पटना : सचिवालयकर्मी ”करो या मरो” की राह पर
Author Prabhat khabar digital desk
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चार हजार कर्मचारी-अधिकारी जा सकते हैं हड़ताल पर पुनर्गठन के बाद भी प्रोन्नति का पद 17.61 से बढ़कर मात्र 25 फीसदी ही हुआ पटना : राज्य सचिवालय में कार्यरत करीब चार हजार कर्मचारी-अधिकारी कभी भी हड़ताल पर जा सकते हैं. बिहार सचिवालय सेवा और बिहार सचिवालय लिपकीय सेवा के अधिकारी-कर्मचारी आंदोलन की तैयारी कर रहे […]
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चार हजार कर्मचारी-अधिकारी जा सकते हैं हड़ताल पर
पुनर्गठन के बाद भी प्रोन्नति का पद 17.61 से बढ़कर मात्र 25 फीसदी ही हुआ
पटना : राज्य सचिवालय में कार्यरत करीब चार हजार कर्मचारी-अधिकारी कभी भी हड़ताल पर जा सकते हैं. बिहार सचिवालय सेवा और बिहार सचिवालय लिपकीय सेवा के अधिकारी-कर्मचारी आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं. विभिन्न ग्रेड के पदों का पुनर्गठन अब तक नहीं हाेने से नाराज बिहार सचिवालय सेवा संघ ने सरकार को अपनी मांगों के साथ ही करो या मरो नीति के तहत कभी भी हड़ताल पर जाने की सूचना दे दी है. राज्य सरकार ने 31 दिसंबर 2008 को केंद्रीय सचिवालय की तर्ज पर राज्य में भी सचिवालय सेवा का पुनर्गठन को लेकर विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था.
इस समिति की अनुशंसा के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने 25 अगस्त 2010 को बिहार सचिवालय सेवा का पुनर्गठन कर दिया गया. बिहार सचिवालय सेवा संघ के महासचिव अमरेंद्र नाथ सिंह पुनर्गठन के बाद भी इस सेवा में प्रोन्नति के पद 17.61 से बढ़कर मात्र 25 फीसदी ही हुआ है. अंतिम पुनर्गठन अब तक लंबित है. अभी सहायक को पहला प्रमोशन पाने में 28 साल लग रहे हैं.
इन पदों का नाम किया जाना है परिवर्तित
वर्तमान पदनाम सेवा संशोधित पदनाम
सहायक बिहार सचिवालय सेवा सहायक प्रशाखा पदाधिकारी
उच्चवर्गीय लिपिक बिहार सचिवालय लिपिकीय सेवा वरीय सचिवालय सहायक
निम्नवर्गीय लिपिक बिहार सचिवालय लिपिकीय सेवा कनीय सचिवालय सहायक
पदों की प्रस्तावित संख्या
सहायक 2096
प्रशाखा पदाधिकारी 1282
अवर सचिव 598
उप सचिव 141
संयुक्त सचिव 47
कुल 4164
मांग को लेकर मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, विकास आयुक्त, प्रधान सचिव को अवगत करा दिया है. कर्मियों के आक्रोश को अब और रोक पाना संभव नहीं है. बैठक कर आंदोलन का निर्णय लिया जायेगा.
अमरेंद्र नाथ सिंह , महासचिव, बिहार सचिवालय सेवा संघ
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