दागी 25 आइएएस अफसरों में चार रिटायर
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 11 Jan 2020 8:18 AM
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पटना : बहुचर्चित मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड के साथ 10 अन्य जिलों के शॉर्ट स्टे होम या बालिका गृह की जांच रिपोर्ट सीबीआइ ने सरकार को सौंप दी है. इस रिपोर्ट में 20 तत्कालीन डीएम समेत 25 आइएएस अधिकारियों के अलावा बिहार प्रशासनिक सेवा स्तर के 45 पदाधिकारियों को दोषी पाया गया है. हालांकि, जांच […]
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पटना : बहुचर्चित मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड के साथ 10 अन्य जिलों के शॉर्ट स्टे होम या बालिका गृह की जांच रिपोर्ट सीबीआइ ने सरकार को सौंप दी है. इस रिपोर्ट में 20 तत्कालीन डीएम समेत 25 आइएएस अधिकारियों के अलावा बिहार प्रशासनिक सेवा स्तर के 45 पदाधिकारियों को दोषी पाया गया है.
हालांकि, जांच की प्रक्रिया अभी जारी है, यह संभावना व्यक्त की जा रही है कि जांच की गति बढ़ने के साथ ही कुछ और अधिकारी इसकी जद में आ सकते हैं. फिलहाल जिनकी रिपोर्ट आ चुकी है, उन सभी पर शो-कॉज की तलवार लटकी हुई है. जल्द ही इन पर शो-कॉज जारी किया जा सकता है. प्राप्त सूचना के अनुसार 25 आइएएस अधिकारियों में तीन-चार अधिकारी ऐसे भी हैं, जो वर्तमान में रिटायर्ड हो चुके हैं.
इसके अलावा दो दर्जन से ज्यादा इन अधिकारियों की फेहरिस्त में बिहार प्रशासनिक सेवा से आइएएस में प्रोन्नत हुए अधिकारी भी शामिल हैं. रिटायर्ड हुए अधिकारियों पर किस तरह से कार्रवाई की प्रक्रिया कैसे शुरू की जायेगी, इस पर भी विभागीय स्तर पर मंथन चल रहा है. हालांकि, इनसे भी शो-कॉज किया जा सकता है.
इस मामले में गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव आमिर सुबहानी का कहना है कि अगर रिटायर्ड अधिकारियों का नाम भी रिपोर्ट में है, तो उससे भी कोई फर्क नहीं पड़ता है. ऐसे अधिकारियों पर भी सामान रूप से कार्रवाई की जायेगी. उन्होंने बताया कि सीबीआइ की रिपोर्ट कुछ अधिकारियों के बारे में प्राप्त हो चुकी है. कुछ के बारे में रिपोर्ट अभी आ रही है.
मुख्य आरोपित को बचा रही सीबीआइ हो न्यायिक जांच : महिला संगठन
पटना. शेल्टर होम मामले में सीबीआइ रिपोर्ट पर महिला संगठनों ने आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि मुख्य आरोपित को बचाया जा रहा है. मामले की फिर से न्यायिक जांच होनी चाहिए. इसे आपराधिक मामले की तरह देखते हुए जांच होनी चाहिए.
बिहार महिला समाज की कार्यकारी अध्यक्ष निवेदिता झा ने प्रेस काॅन्फ्रेंस में यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआइ को दो बच्चियों के बयान के आधार पर जांच करने का निर्देश दिया था. परंतु सीबीआइ ने बच्चियों के बयान को जांच का आधार नहीं बनाया. सीबीआइ ने जो रिपोर्ट सौंपी, वह निराशाजनक व संदेहास्पद है.
ज्ञातव्य है कि इस मामले में निवेदिता झा ने सुप्रीम कोर्ट में अपने पिटीशन में सीबीआइ पर बच्चियों के बयान के आधार पर जांच नहीं करने का आरोप लगाया था. महिला संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल होने से पहले सीबीआइ ने खुद 11 बच्चियों के गायब होने की बात कही थी. अब कह रही है कि 35 बच्चियां सकुशल बरामद कर ली गयी है. आखिर 24 बच्चियां कहां से आयीं.
प्रेस काॅन्फ्रेंस में ऐपवा की मीना तिवारी, एडवा की रामपरी, अधिवक्ता अलका रानी व सुधा अंबष्ठ, कामायनी, बिहार राज्य विद्यालय रसोइया संघ की महासचिव सरोज चौबे, लोकतांत्रिक जन पहल की कंचनबाला सहित अन्य मौजूद थीं.
जोर-शोर से हो रही तैयारी. प्रखंडों में भी निर्धारित हो गये हैं रूट
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