अब यादों में लालू प्रसाद की 'कुर्ता फाड़' होली, दोस्त के साथ राजनीतिक विरोधी भी आते थे गले लगाने

लालू प्रसाद की होली की तस्वीर
Bihar Holi Special: 4 मार्च को होली है. ऐसे तो होली हर जगह मनाई जाती है, पर बिहार की होली की बात ही कुछ और है. जिस राज्य में होली की यह धूम हो, वहां के राजनेता इससे वंचित रह जायें यह कतई संभव नहीं. इनमें सबसे खास होती थी लालू प्रसाद की 'कुर्ता फाड़' होली. इसमें ना केवल राजद के बल्कि अन्य दलों के लोगों को भी झूमते देखा जाता था. इस साल कैसी होगी लालू प्रसाद की होली, आइए डालते हैं एक नजर...
Bihar Holi Special: बिहार में लोगों पर होली का रंग चढ़ना शुरू हो गया है. अबीर, गुलाल, पिचकारी समेत होली से जुड़े सामानों से दुकानें सज गईं हैं. जिले में हर जगह फगुआ की गीत गूंजने लगे हैं. राजनेताओं की तैयारी भी रेस में है. क्षेत्र से लेकर पटना तक की तैयारी अंतिम चरण में है. ऐसे में सबकी निगाह लालू प्रसाद की ओर है. क्या इस बार वह अपनी ‘कुर्ता फाड़’ होली को दुहरायेंगे या फिर शांतिपूर्वक तिलक होली में सिमट कर रह जायेंगे?
यादों में जोगिरा…
पत्नी राबड़ी देवी और राजद कार्यकर्ताओं के साथ गुलाबी-हरे रंग में रंगे लालू जी की तस्वीरें और उनका ‘जोगिरा सारा रा रा रा’ वाला अंदाज अब बस यादों में ही रह गया है. पटना का राबड़ी आवास, जो कभी होली के वक्त गुलजार रहता था, अब वहां सन्नाटा पसर गया है. लालू जी की होली अब बस बंद कमरे तक ही सिमट कर रह गई है.
कुछ ऐसी होती थी लालू प्रसाद की ‘कुर्ता फाड़’ होली
लालू प्रसाद की ‘कुर्ता फाड़’ होली पर एक नजर डालें, तो यह वह मौका होता था जब लालू जी का पूरा राजद परिवार एक साथ सभी गिले-शिकवे भूल कर धूमधाम से जश्न मनाते थे. होली मनाने में बिहार का कोई अन्य राजनीतिक नेता उनकी बराबरी नहीं कर पाता था. ‘होली के दिन दिल मिल जाते हैं…’ के बोल उनके घर सही साबित होता था, क्योंकि होली के मौके पर सिर्फ राजद ही नहीं, दूसरे दल के भी नेता उनके घर पहुंचते थे.
पप्पू यादव रंग में रंगे
एक पुरानी तस्वीर में पप्पू यादव भी लालू यादव के साथ मिल ‘कुर्ता फाड़’ होली खेलते दिखे हैं. दरअसल, राबड़ी आवास में होली के दिन एक दम अलग नजारा देखने को मिलता था. सुबह होते ही उनके घर का दरवाजा हर किसी के लिए खोल दिया जाता था. लालू जी खुद ढोल-मंजीरा लेकर बैठ जाते थे. यहां होली के वक्त कुर्ता फाड़ना अनिवार्य होता था. अधिकांश लोग फटे कुर्ता के साथ अपने घर जाते थे.

राबड़ी देवी भी देती थीं साथ
खास बात यह भी होती थी कि लालू जी की पत्नी राबड़ी देवी भी उनका पूरा साथ देती थीं. सुबह से लेकर दोपहर तक होली खेलने के बाद शाम में सभी लोग अबीर-गुलाल लगाने के बाद स्वादिष्ट पकवानों का लुत्फ उठाते थे.
डैमेज कंट्रोल होता था, तो शक्ति प्रदर्शन भी
लालू जी की होली के कई मायने थे. कभी यह शक्ति प्रदर्शन का माध्यम बना, तो कभी पार्टी के कार्यकर्ताओं को जोड़े रखने के लिए. होली के रंग के साथ मौन-मनौव्वल और दुलार तक के लिए यह मशहूर था. सभी जानते हैं कि लालू प्रसाद स्ट्रॉन्ग पॉलिटिशियन के साथ बेहतर डैमेज कंट्रोलर के रूप में भी जाने जाते हैं. उनकी होली में शान से लोग शामिल होते थे. लालू प्रसाद का होली वाला यह अंदाज आज भी लोग याद करते हैं.
अब तिलक होली में सिमटे लालू जी
समय बदला, उम्र बढ़ी और कई अन्य दुश्वारियों के कारण अब लालू प्रसाद की होली बस यादों में ही रह गई है. अब लालू यादव ना तो उस जोश के साथ होली खेलते और ना ही फगुआ गाते हैं. उनके पार्टी के कार्यकर्ता सिर्फ उनके गानों को याद करके ही खुश हो जाते हैं और जश्न मनाते हैं. लालू प्रसाद के जेल जाने, पारिवारिक उलझनों और उनकी तबीयत खराब रहने की वजह से अब उनकी होली तिलक होली में सिमट गई है.
कार्यकर्ताओं को है कुर्ता फाड़ होली का इंतजार
दुश्वारियों का मतलब यह नहीं कि लालू प्रसाद कमजोर हो गए हैं. सभी जानते हैं कि चाहे कोई भी आरोप लगे हों, हर वक्त वह डटे रहे. इसका तत्कालीन उदाहरण है कि जब लैंड फॉर जॉब मामले में कोर्ट की तरफ से आदेश सुनाया गया था, तब उन्होंने कहा कि वे कानूनी लड़ाई लड़ेंगे. इन वजहों से कार्यकर्ताओं को अब भी उम्मीद है कि एक बार फिर से होली पर लालू प्रसाद का घर गुलजार होगा और वो फिर से ढोल की थाप पर सबको गुलाल लगा कर होली की शुभकामना देंगे.
अबकी होली कौन सा रंग बरसेगा?
होली के मौके पर लालू यादव ज्यादातर अपने आवास पर बेटे तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव और पोते-पोतियों के साथ पर्व मनाते दिखते थे. इस बार लालू प्रसाद किस तरह से होली मनाते हैं, यह देखने वाली बात होगी, क्योंकि उनके बेटे तेज प्रताप को उन्होंने खुद पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया है. लेकिन मकर संक्रांति के मौके पर तेज प्रताप की तरफ से आयोजित किए गए दही-चूड़ा भोज में तेज प्रताप के बुलावे पर लालू यादव उनके आवास पर पहुंचे थे. बेटे के साथ समय भी बिताया था, तो क्या दही-चूड़ा और गुड़ की मिठास में कड़वाहट मिट गई है और इस होली जम कर बरसेगा रंग या फिर एक बार फिर अपनों के बीच तिलक होली में बीतेगी होली?
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By Preeti Dayal
डिजिटल जर्नलिज्म में 3 साल का अनुभव. डिजिटल मीडिया से जुड़े टूल्स और टेकनिक को सीखने की लगन है. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं. बिहार की राजनीति और देश-दुनिया की घटनाओं में रुचि रखती हूं.
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