शुभेंदु कैबिनेट में लुटियंस का बौद्धिक चेहरा स्वपन दासगुप्ता, पद्म भूषण पत्रकार की ऑक्सफोर्ड से लोक भवन तक की कहानी

Swapan Dasgupta Minister West Bengal
Swapan Dasgupta Minister West Bengal: वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व राज्यसभा सांसद स्वपन दासगुप्ता पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार के कैबिनेट मंत्री बन गये हैं. 2015 में पद्म भूषण से सम्मानित और ऑक्सफोर्ड के छात्र रहे दासगुप्ता के राजनीतिक सफर और शुभेंदु कैबिनेट में उनकी भूमिका की पूरी डिटेल यहां पढ़ें.
खास बातें
Swapan Dasgupta Minister West Bengal: पश्चिम बंगाल की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में सोमवार को एक ऐसा नाम सामने आया, जिसने न केवल बंगाल बल्कि देश की बौद्धिक और राजनीतिक बिरादरी को चौंका दिया है. देश के जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार, स्तंभकार और पूर्व राज्यसभा सांसद स्वपन दासगुप्ता ने कोलकाता के लोक भवन में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली.
मिल सकता है महत्वपूर्ण मंत्रालय
अंग्रेजी पत्रकारिता के शिखर से निकलकर राजनीति की मुख्यधारा और अब सीधे सरकार के नीति-निर्माता की कुर्सी तक पहुंचने का उनका यह सफर बेहद दिलचस्प और ऐतिहासिक है. उन्हें शुभेंदु अधिकारी सरकार में कोई बड़ा और नीतिगत रूप से महत्वपूर्ण मंत्रालय सौंपे जाने की उम्मीद है.
ऑक्सफोर्ड से पढ़ाई और पद्म भूषण तक का सफर
स्वपन दासगुप्ता की पकड़ जितनी मजबूत लुटियंस दिल्ली की बौद्धिक राजनीति पर है, उतनी ही समझ बंगाल के सांस्कृतिक इतिहास पर भी है. 3 अक्टूबर 1955 को कोलकाता में जन्मे स्वपन दासगुप्ता की शुरुआती पढ़ाई सेंट स्टीफेंस कॉलेज (दिल्ली यूनिवर्सिटी) से हुई. इसके बाद उन्होंने लंदन के प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से एमए और पीएचडी की डिग्रियां हासिल कीं. वे ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और वॉरविक यूनिवर्सिटी में अपनी सेवाएं भी दे चुके हैं.
इसे भी पढ़ें : दूसरों के घरों में बर्तन धोने वाली कलिता माझी बनीं शुभेंदु कैबिनेट में मंत्री, ऐसा है झोपड़ी से लोक भवन तक का सफर
पत्रकारिता के क्षेत्र में बड़ा नाम
उन्होंने देश के लगभग सभी बड़े अंग्रेजी अखबारों और पत्रिकाओं (जैसे द स्टेट्समैन, द टाइम्स ऑफ इंडिया, द इंडियन एक्सप्रेस और इंडिया टुडे) में कद्दावर संपादकीय पदों पर काम किया. वे देश के सबसे महंगे और पढ़े जाने वाले राजनीतिक विश्लेषकों में से एक रहे हैं.
2015 में भारत सरकार ने दिया पद्म भूषण सम्मान
कला, साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके अप्रतिम योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2015 में उन्हें देश के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म भूषण से नवाजा था.
बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
तारकेश्वर की हार और 2026 की शानदार वापसी
स्वपन दासगुप्ता का चुनावी राजनीति का सफर हमेशा कांटों भरा रहा. हालांकि, उन्होंने कभी हार नहीं मानी. वर्ष 2016 में भाजपा ने उन्हें राज्यसभा सांसद मनोनीत किया था. वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने ममता बनर्जी की टीएमसी को पटखनी देने के लिए उन्हें हुगली जिले की हाई-प्रोफाइल तारकेश्वर सीट से मैदान में उतारा. चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. टीएमसी की लहर के कारण वे विधानसभा चुनाव हार गये.
Swapan Dasgupta Minister West Bengal: 2026 में बदला समीकरण
हार के बावजूद दासगुप्ता बंगाल भाजपा के थिंक टैंक बने रहे. उन्होंने बंगाल के भद्रलोक (बौद्धिक वर्ग) को भाजपा से जोड़ने में सबसे बड़ी भूमिका निभायी. इस साल हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उनके रणनीतिक कौशल और प्रशासनिक क्षमता को देखते हुए उन्हें न केवल चुनाव लड़वाया, बल्कि शानदार जीत के बाद अब सीधे कैबिनेट में शामिल कर लिया है.
इसे भी पढ़ें : शुभेंदु कैबिनेट का विस्तार, 35 नये मंत्रियों को राज्यपाल ने दिलायी शपथ
क्यों शुभेंदु सरकार के लिए जरूरी हैं स्वपन दासगुप्ता?
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि शुभेंदु अधिकारी की कैबिनेट में स्वपन दासगुप्ता को शामिल करना भाजपा का एक बहुत बड़ा रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक है.
- भद्रलोक समाज में पैठ : भाजपा पर अक्सर बंगाल में बाहरी या कम बौद्धिक होने के आरोप लगते रहे हैं. स्वपन दासगुप्ता जैसे अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त विद्वान के मंत्री बनने से भाजपा को बंगाल के डॉक्टरों, प्रोफेसरों, वकीलों और लेखकों के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने में मदद मिलेगी.
- दिल्ली से सीधा कनेक्शन : दासगुप्ता के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली के शीर्ष नीति-निर्माताओं के साथ बेहद करीबी और दोस्ताना संबंध हैं. इसका सीधा फायदा पश्चिम बंगाल को केंद्रीय योजनाओं और फंड की मंजूरी दिलाने में मिलेगा.
- शिक्षा और संस्कृति को नया रंग : कयास लगाये जा रहे हैं कि बंगाल में चरमरायी शिक्षा व्यवस्था या फिर सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने के लिए उन्हें शिक्षा, उच्च शिक्षा या संस्कृति मंत्रालय जैसा अहम जिम्मा दिया जा सकता है, ताकि वे पारदर्शी तरीके से सुधार कर सकें.
इसे भी पढ़ें
बंगाल का अगला बॉस कौन? शुभेंदु अधिकारी को शमिक, सुकांत और स्वपन दासगुप्ता दे रहे टक्कर
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By मिथिलेश झा
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










