पटना : इपीएफओ के 20% अंशधारकों का खाता यूएएन से नहीं जुड़ा
Updated at : 10 Apr 2019 6:49 AM (IST)
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पटना : कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (इपीएफओ) के लगभग 20 फीसदी अंशधारक ऐसे हैं, जिनका केवाइसी उनके यूनिवर्सल अकाउंट (यूएएन) से नहीं जुड़ा है. इसके कारण बहुत से अंशधारक इपीएफओ के ऑनलाइन सर्विस का लाभ नहीं ले पा रहे हैं. हालांकि इपीएफओ कार्यालय के अधिकारी अंशधारकों का यूएएन से बैंक खाता को जोड़ने का लगातार […]
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पटना : कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (इपीएफओ) के लगभग 20 फीसदी अंशधारक ऐसे हैं, जिनका केवाइसी उनके यूनिवर्सल अकाउंट (यूएएन) से नहीं जुड़ा है.
इसके कारण बहुत से अंशधारक इपीएफओ के ऑनलाइन सर्विस का लाभ नहीं ले पा रहे हैं. हालांकि इपीएफओ कार्यालय के अधिकारी अंशधारकों का यूएएन से बैंक खाता को जोड़ने का लगातार प्रयास कर रहे है. इसके बावजूद लगभग 20 फीसदी अंशधारकों का खाता यूएएन से नहीं जुड़ पाया है.
केवाइसी की सूचनाओं को यूएएन से जोड़ना अनिवार्य : इपीएफओ के अधिकारियों की मानें तो जिन अंशधारकों का केवाइसी उनके यूएएन से नहीं जुड़ पाया है.
अब जीवित नहीं हैं या किसी दूसरे शहर में चले गये हैं, इपीएफओ ऐसे अंशधारकों को खोजने का प्रयास कर रहा है. सरकार ने हाल में ही इपीएफओ के दायरे में आने वाली कंपनियां और संस्थानों से पीएफ अंशधारकों को यूएएन और केवाइसी के मिलान को सौ फीसदी पूरा करने का निर्देश दिया है. इसमें कहा गया है कि केवाइसी की सूचनाओं को यूएएन से जोड़ना अनिवार्य है और ऐसा न करना कानून के खिलाफ है.
2014 से सुविधा
अधिकारियों ने बताया कि 2014 में इपीएफओ ने इपीएफओ से जुड़ी सेवाओं में पारदर्शिता और सुविधा उपलब्ध कराने के मकसद से अंशधारकों के लिए 12 अंकों वाला यूएएन जारी करना शुरू किया था. केवाइसी में आधार नंबर, बैंक खाता नंबर, पैन नंबर और अंशधारक का मोबाइल नंबर शामिल होते हैं.
केवाइसी कागजात की प्रक्रिया पूरी हुई रहती है तो उन्हें कभी भी पैसे ट्रांसफर या निकासी में किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है. पीएफ खाते में बैंक खाते की जानकारी अपडेट नहीं होती है. क्लेम रिक्वेस्ट रिजेक्ट भी हो सकती है. साथ ही इपीएफओ सदस्य को एसएमएस अलर्ट भी नहीं मिलता है.
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