रामाशीष सिंह यादव की करोड़ों की संपत्ति जब्त, जानें क्या है पूरा मामला
Updated at : 04 Sep 2019 7:32 AM (IST)
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पटना : निगरानी ब्यूरो ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में विज्ञान एवं प्रावैधिकी विभाग के तत्कालीन क्लर्क रामाशीष सिंह यादव की करोड़ों की संपत्ति को जब्त कर लिया है. अब विभाग इसे सील कर आने कब्जे में लेने जा रहा है. वह राज्य कर्मचारी चयन आयोग (एसएसएससी) में हुए पेपर घोटाले में भी […]
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पटना : निगरानी ब्यूरो ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में विज्ञान एवं प्रावैधिकी विभाग के तत्कालीन क्लर्क रामाशीष सिंह यादव की करोड़ों की संपत्ति को जब्त कर लिया है. अब विभाग इसे सील कर आने कब्जे में लेने जा रहा है.
वह राज्य कर्मचारी चयन आयोग (एसएसएससी) में हुए पेपर घोटाले में भी अभियुक्त है और फिलहाल इसी मामले में जेल में बंद है. निगरानी ने उस पर अप्रैल, 2006 में दर्ज किये गये डीए केस में यह कार्रवाई की है. इसके तहत उसकी पटना के राजीव नगर में 17 कट्ठा से ज्यादा क्षेत्र में मौजूद एक बड़े स्कूल समेत चार अन्य संपत्तियों को सरकार अपने कब्जे में ले लेगी. इसका सरकारी मूल्य एक करोड़ 41 लाख से अधिक है, जबकि बाजार मूल्य करीब 12 करोड़ है.
इन संपत्तियों को सील करके कब्जा में लेने की प्रक्रिया करीब 10 दिनों में पूरी कर ली जायेगी. इससे पहले निगरानी ब्यूरो डीए केस में नौ सरकारी लोकसेवकों की संपत्ति जब्त कर चुका है, जिनमें बाल निकेतन जैसे कुछ अन्य सरकारी संस्थान खोले जा चुके हैं. रामाशीष सिंह यादव का केस 10वां है.प्राप्त सूचना के अनुसार रामाशीष सिंह यादव विज्ञान एवं प्रावैधिकी विभाग में क्लर्क के पद पर तैनात था. उसने बीपीएससी में अपनी पदस्थापना करवायी थी. बीपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष के साथ उसके अच्छे संबंध थे. इसका फायदा उठाया.
पटना में ये संपत्तियां हुईं जब्त
राजीवनगर स्थित स्कूल के 17 कट्ठे का प्लॉट स्कूल में निर्मित मंदिर
रामाशीष व पत्नी मालती सिन्हा के नाम से टीडीआर में निवेश किये एक लाख रुपये
यह है पूरा मामला
निगरानी ब्यूरो ने रामाशीष सिंह यादव पर 19 अप्रैल, 2006 को डीए केस किया था. उस पर भ्रष्टाचार निरोध कानून के अलावा आइपीसी की कई धाराओं में मामला दर्ज किया था. इसके बाद संपत्ति जब्त करने के लिए न्यायालय में ब्यूरो ने 2013 में आवेदन दायर किया था.
इसके बाद इस मामले में विशेष न्यायालय निगरानी-2 के तत्कालीन अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने उनकी संपत्ति जब्त करने का आदेश फरवरी, 2018 में दे दिया था. इसके बाद रामाशीष सिंह यादव ने इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी. इससे इस मामले में स्टे लग गया. लेकिन मामले की सुनवाई के दौरान निगरानी की तरफ से की गयी तमाम आपत्तियों और सवालों का जवाब नहीं दे सका. इस पर हाइकोर्ट ने उनकी सभी दलीलों को खारिज करते हुए निचले अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए उनकी संपत्ति जब्ती का आदेश बरकरार रखा है.
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