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बिहार : आईएएस अधिकारी सीके अनिल भगोड़ा घोषित

Updated at : 21 Nov 2017 6:00 AM (IST)
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बिहार : आईएएस अधिकारी सीके अनिल भगोड़ा घोषित

पटना : बिहार कर्मचारी चयन आयोग के प्रश्नपत्र लीक मामले के मुख्य आरोपित आईएएस अधिकारी सीके अनिल को एक दूसरे मामले में भगोड़ा घोषित कर दिया गया है. इस मामले में पटना हाईकोर्ट की तरफ से एक नोटिस जारी किया गया है. उन्हें नोटिस प्रकाशित होने की तारीख से एक महीने के अंदर हाजिर होने […]

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पटना : बिहार कर्मचारी चयन आयोग के प्रश्नपत्र लीक मामले के मुख्य आरोपित आईएएस अधिकारी सीके अनिल को एक दूसरे मामले में भगोड़ा घोषित कर दिया गया है. इस मामले में पटना हाईकोर्ट की तरफ से एक नोटिस जारी किया गया है.
उन्हें नोटिस प्रकाशित होने की तारीख से एक महीने के अंदर हाजिर होने का आदेश दिया गया है. इस नोटिस को बकायदा विज्ञापन के रूप में प्रकाशित कराया गया है, ताकि उन तक या उनके परिजनों तक इस बात की सूचना मिल सके. यह नोटिस उनके खगड़िया स्थित पैतृक आवासीय पता पर जारी किया गया है. इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि एक महीने के अंदर वह स्वयं या अपने किसी अधिवक्ता के माध्यम से इस केस में हाजिर हो जाएं. यदि वह इस नोटिस के बाद भी हाजिर नहीं होते हैं तो इस मामले में एकतरफा सुनवाई कर निर्णय दे दिया जायेगा. इसके लिए 14 नवंबर, 2017 से उन्हें एक महीने की मोहलत दी गयी है.
आईएएस अधिकारी सीके अनिल के खिलाफ जारी नोटिस में उनका पद सलाहकार, बिहार राज्य प्लानिंग बोर्ड दिखाया गया है. इसकी मुख्य वजह इनकी मुख्य रूप से पदस्थापना इसी पद पर होना है.
गौरतलब है कि करीब सात-आठ साल पहले तत्कालीन गृह विभाग के प्रधान सचिव अफजल अमानुल्लाह के खिलाफ फाइल में सरकारी गाड़ी का दुरुपयोग करने समेत अन्य सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का आरोप लगाया था. इसके बाद अफजल अमानुल्लाह ने इस मामले में उन पर मानहानि का मुकदमा दर्ज कर दिया और मामला न्यायालय में चला गया. तब से कई बार उनके कोर्ट में उपस्थित होने का समन जारी किया जा चुका है.
लेकिन हर बार कोई जवाब नहीं देने के कारण इस बार हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार किया है. उनके खिलाफ निंदन प्रस्ताव भी पारित हो चुका है. फिर भी वह अब तक इस मामले में अपना पक्ष रखने के लिए हाजिर नहीं हुए हैं.
इसके अलावा बीएसएससी में ओएसडी के पद पर अतिरिक्त प्रभार रहने के दौरान प्रश्नपत्र लीक मामले में उनकी भूमिका बेहद संदिग्ध मानी गयी थी. इस मामले में भी कोर्ट की तरफ से उन्हें समन जारी किया जा चुका है, लेकिन वह एक बार भी उपस्थित नहीं हुए हैं.
जबकि सामान्य प्रशासन विभाग की तरफ से भी उन्हें उपस्थित होने का आदेश कई बार जारी किया जा चुका है, लेकिन अब तक उनका अता-पता नहीं है. बीच में एक बार उन्होंने मेडिकल कारणों से अपनी छुट्टी बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन उस पर भी विभाग ने कोई सुनवाई नहीं की है. पेपर लीक मामले में उन पर आरोप है कि बीएसएससी के अध्यक्ष सुधीर कुमार के कमरे में घूसकर उन्होंने उनके निजी कंप्यूटर के साथ छेड़छाड़ किया और कई अहम तथ्यों को हटा दिया है.
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