Bihar News: बिहार चुनाव 2025 के नतीजे घोषित होने के बाद शनिवार का दिन आरोप–प्रत्यारोपों से गरमाया रहा. कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से पूछा कि आखिर मतदान प्रक्रिया के बीच तीन लाख नए मतदाता कैसे जुड़ गए? वहीं शिवसेना (उद्धव) ने और भी तीखे तेवर दिखाते हुए भाजपा और जद(यू) की जीत को “वोट चोरी” का नतीजा बताया. आयोग ने इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि नियमों के अनुसार पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े गए, लेकिन विपक्ष इन तर्कों से संतुष्ट नहीं दिखता.
कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव) ने शनिवार को निर्वाचन आयोग पर दबाव बढ़ाया और दावा किया कि बिहार में वोटिंग प्रक्रिया “संदिग्ध” रही. कांग्रेस ने जहां मतदाता सूची में “तीन लाख की अचानक बढ़ोतरी” का मुद्दा उठाया, वहीं शिवसेना ने इसे “सीधे-सीधे वोट चोरी” बताया.
कांग्रेस का सवाल- तीन लाख मतदाता कैसे बढ़ गए?
शनिवार को कांग्रेस ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए निर्वाचन आयोग से पूछा कि बिहार में चुनाव के दौरान तीन लाख अतिरिक्त मतदाता कहां से आ गए? कांग्रेस ने कहा कि 6 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा जारी प्रेस नोट में कुल मतदाताओं की संख्या 7.42 करोड़ बताई गई थी. लेकिन मतदान के बाद जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में यह संख्या 7.45 करोड़ दिखाई गई.
कांग्रेस ने इसे “अविश्वसनीय” बताते हुए आयोग से स्पष्ट स्पष्टीकरण की मांग की. पार्टी ने आरोप लगाया कि यह वृद्धि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करती है और मतदाता सूची में बदलाव बेहद संवेदनशील मुद्दा है, जिसे हल्के में नहीं लिया जा सकता.
निर्वाचन आयोग का जवाब- कार्यवाही नियमों के अनुसार
आयोग ने तुरंत ही कांग्रेस के आरोपों का विस्तृत उत्तर जारी किया। आयोग ने कहा कि 6 अक्टूबर को जारी आंकड़ा 30 सितंबर को मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के आधार पर था. लेकिन चुनाव नियमों के अनुसार पात्र नागरिक नामांकन की अंतिम तिथि से 10 दिन पहले तक नए मतदाता के रूप में आवेदन कर सकते हैं.
आयोग ने बताया कि इस अवधि में प्राप्त सभी वैध आवेदनों का सत्यापन किया गया और योग्य नागरिकों के नाम सूची में जोड़े गए. आयोग ने कहा कि “किसी भी योग्य नागरिक को मतदान से वंचित रहने से बचाने के लिए” यह कदम उठाया गया. आयोग के अनुसार, इसी प्रक्रिया के कारण तीन लाख की वृद्धि संभव हुई.
लेकिन कांग्रेस ने आयोग की इस सफाई को “अपर्याप्त और संदिग्ध” बताया है. पार्टी का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में नए मतदाताओं का शामिल होना चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है, खासकर तब जब परिणाम बेहद निर्णायक रहे हों.
शिवसेना (उद्धव) के तीखे आरोप- ‘बिहार चुनाव लोकतंत्र का घोटाला’
कांग्रेस के साथ-साथ शिवसेना (उद्धव) ने भी बिहार चुनाव के परिणामों पर बड़ा हमला बोला है. पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित संपादकीय में दावा किया गया कि बिहार चुनाव पूरी तरह से ‘घोटाला’ है और भाजपा ने “वोट चोरी” के दम पर जीत हासिल की है.
पार्टी ने यह भी कहा कि बिहार में भाजपा का मॉडल वही है जो महाराष्ट्र में अपनाया गया था, जहां विपक्षी महा विकास आघाड़ी को 50 सीटें भी नहीं जीतने दी गईं. संपादकीय में दावा किया गया कि “भाजपा और चुनाव आयोग वांछित परिणाम हासिल करने के लिए मिलकर काम कर रहे थे.”
नीतीश कुमार पर भी निशाना
शिवसेना ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी विवादास्पद टिप्पणी की. पार्टी ने दावा किया कि नीतीश “स्मृति लोप” की समस्या से जूझ रहे हैं और सवाल उठाया कि “ऐसा व्यक्ति बिहार का नेतृत्व कैसे कर सकता है?”
पार्टी ने यह भी कहा कि भाजपा समय आने पर जद (यू) पर पूरा नियंत्रण कर लेगी और मुख्यमंत्री पद भी अपने हाथ में ले लेगी.
भारी जीत के बाद भी विवादों में NDA
बिहार में एनडीए ने रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए सत्ता बरकरार रखी. भाजपा ने इस बार 89 सीटें जीतीं, जो 2020 की तुलना में 15 अधिक हैं. जद(यू) ने भी उल्लेखनीय वृद्धि दिखाई और 43 से बढ़कर 85 सीटों पर जीत हासिल की.
दूसरी ओर कांग्रेस केवल 6 सीटों पर सिमट गई, जबकि राजद की सीटों में भी इस बार बड़ी गिरावट दर्ज की गई. नतीजों ने महागठबंधन को गहरा झटका दिया है और इसी कारण वह चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रहा है.
चुनाव नतीजों के बाद यह पहला मौका है जब दो बड़े विपक्षी दल कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव) ने एक साथ निर्वाचन आयोग पर निशाना साधा है.
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