मनरेगा: काम नहीं देने के जवाबदेह अफसरों के वेतन से होगी बेरोजगारी भत्ते की वसूली

बिहार में मनरेगा में काम नहीं मिलने पर बेरोजगारी भत्ता देने की कैबिनेट स्वीकृति मिल चुकी है. बेरोजगारी भत्ते का भुगतान पहले बिहार रोगजार गारंटी निधि में राज्यांश मद से किया जायेगा.
– मनरेगा में 15 दिनों में काम नहीं मिलने पर पहले राज्यांश से होगा भुगतान मनोज कुमार, पटना बिहार में मनरेगा में काम नहीं मिलने पर बेरोजगारी भत्ता देने की कैबिनेट स्वीकृति मिल चुकी है. बेरोजगारी भत्ते का भुगतान पहले बिहार रोगजार गारंटी निधि में राज्यांश मद से किया जायेगा. इसके बाद इस राशि की वसूली काम नहीं दे पाने के जवाबदेह कर्मियों, अधिकारियों के वेतन से वसूली जायेगी. 30 दिनों में यह राशि जवाबदेह लोगों से सरकार वसूल लेगी. वसूली गयी राशि बिहार रोजगार गारंटी निधि के खाते में जमा करायी जायेगी. इस पूरी कवायद की समीक्षा जिला कार्यक्रम समन्वयक-जिलाधिकारी करेंगे. ग्रामीण विकास विभाग ने इसकी नियमावली जारी कर दी है. काम मांगने पर 15 दिनों में काम नहीं देने पर बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान किया गया है. मौखिक आवेदन भी किया जा सकेगा रोजगार नहीं मिलने के 30 दिनों के अंदर आवेदक को आवेदन करना होगा. परिवार का मुखिया या सदस्य लिखित रूप से बेरोजगारी भत्ते का आवेदन नहीं कर पाने की स्थिति में मौखिक रूप से भी आवेदन कर सकता है. बेरोजगारी भत्ते के लिए आवेदन देने के समय काम मांगने के दौरान दी गयी पावती को आवेदन के साथ देना होगा. 30 दिनों के बाद काम नहीं देने पर मिलेगी आधी मजदूरी 30 दिनों के अंदर काम नहीं मिलने पर दैनिक मजदूरी का एक चौथाई बेरोजगारी भत्ता के रूप में मिलेगा. 30 दिनों के बाद ऐसी स्थिति बनी रहने पर दैनिक मजदूरी का आधा भुगतान किया जायेगा. किसी भी हाल में 100 दिनों से अधिक का भुगतान नहीं होगा. काम नहीं दे पाने का कारण बताना होगा बेरोजगारी भत्ते की स्वीकृति के दौरान ग्राम पंचायत- कार्यक्रम पदाधिकारी को काम नहीं दे पाने का कारण दर्शाना होगा. पंचायत रोजगार सेवक और कार्यक्रम पदाधिकारी पर इसे पूरा कराने की जवाबदेही होगी. अस्वीकृत आवेदनों को प्रखंड और ग्राम पंचायत के सूचना पट्ट पर अंकित किया जायेगा. भत्ता नहीं मिलने पर अपील का भी प्रावधान बेरोजगारी भत्ता के आवेदन पर की गयी कार्रवाई से संतुष्ट नहीं होने पर 30 दिनों के अंदर अपील भी की जा सकेगी. कार्यक्रम पदाधिकारी की कार्रवाई से असंतुष्ट होने पर डीडीसी, डीडीसी के आदेश से संतुष्ट नहीं होने पर डीएम के समक्ष अपील की जायेगी. 60 दिनों के अंदर इसका निराकरण करना होगा. एक फीसदी मजदूरों को भी नहीं मिला सौ दिन काम वित्तीय वर्ष 2023-24 में 0.69 फीसदी परिवारों ने ही सौ दिनों तक काम किया. 2022-23 में 50 लाख 14 हजार 363 में 39 हजार 678 को हो सौ दिनों तक काम मिला. यह कुल संख्या का 0.79 प्रतिशत है. वर्ष 2021-22 में 47 लाख 75 हजार 783 में 21975 को ही सौ दिनों का काम मिला. यह कुल संख्या का 0.46 फीसदी है. 1.36 करोड़ परिवार मनरेगा में रजिस्टर्ड रविवार की शाम तक पूरे राज्यभर में कुल 1 करोड़ 36 लाख 36 हजार 114 परिवार मनरेगा में रजिस्टर्ड हैं. इनकी संख्या 1 करोड़ 61 लाख 77 हजार 176 है. कुल 1 लाख 66 हजार 554 जॉब कार्ड निर्गत किये गये हैं.
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By Prabhat Khabar News Desk
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