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Bihar Police: बिहार पुलिस होगी स्मार्ट और हाई-टेक, आधुनिकीकरण का नया खाका तैयार

Updated at : 13 Sep 2025 6:47 AM (IST)
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Bihar Police: अब अपराधियों की राह आसान नहीं—बिहार पुलिस स्मार्ट हथियारों और हाई-टेक उपकरणों से होगी लैस, हर थाने से लेकर विशेष इकाइयों तक निगरानी होगी और मजबूत.

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Bihar Police: पटना की सुरक्षा रणनीति अब एक नए दौर में प्रवेश कर रही है. थानों में सीसीटीवी कैमरे, साइबर अपराध पर नकेल कसने वाले अत्याधुनिक उपकरण, चुनावी सुरक्षा संभालने वाले विशेष दस्ते और पुलिस बल के हाथों में स्मार्ट हथियार.

यह सब मिलकर बिहार पुलिस की नई तस्वीर गढ़ रहे हैं. पुलिस आधुनिकीकरण की इस कवायद को केंद्र और राज्य सरकार की साझा पहल से गति मिली है, जिससे अपराध नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत किया जा सकेगा.

पटना की सुरक्षा व्यवस्था अब नए दौर में

सीसीटीवी कैमरों से सजे थाने, साइबर अपराध पर कड़ी नजर रखने वाले आधुनिक उपकरण, चुनावी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले विशेष दस्ता और पुलिस बल के हाथों में अत्याधुनिक हथियार—यह तस्वीर अब दूर नहीं है. बिहार पुलिस को स्मार्ट और हाई-टेक बनाने का खाका तैयार हो चुका है और उसकी प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ रही है.

केंद्र और राज्य मिलकर करेंगे पुलिस का कायाकल्प

पुलिस आधुनिकीकरण की इस बड़ी योजना को एएसयूएमपी (Assistance to States & UTs for Modernization of Police) कहा जाता है. यह केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसमें 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार देगी. साल 2025-26 के लिए इस योजना के तहत बिहार को 66 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है. इस राशि का इस्तेमाल हथियारों की खरीद, स्मार्ट पुलिसिंग उपकरण, संचार साधन और अन्य आवश्यक संसाधनों पर किया जाएगा. गृह विभाग से मंजूरी मिलते ही इसका उपयोग शुरू कर दिया जाएगा.

राज्य के 1212 थानों में पहले ही सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं. अब 176 नए थानों में भी कैमरे लगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. इसके लिए 280 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जा चुके हैं. यह कदम पुलिस को घटनाओं की निगरानी और अपराधियों की पहचान करने में और अधिक सक्षम बनाएगा. आने वाले समय में कोई वारदात कैमरे की नजर से बच पाना मुश्किल होगा.

विशेष इकाइयों की क्षमता होगी दोगुनी

आधुनिकीकरण की इस योजना में बिहार पुलिस की विशेष इकाइयों को भी नए संसाधनों से लैस किया जा रहा है. विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए स्पेशल सिक्योरिटी ग्रुप (SSG) के लिए 21.37 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है. इससे सुरक्षाकर्मियों का प्रशिक्षण और चुनावी सुरक्षा दोनों मजबूत होंगे.

बम निरोधक दस्ता को 20.57 करोड़ रुपये की राशि दी गई है, जिसमें से 10.57 करोड़ रुपये पहले ही जारी कर दिए गए हैं. यह दस्ता संवेदनशील मौकों पर तुरंत कार्रवाई कर सकेगा. स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को 6.28 करोड़ रुपये के आधुनिक उपकरण दिए जाएंगे, जिससे संगठित अपराध और उग्रवादी गतिविधियों पर नियंत्रण और आसान हो जाएगा.

साइबर अपराध पर नकेल के लिए हाई-टेक उपकरण

डिजिटल युग में अपराध का चेहरा बदल गया है. इस चुनौती से निपटने के लिए आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को 14.75 करोड़ रुपये के अत्याधुनिक साइबर उपकरण दिए जाएंगे. इसका मकसद है—ऑनलाइन धोखाधड़ी, चुनावी अपराध और साइबर सुरक्षा से जुड़ी अन्य चुनौतियों पर तुरंत कार्रवाई करना.

पुलिस की बड़ी इकाइयों के साथ-साथ अन्य विभागों को भी मजबूत किया जा रहा है. बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (BSAP) की विभिन्न वाहिनियों को 6.60 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई है. रेल पुलिस को 44 लाख रुपये मिले हैं, जिससे ट्रेनों और स्टेशनों पर सुरक्षा व्यवस्था और चुस्त होगी. वहीं स्पेशल ब्रांच के लिए 91 लाख रुपये स्वीकृत हुए हैं. इस धनराशि से आसूचना संकलन और प्रशिक्षण के लिए आधुनिक उपकरण खरीदे जाएंगे.

केवल हथियार नहीं, स्मार्ट पुलिसिंग की ओर कदम

एडीजी सुधांशु कुमार ने स्पष्ट किया कि पुलिस आधुनिकीकरण केवल हथियारों तक सीमित नहीं है. यह दरअसल स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा में बड़ा कदम है. स्मार्ट उपकरणों और हाई-टेक निगरानी तंत्र से पुलिस अपराध नियंत्रण में ज्यादा सक्षम होगी. साथ ही सुरक्षा व्यवस्था भी और अधिक मजबूत होगी.

यह पहल सिर्फ अपराधियों के लिए खतरे की घंटी नहीं है, बल्कि आम नागरिकों के लिए सुरक्षा की नई गारंटी है. स्मार्ट पुलिसिंग की ओर बढ़ते कदमों से बिहार की सड़कों से लेकर डिजिटल दुनिया तक अपराधियों के लिए जगह और संकरी होती जाएगी.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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