सम्राट चौधरी ही क्यों बने बिहार के पहले भाजपा मुख्यमंत्री, इन वजहों से रेस में निकले सबसे आगे

सम्राट चौधरी
Samrat Choudhary: बिहार में नीतीश कुमार के लंबे दौर के बाद अब सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नया राजनीतिक अध्याय शुरू होने जा रहा है. भाजपा ने उन्हें राज्य का पहला बीजेपी सीएम चुनकर बड़ा दांव खेला है. आइये जानते हैं किन वजहों से बीजेपी आलाकमान ने उन्हें इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है.
Samrat Choudhary: बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव तय हो गया है. नीतीश कुमार के लंबे शासन के बाद अब सम्राट चौधरी नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने उनके नाम पर अंतिम मुहर लगा दी है. सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाने के पीछे सबसे बड़ा कारण बिहार का लव-कुश समीकरण माना जा रहा है. लव-कुश यानी कुर्मी और कुशवाहा समाज का राज्य की राजनीति में बड़ा असर है. इन दोनों जातियों का करीब 7 प्रतिशत वोट बैंक है, जो 50 से 60 सीटों पर असर डालता है. सम्राट चौधरी खुद कुशवाहा समाज से आते हैं. भाजपा इस फैसले से सीधे इस मजबूत वोट बैंक को साधना चाहती है.
बीजेपी में आने के बाद बढ़ा ग्राफ
दूसरा बड़ा कारण उनका लंबा राजनीतिक अनुभव है. सम्राट चौधरी 1990 के दशक से राजनीति में एक्टिव हैं. उन्होंने राजद से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था. राबड़ी देवी सरकार में कृषि मंत्री रहे. बाद में विधायक बने, मंत्री बने और कई अहम विभाग संभाले. 2018 में भाजपा में आने के बाद उनका कद तेजी से बढ़ा. उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष, फिर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और बाद में उपमुख्यमंत्री बनाया गया.
एक और कारण उनकी पारिवारिक राजनीतिक विरासत है. सम्राट चौधरी बिहार के बड़े नेता शकुनी चौधरी के बेटे हैं. उनके पिता कई बार विधायक और सांसद रहे हैं. उनकी मां पार्वती देवी भी विधायक रह चुकी हैं. राजनीतिक माहौल उन्हें घर से मिला, लेकिन अपनी अलग पहचान उन्होंने खुद बनाई.
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नीतीश कुमार का भरोसा जीता
नीतीश कुमार का भरोसा जीतना भी उनके लिए सही साबित हुआ. एक समय सम्राट चौधरी नीतीश कुमार के खिलाफ खुलकर बोलते थे. उन्होंने पगड़ी न खोलने की कसम तक खाई थी. लेकिन बाद में उन्होंने नीतीश कुमार को अपना अभिभावक बताया. नीतीश कुमार जहां-जहां गए, सम्राट साथ रहे. इससे दोनों नेताओं के बीच रिश्ते सुधरे और भरोसा मजबूत हुआ.
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि भाजपा ने यह फैसला बहुत सोच-समझकर लिया है. सम्राट चौधरी के जरिए पार्टी ने जातीय संतुलन, संगठन अनुभव और गठबंधन की मजबूती तीनों को साध लिया है. अब बिहार में भाजपा के नेतृत्व में नई राजनीति की शुरुआत होने जा रही है.
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By Paritosh Shahi
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