मसौढ़ी : ज्वाइन करना था 14 को, डाकिया ने नियुक्तिपत्र दिया 21 जून को
Updated at : 23 Jun 2019 8:56 AM (IST)
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मसौढ़ी : एसएससी, कार्यालय, दिल्ली से 29 मई को स्पीड पोस्ट से भेजा गया नियुक्तिपत्र उपडाकघर,नदौल एक जून को पहुंच गया, लेकिन डाकिये ने थाना के जमालपुरबिगहा ग्रामवासी सोनू कुमार को उक्त पत्र 21 जून को दिया, जबकि उसे 14 जून को एसएससी कार्यालय, दिल्ली में योगदान करना था. इस कारण योगदान करने से फिलहाल […]
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मसौढ़ी : एसएससी, कार्यालय, दिल्ली से 29 मई को स्पीड पोस्ट से भेजा गया नियुक्तिपत्र उपडाकघर,नदौल एक जून को पहुंच गया, लेकिन डाकिये ने थाना के जमालपुरबिगहा ग्रामवासी सोनू कुमार को उक्त पत्र 21 जून को दिया, जबकि उसे 14 जून को एसएससी कार्यालय, दिल्ली में योगदान करना था.
इस कारण योगदान करने से फिलहाल वंचित रह गये सोनू कुमार के परिजनों व ग्रामीणों ने शनिवार को उपडाकघर पहुंच हंगामा किया. बताया जाता है कि इस दौरान डाकिया 20 दिनों तक उक्त नियुक्तिपत्र को अपने पास रखे रहा. थाना के जमालपुरबिगहा ग्रामवासी राजनंदन पासवान के पुत्र सोनू कुमार का कर्मचारी चयन आयोग, इलाहाबाद के द्वारा स्टोनोग्राफर के रूप में चयन किया गया है.
इसके लिए एसएससी, कार्यालय, दिल्ली ने उसे स्पीड पोस्ट से बीते 29 मई को नियुक्तिपत्र भेजा था और उसे मेडिकल जांच रिपोर्ट के साथ 14 जून को एसएससी, दिल्ली कार्यालय में योगदान करना था. इधर, उक्त नियुक्तिपत्र नदौल उपडाकघर में एक जून को पहुंच गया और उपडाकपाल विभू प्रसाद ने उसी दिन डाकिया बालमुकुंद कुमार को नियुक्तिपत्र रिसीव भी करा दिया ताकि वह उक्त पत्र समय पर सोनू कुमार के घर पहुंचा दे.
लेकिन डाकिया उक्त नियुक्तिपत्र को 20 दिनों तक अपने पास रखे रहा और 21 जून को सोनू के घर पर जाकर उसे रिसीव कराया, पर तब तक योगदान देने की तिथि पार कर चुकी थी. इसे लेकर शनिवार को सोनू के परिजनों के अलावा पूर्व सरपंच मनोज कुमार व अन्य ग्रामीण उपडाकघर पहुंचे और हंगामा करने लगे. बाद में उपडाकपाल ने देर से नियुक्तिपत्र सोनू को रिसीव होने संबंधी एक कागजात लिखकर सौंपा, जिसमें डाकिया को इसके लिए दोषी करार दिया है .पत्र मिलने के बाद सोनू के समर्थन मे पहुंचे ग्रामीण इसके बाद ही शांत हुए.
अधूरा पता होने का बहाना बना रहा था डाकिया
डाकिया बालमुकुंद कुमार के मुताबिक नियुक्तिपत्र संबंधी स्पीड पोस्ट पर अधूरा पता लिखा था जिस कारण उसे नियुक्ति पत्र पहुंचाने में इतना विलंब हो गया. अगर डाकिये की बात को सही भी मान लिया जाए तो अधूरे पते के कारण उसे नियमत: उक्त नियुक्ति पत्र उपडापाल को लौटा देना था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया.
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