पटना : सदस्य घर पर, फाइलों में ही चल रही मेट्रोपोलिटन कमेटी
Updated at : 03 Jan 2019 9:46 AM (IST)
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गठन से अब तक महज एक बैठक ही हुई पटना : राजधानी पटना के मास्टर प्लान 2031 के तहत 1167 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल का विकास किया जाना है. मास्टर प्लान की अवधि घटती जा रही है और प्लान को लागू करनेवाली मेट्रोपोलिटन कमेटी की निष्क्रियता बढ़ती जा रही है. 2001 से मास्टर प्लान तैयार करने […]
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गठन से अब तक महज एक बैठक ही हुई
पटना : राजधानी पटना के मास्टर प्लान 2031 के तहत 1167 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल का विकास किया जाना है. मास्टर प्लान की अवधि घटती जा रही है और प्लान को लागू करनेवाली मेट्रोपोलिटन कमेटी की निष्क्रियता बढ़ती जा रही है. 2001 से मास्टर प्लान तैयार करने की कवायद चल रही है. 28 वर्षों के बाद 2014 में दूसरे मास्टर प्लान 2031 की अधिसूचना जारी हुई. यह आकलन किया गया है कि मास्टर प्लान के 1167 वर्ग किलोमीटर में 2031 तक निवास करनेवाली सवा करोड़ की आबादी को नियोजित और चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जायेगा.
यह काम मेट्रोपोलिटन कमेटी के जिम्मे हैं. कमेटी का गठन अक्तूबर, 2016 में किया गया. कमेटी के पास न तो अभी तक अपना कार्यालय है और न ही इसकी दूसरी बैठक हुई है. कमेटी के सदस्य अपने घर में हैं और कमेटी फाइलों में चल रही है. कमेटी के निर्वाचित उपाध्यक्ष सतीश कुमार सरकार से पत्र भेज कर अपने ही कार्यालय का पता और दायित्वों की जानकारी मांग रहे हैं. यह जानकारी अभी तक उनको नहीं मिली है.
अभी तक कार्यालय नहीं मिला है
पटना मेट्रोपोलिटन कमेटी के अध्यक्ष नगर विकास व आवास विभाग के मंत्री होते है. इस कमेटी के उपाध्यक्ष नगरपालिका क्षेत्र व पंचायतों से निर्वाचित 30 सदस्यीय कमेटी की ओर से की जाती है. कमेटी के उपाध्यक्ष सतीश कुमार ने बताया कि कार्यालय व मास्टर प्लान क्षेत्र के विकास को लेकर वह विभाग में मंत्री सह अध्यक्ष व प्रधान सचिव से मिल चुके हैं.
अभी तक कार्यालय नहीं मिला है. निर्वाचित सदस्यों की भागीदारी ही विकास में नहीं हैं, जो भी थोड़ा काम हो रहा है वह पदाधिकारियों की ओर से किया जा रहा है. इसकी सूचना सदस्यों को नहीं दी जा रही है. मास्टर प्लान की अवधि में 12 वर्ष शेष हैं, जबकि कमेटी को महानगर क्षेत्र की 20 से 25 वर्षों की योजना व प्राथमिकता तय करनी है.
आज होगी समीक्षा
नगर विकास मंत्री सुरेश कुमार शर्मा ने कहा कि गुरुवार को मेट्रोपोलिटन कमेटी और मास्टर प्लान की समीक्षा करेंगे. अविलंब इसको लागू नहीं किया गया, तो मास्टर प्लान के तहत निर्धारित 1167 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में भी लोग कानून का उल्लंघन कर मनमाने तरीके से निर्माण करने लगेंगे. मास्टर प्लान क्षेत्र को नियोजित तरीके से विकसित किया जाना है. यह गंभीर समस्या बने, इसके पहले इसको फंक्शनल बना लिया जाना है.
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