बेटा-बेटी में फर्क करने वालों पर नजर रखेंगी ‘अधिकार’ व ‘सक्षमा’ दीदियां
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 19 Aug 2024 12:20 AM
बेटा-बेटी में फर्क करने वालों पर ‘सक्षमा’ और ‘अधिकार’ दीदियां नजर रखेंगी. चुपचाप वे देखेंगी कि किस परिवार में बेटे को प्राइवेट और बेटी को सरकारी स्कूल में भेज जा रहा है. या, इसी तरह की दो तरह की नीतियां अपनायी जा रही हैं.
मनोज कुमार, पटना
बेटा-बेटी में फर्क करने वालों पर ‘सक्षमा’ और ‘अधिकार’ दीदियां नजर रखेंगी. चुपचाप वे देखेंगी कि किस परिवार में बेटे को प्राइवेट और बेटी को सरकारी स्कूल में भेज जा रहा है. या, इसी तरह की दो तरह की नीतियां अपनायी जा रही हैं. ‘सक्षमा’ और ‘अधिकार’ दीदियां ये भी देखेंगी कि किस परिवार में घरेलू हिंसा हो रही है. घरेलू हिंसा नहीं सहने का पीड़िता को वे साहस भी देंगी. कानूनी पहलुओं के बारे में जानकारी देकर पीड़िता को घरेलू हिंसा से संरक्षित करने का काम करेंगी. जीविका दीदियों में से ही ‘सक्षमा’ और ‘अधिकार’ दीदियां बनायी गयी हैं. 37 जिले में दीदी अधिकार केंद्र खोले जा रहे हैं. समाज में हो रहे बदलाव का अवलोकन कर दीदियां अधिकार केंद्रों को सूचित करेंगी. अधिकार केंद्रों से कार्यक्रम बनाकर समाज में हो रहे नकारात्मक चीजों के प्रति जागरूकता अभियान चलायेंगी. अधिकारियों को भी सूचित करेंगी.
पैसे लेकर काम करने वालों पर
भी नजर
गांवों में सरकारी योजनाओं का लाभ देने के नाम पर दलाल व सरकारी कर्मी पैसे ऐंठ लेते हैं. इन सभी तरह की गतिविधियों पर भी ‘सक्षमा’ और ‘अधिकार’दीदियां नजर रखेंगी. अधिकार केंद्रों के माध्यम संबंधित अधिकारियों को सूचना देंगी. इस काम को वे चुपचाप अंजाम देंगी.
174 में 70 अधिकार केंद्र खोले गये
राज्य के 37 जिलों में कुल 174 प्रखंडों में दीदी अधिकार केंद्र खोले जाने हैं. इसमें 70 में खोल दिये गये हैं. शेष में खोले जाने की पहल की जा रही है. सरकारी भवन नहीं मिलने के कारण अभी तक शेष प्रखंडों में अधिकार केंद्र नहीं खोले जा सके हैं.
जीविका दीदियों की समस्याओं का करेंगी समाधान
जीविका दीदियों की संख्या एक करोड़ 31 लाख हो गयी है. अधिकतर महिलाएं ग्रामीण बैकग्राउंड की है. सरकारी कार्यालयों से उनका वास्ता पड़ता रहता है. कई महिलाएं, युवतियां घरेलू और लैंगिक हिंसा का शिकार होती रहती हैं. मगर, वे संकोचवश थाने और सरकारी दफ्तरों में नहीं जाती हैं. ऐसे में ‘सक्षमा’ और ‘अधिकार’ दीदियां अफसरों, थानों व पीड़िता के बीच कड़ी का काम करेंगी.
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