमांचल की उम्मीदों का चेहरा बन चुकी हैं. एक ऐसा चेहरा, जिसने संघर्ष से शिखर तक का सफर तय कर यह साबित कर दिया कि सच्ची जनसेवा ही सबसे बड़ी ताकत होती है।

मंत्री पद पर अनुभव का भरोसा

लेशी सिंह इससे पहले भी बिहार सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुकी हैं. महिला आयोग की अध्यक्ष से लेकर समाज कल्याण और उपभोक्ता संरक्षण जैसे विभागों में मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल प्रभावी रहा है. आठवीं बार मंत्री बनना इस बात को और मजबूत करता है कि वे प्रशासनिक अनुभव और निर्णय क्षमता में सक्षम नेतृत्व हैं.

सीमांचल की मजबूत आवाज

लेशी सिंह का मंत्री बनना सीमांचल क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इससे क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है. उनकी सक्रियता और क्षेत्र के मुद्दों पर पकड़ उन्हें सरकार और जनता के बीच एक मजबूत कड़ी बनाती है. आठवीं बार मंत्री बनकर लेशी सिंह ने यह साबित कर दिया है कि निरंतर जनसेवा, संघर्ष और विश्वास ही राजनीति में स्थायी सफलता की कुंजी है.

कब-कब बनीं मंत्री

11 मार्च 2014- नीतीश मंत्रिमंडल में बनीं उद्योग विभाग की मंत्री

21 मार्च 2014 को जीतनराम मांझी मंत्रिमंडल में बनीं समाज कल्याण व आपदा मंत्रीं

फरवरी 2015 में नीतीश मंत्रिमंडल में बनीं समाज कल्याण एवं आपदा प्रबंधन मंत्री

पुन: 9 फरवरी 2021 को बनीं खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की मंत्री

16 अगस्त 2022 में बनीं खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की मंत्री

16 मार्च 2024 में फिर बनीं खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की मंत्री

20 नवम्बर 2025 को फिर ली खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की मंत्री

7 मई 2026 फिर लीं मंत्री पद की शपथ

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