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मौसम का मिजाज बदला, आलू व तिलहन फसलों पर संकट के बादल

Updated at : 19 Dec 2025 7:14 PM (IST)
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मौसम का मिजाज बदला, आलू व तिलहन फसलों पर संकट के बादल

पूर्णिया

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पूर्णिया. मौसम के बदले मिजाज से आलू की फसल लगानेवाले किसानों के माथे पर चिंता के भाव हैं. हालांकि अभी के मौसम को आलू की पैदावार के लिए अनुकूल बताया जा रहा है. पर, किसानों के बीच कुहासे के अलावा आसमान में बादल और पछुआ हवा को लेकर थोड़ी चिंता झलक रही है. उनका मानना है कि अगर तापमान में उतार-चढ़ाव के साथ-साथ आसमान में बादल छाये रहे और पछुआ हवा के साथ बूंदाबांदी हो गयी, तो आलू में झुलसा की आशंका बन सकती है. दूसरी ओर इस मौसम ने रबी की तिलहनी फसल सरसों और राई में लाही कीट की आशंका बढ़ा दी है. इसका असर सब्जी की फसलों पर भी पड़ सकता है.

रोग से बचाव के लिए फसलों में स्प्रे करने की सलाह

अमूमन मध्य दिसंबर से लेकर मध्य जनवरी तक जिले में मौसम का मिजाज कुछ ऐसा ही बना रहता है. कृषि वैज्ञानिकों का भी कहना है कि इस तरह का मौसम रबी में उगाये जानेवाली फसलों के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है. इस मौसम में गेहूं, मक्का, मसूर वगैरह के अलावा विभिन्न सब्जियों का बेहतर उत्पादन होता है. समय की प्रतिकूलता आलू और तिलहन की फसलों को प्रभावित कर सकती है. आलू में पल्ला, झुलसा के अलावा सरसों वगैरह में लाही का असर उत्पादन को प्रभावित कर सकता है. ऐसे में किसानों को पूर्व से ही बचाव के उपाय के रूप में स्प्रे करने की सलाह दी जाती है, ताकि इन फसलों को नुकसान होने से किसान बचा सकें.

बोले कृषि वैज्ञानिक

यह मौसम विभिन्न रबी फसलों के लिए बेहद अनुकूल है. अगर किसान को लगे कि उनके आलू की फसल में झुलसा का असर हो सकता है, तो सतर्कता बरतते हुए बचाव के लिए किसी भी फफूंदनाशी दवा का स्प्रे आलू की फसल पर करें. कुछ अंतराल के बाद इसकी आवश्यकता को देखते हुए फिर से दोहरायें और फफूंदी नाशक का इस्तेमाल दवा बदल-बदल कर करें. दवा की मात्रा और पानी का घोल दिये निर्देश के अनुसार ही तैयार करें. सरसों में येलो स्टीकी फंदा लगाएं. इससे लाही कीट से बचाव होगा. इसके अलावा एमिडाक्लोप्रिड दवा का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

डॉ गोविंद कुमार, कृषि वैज्ञानिक, केवीके जलालगढ़ ………………….

बोले अधिकारी

इस वर्ष पूरे जिले में लगभग दो हजार हेक्टेयर में आलू की फसल लगी है. हालांकि अभी का मौसम आलू की फसल के लिए अच्छा बना हुआ है. इससे आलू की पैदावार बढ़ेगी और उसका साइज तथा वजन भी बढ़ेगा. मौसम की वजह से अगर किसान भाइयों को नुकसान पहुंचता है, तो इसके लिए कृषि विभाग द्वारा मुआवजा सहायता राशि प्रभावित किसानों को दिये जाने की भी व्यवस्था है. विभाग के नियमानुसार निर्धारित फसल नुकसान की स्थिति में यह राशि किसानों को देय होगी.

डॉ राहुल कुमार, जिला उद्यान पदाधिकारी

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SATYENDRA SINHA

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By SATYENDRA SINHA

SATYENDRA SINHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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