पटना : एफआइआर कर भूल जा रहे, इसलिए लाइलाज हो गयी अतिक्रमण की बीमारी

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 02 Aug 2019 9:00 AM

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साल भर में 136 एफआइआर, लेकिन कार्रवाई शून्य पटना : हाइकोर्ट के तमाम निर्देशों के बावजूद अगर शहर में अतिक्रमण लाइलाज बीमारी बन गयी है, तो इसकी मूल वजह स्थानीय स्तर पर प्रशासन की अनदेखी व सुस्ती है. हाइकोर्ट की तल्ख टिप्पणियों के बाद कार्रवाई शुरू तो होती है, लेकिन अंजाम तक नहीं पहुंच पाती. […]

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साल भर में 136 एफआइआर, लेकिन कार्रवाई शून्य
पटना : हाइकोर्ट के तमाम निर्देशों के बावजूद अगर शहर में अतिक्रमण लाइलाज बीमारी बन गयी है, तो इसकी मूल वजह स्थानीय स्तर पर प्रशासन की अनदेखी व सुस्ती है.
हाइकोर्ट की तल्ख टिप्पणियों के बाद कार्रवाई शुरू तो होती है, लेकिन अंजाम तक नहीं पहुंच पाती. जिला प्रशासन के आंकड़ों को ही मानें तो पिछले एक साल में शहर में चलाये गये अभियान के दौरान अतिक्रमण के मामलों में 136 प्राथमिकियां दर्ज की गयी. लेकिन, इनमें कितने मामलों में कार्रवाई हुई, यह किसी भी पता नहीं. ऐसे मामलों में अभियान खत्म होते ही पुलिस अफसर से लेकर नगर निगम के पदाधिकारी तक चुप्पी साध लेते हैं.
लगातार चलाये जाने वाले अभियानों के बावजूद निगम या जिला प्रशासन दावा नहीं कर सकता कि उसके किसी सड़क, फुटपाथ या पार्किंग पर अतिक्रमण नहीं है. शहर तो दूर पटना के प्रवेश द्वार पर अतिक्रमण व पार्किंग का नजारा देख कर बाहर से आने वाले लोग नाक-भौं सिंकोड़ लेते हैं. स्टेशन गोलंबर पर वाहन लेकर चलता तो दूर, पैदल चलना भी दूभर है.
अस्त-व्यस्त पार्किंग से पटा शहर
पूरा शहर अस्त-व्यस्त पार्किंग से पटा हुआ है. प्रशासन का दावा है कि अवैध पार्किंग को लेकर कार्रवाई करते हुए पिछले एक साल में करीब 85 लाख से अधिक जुर्माने की राशि वसूल की गयी. बावजूद, स्टेशन रोड, बोरिंग रोड, फ्रेजर रोड, एक्जीविशन रोड सहित तमाम प्रमुख सड़कों पर पार्किंग में अतिक्रमण लगा है और आम लोगों को सड़क किनारे गाड़ियां खड़ी करनी पड़ती है.
अतिक्रमण हटाओ अभियान दल के पास क्रेन तक उपलब्ध नहीं होती. हालांकि प्रमंडलीय आयुक्त ने इस बार कहा है कि अभी तक अतिक्रमण हटाओ अभियान के अंतर्गत दर्ज हुई तमाम प्राथमिकियों की समीक्षा की जायेगी. फिलहाल हर हफ्ते बुधवार और शनिवार को अतिक्रमण हटाओ अभियान की समीक्षा की जानी है.
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