आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में शोध को बढ़ावा देने की जरूरत : राज्यपाल

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 24 Nov 2018 6:52 PM

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पटना : राज्यपाल लालजी टंडन ने आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में शोध कार्य को बढ़ावा देने की जरूरत पर बल दिया है. वर्तमान समय में उपलब्ध चिकित्सा-पद्धतियों में आज भी आयुर्वेद अद्वितीय एवं उत्कृष्ट है. आयुर्वेद की स्वीकार्यता भारत के अतिरिक्त विदेशों में भी बढ़ती जा रही है. राज्यपाल शनिवार को श्यामजी मंदिर परिसर (बाजार समिति) […]

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पटना : राज्यपाल लालजी टंडन ने आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में शोध कार्य को बढ़ावा देने की जरूरत पर बल दिया है. वर्तमान समय में उपलब्ध चिकित्सा-पद्धतियों में आज भी आयुर्वेद अद्वितीय एवं उत्कृष्ट है. आयुर्वेद की स्वीकार्यता भारत के अतिरिक्त विदेशों में भी बढ़ती जा रही है. राज्यपाल शनिवार को श्यामजी मंदिर परिसर (बाजार समिति) स्थित सभागार में ‘विश्व आयुर्वेद परिषद् की, बिहार इकाई द्वारा चर्म-रोग पर आधारित दो-दिवसीय सेमिनार का उद्घाटन कर रहे थे.

राज्यपाल ने कहा कि जरूरी है कि आयुर्वेद की धरती भारत में एक बार पुन: आयुर्वेद का पुनरोदय हो. उन्होंने कहा कि यह प्रथम बार संभव हुआ है कि भारत में अलग से आयुष मंत्रालय की स्थापना की गयी है एवं आयुष मंत्री बनाये गये हैं. दिल्ली में आयुर्वेद का अखिल भारतीय संस्थान प्रारंभ किया गया है. प्रधानमंत्री की पहल पर ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ की भी घोषणा हुई है. राज्यपाल ने कहा कि आज संपूर्ण विश्व में दोषपूर्ण जीवन–शैली के कारण मनुष्य विविध प्रकार के रोगों से ग्रस्त होता जा रहा है. जैसे–जैसे हम प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं, विकृतियां हमारे निकट आती जा रही हैं. इसलिए आवश्यक है कि हम आयुर्वेद द्वारा बतायी गयी जीवन-शैली का पालन करें. उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के विकास को नयी पीढ़ी को एक चुनौती के रूप में लेते हुए हर संभव प्रयास करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के सुश्रुत को सर्जरी का जनक होने का गौरव प्राप्त है.

राज्यपाल ने कहा कि जब हम गांधीजी का 150वां जयंती वर्ष मना रहे हैं, तब यह जरूरी है कि हम उनके द्वारा बताये गये प्राकृतिक चिकित्सा और स्वदेशी भावना के मार्ग पर चलने का संकल्प लें. उन्होंने कहा कि आयुर्वेद भारतीय संस्कृति का मेरूदंड है. आयुर्वेदिक रसायन एवं भस्मादि दवा महंगी हैं, लेकिन प्राकृतिक जड़ी-बूटियों की काढ़ा आदि औषधियां आम गरीबों की भी सहज पहुंच में हैं, जिनके उपयोग से गंभीर असाध्य बीमारियों से भी मुक्ति मिल जाती है.

राज्यपाल ने कहा कि आयुर्वेद में नाड़ी देख कर रोगों के जड़–मूल को पहचानने वाले वैद्य रहे हैं इनकी संख्या आज भले कम है, मगर गंभीर अध्ययन एवं शोध के जरिये आयुर्वेद को आधुनिक परिस्थितियों के अनुरूप विकसित किया जा सकता है. स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि राज्य में आयुर्वेदिक कॉलेजों के विकास के लिए हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं. कार्यक्रम में राज्यपाल ने ‘स्मारिका’ भी लोकार्पित की और स्व. वैद्य रमाकांत पाठक की स्मृति में आयोजित ‘निबंध–प्रतियोगिता’ के सफल प्रतिभागियों को पुरस्कृत भी कियागया़ कार्यक्रम का संचालन आयुर्वेद चिकित्सक शिवजतन ठाकुर ने किया.

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