पलामू जिला स्कूल में एडमिशन स्कैम, टेस्ट में फेल बच्चों भी नामांकित

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मेदिनीनगर का सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस. फोटो: प्रभात खबर

मेदिनीनगर के प्रतिष्ठित जिला स्कूल में योग्यता को दरकिनार कर अवैध नामांकन का मामला सामने आया है. सूत्रों के मुताबिक, मोटी रकम लेकर टेस्ट में फेल हुए बच्चों को भी दाखिला दिया गया. इस घोटाले ने शिक्षा महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है.

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मेदिनीनगर से चंद्रशेखर सिंह की रिपोर्ट

Palamu Admission Scam: पलामू के प्रतिष्ठित जिला स्कूल (सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस) में योग्यता को दरकिनार कर राशि की अवैध वसूली कर बैकडोर से नामांकन लेने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. झारखंड सरकार जिस स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के जरिये गरीब और मेधावी बच्चों को निशुल्क विश्वस्तरीय शिक्षा और सुविधाएं देकर उनके भविष्य निर्माण में जुटी है, वहीं शिक्षा विभाग के अधिकारियों के निर्देश पर सीटों की खुली बोली लगाकर इसे अवैध कमाई का जरिया बना दिया गया है.

मोटी रकम लेकर दाखिला कराने का आरोप

विद्यालय सूत्रों के अनुसार, टेस्ट परीक्षा में फेल हो चुके अयोग्य बच्चों से मोटी रकम लेकर उन्हें दाखिला दे दिया गया, जिससे रात-दिन मेहनत करने वाले मेधावी छात्रों के भविष्य के साथ सरेआम खिलवाड़ किया गया है. जो बच्चे फेल हो गये थे उनमें कई अभिभावकों ने एडमिशन के लिए उनके मां ने गहने बेचकर पैसे का जुगाड़ किया था. इस तरह से प्रवेश परीक्षा की शुचिता भंग कर किये गये. इस बड़े घोटाले ने अब पूरे शिक्षा महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर अब इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गयी है.

व्हाट्सएप लिस्ट से खुली एडमिशन सिंडिकेट की पोल

नियमों के मुताबिक इस उत्कृष्ट विद्यालय में केवल प्रवेश परीक्षा पास करने वाले मेधावी बच्चों का ही नामांकन होना है. लेकिन इस पारदर्शी व्यवस्था को ध्वस्त करने के लिए बकायदा व्हाट्सएप का सहारा लिया गया. सूत्रों के मुताबिक बच्चों की एक खास सूची व्हाट्सएप के जरिये पलामू के पूर्व डीइओ सौरभ प्रकाश और शिक्षा विभाग के कई रसूखदार लोगों के द्वारा स्कूल को सूची भेजी गयी थी. इसी गुप्त सूची और मोटी रकम के घालमेल के आधार पर धड़ल्ले से अवैध दाखिले सुनिश्चित किये गये.

झारखंड में 80 मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय चयनित

झारखंड सरकार राज्य में 80 मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय का चयन किया है. जिसमें बच्चों को सारी सुविधा उपलब्ध कराया गया है, ताकि अभिभावक को बच्चों की पढ़ाई को लेकर कोई परेशानी न हो. लेकिन पिछले तीन माह से यह विद्यालय शिक्षकों के लिए अखाड़ा का केंद्र बन गया है. पलामू के लिए जिला स्कूल गौरव का केंद्र माना गया है. लेकिन यह विद्यालय में शैक्षणिक वातावरण पूरी तरह से दूषित हो चुका है. इस मामले में जनप्रतिनिधि चुप्पी साधे हुए है.

मुफ्त की सरकारी सुविधाओं पर रसूखदारों का डाका

झारखंड सरकार इन विद्यालयों में बच्चों को हाई-टेक लैब, आधुनिक लाइब्रेरी, ड्रेस और किताबें पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध करा रही है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को भी निजी स्कूलों जैसी शिक्षा मिले. लेकिन पलामू में अफसरों और बिचौलियों के इस गठजोड़ ने सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना कमाई का जरिया बना दिया है. योग्य और गरीब छात्र व्यवस्था पर खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं और अब इस सिंडिकेट पर बड़ी कार्रवाई का इंतजार है.

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शिक्षक के दुर्व्यवहार से छात्रा ने छोड़ी पढ़ाई

पलामू प्रमंडलीय मुख्यालय मेदिनीनगर शहर के जिला स्कूल की एक पहचान रही है. लेकिन वर्तमान में शैक्षणिक वातावरण शिक्षकों का आचरण ने इस विद्यालय को काफी नीचे धकेल दिया है. इस विद्यालय के बायो शिक्षक बलराम शाह पर 11वीं क्लास की छात्रा ने दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया था. छात्रा के अभिभावक ने पलामू डीईओ को आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है. हालांकि, इस मामले में प्रशिक्षु आईएएस को जांच जिम्मेवारी मिली है. विडंबना है कि एक शिक्षक का आचरण के कारण छात्रा विद्यालय में पढ़ाई छोड़ दे. यह जिला प्रशासन और सरकार के लिए भी चुनौती है.

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