झारखंड राज्यसभा चुनाव: मॉक पोल से मिली थी ट्रेनिंग, फिर भी तीन विधायकों ने की गलत वोटिंग

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जीत के बाद भाजपा नेताओं के साथ परिमल नथवाणी

Jharkhand Rajya Sabha Election: झारखंड राज्यसभा चुनाव में मतदान से पहले मॉक पोलिंग कर विधायकों को प्रक्रिया समझाई गई थी. इसके बावजूद तीन विधायकों द्वारा गलत वोटिंग किए जाने की खबर ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है. पूरी खबर नीचे पढ़ें...

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Jharkhand Rajya Sabha Election: झारखंड राज्यसभा चुनाव का सस्पेंस खत्म हो गया है. झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार बैजनाथ राम और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवाणी ने जीत दर्ज कर ली है. जबकि, कांग्रेस के उम्मीदवार प्रणव झा को करारी हार का सामना करना पड़ा. झामुमो के बैजनाथ राम को 30 वोट मिले और भाजपा समर्थित परिमल नथवाणी 28 वोट लाने में कामयाब रहे, जो जीत के लिए न्यूनतम संख्या थी. कांग्रेस के प्रवण झा 20 वोट पर सिमट गए. कुल तीन माननीयों के वोट अवैध करार दिए गए.

तीन वोट इसलिए हो गये रद्द

  • एक माननीय : पहली प्राथमिकता में एक लिखा, लेकिन बॉक्स के ऊपर एक और डब्बा बना दिया.
  • दूसरे माननीय : सभी प्रत्याशी के नाम के सामने बने खांचे में ऊपर से नीचे एक लिख दिया.
  • तीसरे माननीय : कांग्रेस प्रत्याशी के नाम के आगे जीरो लिख दिया.
  • एक माननीय ने प्रत्याशियों की रैंकिंग कर दी : निर्दलीय प्रत्याशी नथवाणी को एक लिखा, बैजनाथ को दो नंबर दिया, प्रणव के सामने तीन लिखा.
    सभी माननीयों को मॉक पोल के माध्यम से ट्रेनिंग दी गयी थी, इसके बाद भी गड़बड़ी हो गयी.

हेमंत की चाय पे चर्चा

विधानसभा परिसर में मतदान के दौरान अचानक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बाहर आये. इस दौरान भाजपा विधायक चाय की चुस्की ले रहे थे. हेमंत भी वहां चाय पीने चले गये. इस दौरान वहां मौजूद भाजपा विधायक नवीन जायसवाल, राज सिन्हा और भाजपा के भानु प्रताप शाही मौजूद थे, जिनसे हेमंत हंसी-ठिठोली करते दिखे.

चुनाव के दौरान ही वायरल हुआ फर्जी पत्र, बैजनाथ और प्रणव को दिला दी जीत

राज्यसभा चुनाव के दौरान गुरुवार को दोपहर में सोशल मीडिया पर एक पत्र तेजी से वायरल हुआ, जिसमें राज्यसभा सचिवालय की ओर से झारखंड के दो कथित सांसद बैजनाथ राम और प्रणव झा के लिए झारखंड भवन में कमरा आरक्षित करने का उल्लेख किया गया था. पत्र में दोनों को झारखंड से निर्वाचित सांसद बताया गया था. मुख्य सचिव को इनके लिए कमरा बुक करने का निर्देश था, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल मच गयी.

वोटिंग के दौरान भ्रम की स्थिति

हालांकि, मामले की सत्यता की जांच के बाद यह स्पष्ट हो गया कि वायरल पत्र पूरी तरह से फर्जी था. फैक्ट चेक में पाया गया कि राज्यसभा सचिवालय की ओर से ऐसा कोई पत्र जारी नहीं किया गया था और जिन नामों का उल्लेख किया गया, वे उस समय झारखंड के आधिकारिक सांसदों की सूची में शामिल नहीं थे. जिस समय यह पत्र वायरल हुआ, उस दौरान झारखंड में राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया चल ही रही थी. ऐसे में इस तरह के भ्रामक पत्र के सामने आने से भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गयी थी.

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AmleshNandan Sinha

लेखक के बारे में

By AmleshNandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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