हुसैनाबाद के सोहेया खदान से 25 घंटे बाद मिला युवक का शव, गांव में पसरा मातम

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 04 Jun 2026 5:08 PM

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घटनास्थल पर पहुंच भाजपा के युवा नेता सूर्या सोनल सिंह (दाहिनी ओर बीच में). फोटो: प्रभात खबर

Palamu News: पलामू के हुसैनाबाद स्थित सोहया माइंस खदान में डूबे 21 वर्षीय लवकुश गुप्ता का शव 25 घंटे बाद बरामद हुआ. दोस्तों के साथ नहाने के दौरान वह गहरे पानी में चला गया था. घटना के बाद ग्रामीणों ने मुआवजे और खदान के गड्ढों को भरने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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हुसैनाबाद से नौशाद की रिपोर्ट

Palamu News: पलामू जिले के हुसैनाबाद थाना क्षेत्र स्थित सोहया पहाड़ माइंस खदान में डूबे युवक का शव करीब 25 घंटे बाद पानी की सतह पर दिखाई दिया. स्थानीय ग्रामीणों और गोताखोरों की मदद से शव को बाहर निकाला गया. शव मिलने के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई. मृतक की पहचान पत्तरा खुर्द गांव निवासी सतेंद्र साव के 21 वर्षीय पुत्र लवकुश गुप्ता के रूप में हुई है. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अनुमंडलीय अस्पताल भेज दिया.

दोस्तों के साथ नहाने गया था लवकुश

जानकारी के अनुसार, लवकुश गुप्ता बुधवार को अपने कुछ दोस्तों के साथ सोहया पहाड़ स्थित माइंस खदान के उस गड्ढे में नहाने गया था, जो बारिश और भूजल के कारण पानी से भरा हुआ था. बताया जाता है कि दोपहर करीब 12 बजे नहाने के दौरान वह गहरे पानी में चला गया और डूब गया. स्थानीय लोगों के अनुसार, खदान में बना यह गड्ढा लगभग 40 फीट गहरा है, जिसमें करीब 25 फीट तक पानी भरा हुआ है. गहराई का अंदाजा नहीं होने के कारण युवक हादसे का शिकार हो गया.

प्रशासन और गोताखोरों ने चलाया खोज अभियान

घटना की सूचना मिलते ही हुसैनाबाद अंचल पदाधिकारी पंकज कुमार और थाना प्रभारी चंदन कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे. प्रशासन ने तत्काल स्थानीय गोताखोरों की मदद से खोज अभियान शुरू कराया. गोताखोर कई घंटों तक पानी में उतरकर युवक की तलाश करते रहे, लेकिन सफलता नहीं मिली. शाम होने और अंधेरा बढ़ने के कारण खोज अभियान रोकना पड़ा. देर शाम तक शव नहीं मिलने पर अंचल पदाधिकारी ने जिला प्रशासन से एनडीआरएफ टीम भेजने का अनुरोध किया.

गुरुवार दोपहर पानी की सतह पर दिखा शव

गुरुवार सुबह से ही घटनास्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ जुटने लगी. लोगों को उम्मीद थी कि एनडीआरएफ टीम पहुंचने के बाद युवक का शव बरामद किया जा सकेगा. प्रशासन लगातार एनडीआरएफ टीम के संपर्क में था, जो बिहार की राजधानी पटना से हुसैनाबाद के लिए रवाना हुई थी. इसी बीच गुरुवार दोपहर करीब एक बजे लोगों की नजर खदान के गड्ढे में पानी की सतह पर तैरते शव पर पड़ी. इसके बाद पुलिस, प्रशासन और ग्रामीणों के सहयोग से शव को बाहर निकाला गया. शव निकाले जाने के कुछ समय बाद एनडीआरएफ की टीम भी घटनास्थल पर पहुंच गई.

शव देखते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

शव बाहर निकलते ही घटनास्थल पर मौजूद परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया. मृतक के पिता सतेंद्र साव पिछले कई घंटों से खदान के किनारे बैठकर बेटे के मिलने की उम्मीद लगाए हुए थे. जैसे ही उन्होंने बेटे का शव देखा, वे फूट-फूटकर रोने लगे. घटना के बाद पूरे पत्तरा खुर्द गांव में मातम पसरा हुआ है. मौके पर पंचायत की मुखिया आंचल देवी, समाजसेवी कुंदन पासवान, पूर्व मुखिया लल्लू रजवार, मदन पासवान, मुन्ना कुमार देव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे.

मुआवजे की मांग को लेकर सड़क जाम

घटना के बाद ग्रामीणों का आक्रोश भी देखने को मिला. बुधवार को ग्रामीणों ने जपला-छतरपुर मुख्य सड़क पर दो अलग-अलग स्थानों पर टायर जलाकर सड़क जाम कर दिया. ग्रामीणों की मांग थी कि पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए और माइंस संचालकों द्वारा छोड़े गए खतरनाक गड्ढों को तत्काल भरा जाए. शाम करीब 7 बजे शुरू हुआ सड़क जाम रात 11:30 बजे तक जारी रहा. इस दौरान सड़क के दोनों ओर छोटे-बड़े वाहनों की लंबी कतार लग गई और यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा.

सोहया पहाड़ में डूबने की यह दूसरी घटना

स्थानीय लोगों का कहना है कि सोहया पहाड़ माइंस क्षेत्र में यह पहली घटना नहीं है. इससे पहले 15 सितंबर 2021 को हुसैनाबाद थाना क्षेत्र के घाघरा गांव निवासी 75 वर्षीय रामनंदन रजवार की भी इसी तरह पानी से भरे गड्ढे में डूबने से मौत हो गई थी. लगातार हो रही ऐसी घटनाओं के बावजूद सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जाने पर ग्रामीणों में नाराजगी है.

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माइंस संचालकों की लापरवाही पर उठे सवाल

घटना के बाद माइंस संचालकों की कार्यशैली और प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं. माइनिंग विभाग के निर्देशों के अनुसार खदानों में विस्फोट के बाद बने गड्ढों को भरना अनिवार्य है, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो. ग्रामीणों का आरोप है कि कई माइंस संचालक इन निर्देशों का पालन नहीं करते और खदानों में बने गहरे गड्ढों को खुला छोड़ देते हैं. वहीं, ऐसे मामलों में विभागीय कार्रवाई भी अक्सर नहीं होती. स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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