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नीतीश की यात्राएं-14 : विकास यात्रा के दौरान मधुबनी में उठा था विशेष दर्जा का मसला, दिलाया था ये भरोसा

Updated at : 21 Jan 2025 1:58 PM (IST)
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Nitish Kumar Yatra

Nitish Kumar Yatra

Nitish Kumar Yatra: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर प्रदेश की यात्रा पर हैं. 2005 में नवंबर महीने में मुख्यमंत्री बनने के पूर्व वे जुलाई महीने में न्याय यात्रा पर निकले थे. विकास यात्रा उनकी दूसरी यात्रा थी. नीतीश कुमार की अब तक 15 से अधिक यात्राएं हो चुकी हैं. आइये पढ़ते हैं इन यात्राओं के उद्देश्य और परिणाम के बारे में प्रभात खबर पटना के राजनीतिक संपादक मिथिलेश कुमार की खास रिपोर्ट की 14वीं कड़ी..

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Nitish Kumar Yatra: मधुबनी की सभा में मुख्यमंत्री ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिये जाने की मांग को जोरदार ढ़ंग से उठाया. नीतीश कुमार ने कहा कि केंद्र के असहयोग के बावजूद नया बिहार बन कर रहेगा. उन्होंने एक नया संदेश देने की कोशिश की. कहा– “सहयोग, सौहार्द्र और भाईचारे का माहौल कायम रहा तो 2015 तक बदला बदला-सा विकसित बिहार नजर आयेगा.” सभा खत्म हुई और मुख्यमंत्री का काफिला दरभंगा के लिए निकल पड़ा. दरभंगा के कमलपुर में दिव्यांग बच्चे को देख नियम में कराया बदलाव. अगला पड़ाव था दरभंगा जिले का कमलपुर इलाका. कमलपुर दरभंगा जिले का सबसे पिछड़ा इलाका कुशेश्वर स्थान जाने के रास्ते में था. यहां भी मुख्यमंत्री के आने की खबर पहले से ही लोगों में थी. सड़क के किनारे दोनों ओर लोगों की भीड़ एकत्र थी. सीएम पहुंचे तो थोड़ी देर आराम के बाद चौपाल और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन था.

गर्म टोपी और गले में मफलर लगा निकले नीतीश कुमार

मिथिला का यह इलाका मेरे लिये खास परिचित था. निकट के दो गांवों में मेरी नजदीकी रिश्तेदारी थी तो कुछ दूर आगे के गांव में मेरा नानी घर था. सो, यहां रात्रि-विश्राम में कोई परेशानी नहीं हुई. हमने निकट के धेरुष गांव में भोजन और रात्रि विश्राम किया. इसके पहले बहेड़ा में भी भोजन का उत्तम प्रबंध था. सुबह की सैर में हम मुख्यमंत्री के टेंट में पहुंचे तो वह करीब-करीब तैयार हो चुके थे. मुख्यमंत्री निकले, पड़ोस का अल्पसंख्यक बहुल नवटोल गांव था. सर्दी की सुबह मुख्यमंत्री के सिर पर गर्म टोपी और गले में मफलर लगा था. हमलोगों को चूंकि भाग-दौड़ करनी थी तो सुबह में ही जो कपड़ा पहना, वहीं देर रात तक तन पर रहता था. रास्ते में मुख्यमंत्री ने जानना चाहा कि रात्रि में कोई दिक्कत तो नहीं हुई. हमने बताया कि बगल के गांव में मेरी बहन रहती है, वहीं चला गया था. मुख्यमंत्री खुश हुए, कहा, चलिये दोनों काम हो गया.

दिव्यांग बच्चे को देख नियम में बदलाव की सीख

दरभंगा के उस गांव में मुख्यमंत्री को एक बच्ची मिली. “स्कूल जाती हो.? मुख्यमंत्री ने पूछा

– “हां. मदरसे में.” जवाब मिला.

– “आज नहीं गयी?”

बच्ची चुप रही.

मुख्यमंत्री ने कहा, “खूब पढ़ो, स्कूल जाओ.”

थोड़ी दूर आगे बढ़ने पर करीब 13 साल का शमीम मिला. शमीम के परिजनों ने मुख्यमंत्री को बताया कि यह बच्चा विकलांग है. लेकिन, सरकार की किसी भी योजना का लाभ इसे नहीं मिलता. ऐसा अकेला शमीम ही नहीं है. कई बच्चे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा– “रास्ता निकालेंगे, इसे भी लाभ मिलेगा.” साथ चल रहे अधिकारी को उन्होंने विकलांगता का प्रमाण पत्र जारी करने के मौजूदा नियमावली को बदल कर नया सरल तरीका लागू करने का निर्देश दिया. इस तरह शमीम के बहाने मुख्यमंत्री ने विकलांग बच्चों के जीवन में एक नया उत्साह पैदा किया.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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