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नमो सरकार ने संशोधन कर ''एससी-एसटी'' कानून को बनाया और ज्यादा कठोर : सुशील मोदी

Updated at : 05 Apr 2018 6:03 PM (IST)
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नमो सरकार ने संशोधन कर ''एससी-एसटी'' कानून को बनाया और ज्यादा कठोर : सुशील मोदी

पटना : ‘कबीर के लोग’ की ओर से बाबू जगजीवन राम जयंती के मौके पर ‘टिकाऊ विकास के लक्ष्य’ पर आयोजित विमर्श केे उद्धाटन सत्र को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा, देश की कुल आबादी के 25 प्रतिशत हिस्से एससी, एसटी के विकास के बिना देश का विकास संभव नहीं है. […]

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पटना : ‘कबीर के लोग’ की ओर से बाबू जगजीवन राम जयंती के मौके पर ‘टिकाऊ विकास के लक्ष्य’ पर आयोजित विमर्श केे उद्धाटन सत्र को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा, देश की कुल आबादी के 25 प्रतिशत हिस्से एससी, एसटी के विकास के बिना देश का विकास संभव नहीं है. एससी/एसटी के संविधान प्रदत्त आरक्षण को कोई छीन नहीं सकता है. दुरुपयोग के आधार पर एससी, एसटी अत्याचार निवारण एक्ट को कमजोर नहीं किया जा सकता है.

सुशील मोदी ने कहा कि 1979 में बने अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण कानून में 01 जनवरी, 2016 को संशोधन कर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने पहले की तुलना में इसे ज्यादा मजबूत, प्रभावी और कठोर बनाया है. किसी एससी, एसटी का बाल/मूंछ मुड़वा कर घुमाने, मृत जानवर या मानव शव ढुलवाने, मानव मल उठवाने, इस वर्ग की महिला को देवदासी बनाने, महिला के कपड़े उतरवाने व चुनाव में नामांकन करने से रोकने को आईपीसी की अनेक धाराओं को जोड़ते हुए अपराध की श्रेणी में लाया गया है. एससी, एसटी से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट और अलग से पीपी को तैनात कर चार्जशीट दाखिल होने के दो महीने के अंदर मुकदमे के निस्तारण का प्रावधान भी किया गया है.

भाजपा एससी/एसटी के आरक्षण में जहां क्रीमी लेयर का विरोधी है. वहीं, प्रोमोशन में आरक्षण का पक्षधर है. प्रोन्नति में आरक्षण के मामले को सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से रखा गया है. केंद्र सरकार एससी/एसटी एक्ट को पूर्ववत प्रभावी बनाये रखने, प्रोन्नति में आरक्षण व यूजीसी के अंतर्गत प्राध्यापकों की नियुक्ति के मामले में लंबी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है.

सुशील मोदी ने कहा कि पंजाब में 32 प्रतिशत, हिमाचल प्रदेश में 25, पश्चिम बंगाल में 24 और यूपी में 21 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जाति की है. यह समाज पिछड़ेपन के लिए खुद दोषी नहीं है. सदियों से इन्हें शिक्षा, संपति और सत्ता के अधिकार से वंचित रखा गया. इन्हें आगे किये बिना टिकाऊ विकास के लक्ष्य को हासिल करना संभव नहीं होगा.

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