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छठ की विदाई के बाद वोट की बारी, चुनाव ने रोकी परदेसियों की रफ्तार

Updated at : 08 Oct 2025 9:05 PM (IST)
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छठ की विदाई के बाद वोट की बारी, चुनाव ने रोकी परदेसियों की रफ्तार

After Chhath's farewell, it's time to vote

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त्योहारों के बाद होने वाली सामान्य भीड़ को चुनावी रंग में बदल दिया

ललितांशु, मुजफ्फरपुर

बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा ने इस बार छठ महापर्व के बाद होने वाली सामान्य वापसी की भीड़ को बदल दिया है. घोषणा ने अब सामान्य जनजीवन के साथ-साथ यात्रा योजनाओं पर भी अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है. छठ महापर्व के ठीक बाद 6 नवंबर को पहले चरण का मतदान होना है. इसी चुनावी तारीख के चलते, एक से पांच नवंबर के बीच मुजफ्फरपुर से दिल्ली, कोलकाता, पंजाब और अन्य बड़े शहरों की यात्रा करने की तैयारी कर रहे लोगों ने बड़े पैमाने पर अपनी योजनाओं में बदलाव किया है.

आम तौर पर त्योहारों के बाद काम पर लौटने वाले यात्रियों की भीड़ रहती है, लेकिन इस बार चुनावी माहौल भारी पड़ रहा है. जो लोग छठ के बाद तुरंत वापस जाने वाले थे, उन्होंने अब अपना कार्यक्रम 6 नवंबर को मतदान करने के बाद का बनाया है.

पांच नवंबर को टिकट कैंसिल, स्पेशल ट्रेनों में भारी सीटें खाली

इस बदलाव का सीधा असर 5 नवंबर की यात्रा पर दिख रहा है. ऑनलाइन और काउंटर से खरीदे गए टिकटों के कैंसिलेशन की प्रक्रिया शुरू हो गई है. यह चुनावी रुझान ट्रेनों की खाली सीटों में साफ झलक रहा है, खासकर दिल्ली जाने वाली त्योहार स्पेशल और नियमित स्पेशल ट्रेनों में 5 नवंबर को मुजफ्फरपुर से दिल्ली जाने वाली प्रमुख ट्रेनों में थर्ड एसी और थ्री-इकोनॉमी कोचों में सैकड़ों सीटें खाली दिखाई दे रही हैं, जो इस बात का संकेत है कि लोग अपना वोट डालने के लिए अपनी यात्रा टाल रहे है.

पांच नवंबर को मुजफ्फरपुर से ट्रेनों में खाली सीटों की स्थिति (एसी-3 व 3-इ)

ट्रेन संख्या ट्रेन का नाम खाली सीटों की संख्या (लगभग)

05283मुजफ्फरपुर-आनंद विहार स्पेशल 550 सीटें (थर्ड एसी व थ्री-इ मिलाकर)

04097मुजफ्फरपुर-नई दिल्ली स्पेशल 839 सीटें (पूरी ट्रेन ही खाली)

02569दरभंगा-नई दिल्ली स्पेशल 270 सीटें (थर्ड एसी व थ्री-इ मिलाकर)

02563बरौनी-नई दिल्ली स्पेशल 500 सीटें (थर्ड एसी व थ्री-इ मिलाकर)

मताधिकार के उपयोग को दे रहे प्राथमिकता

सामान्य दिनों में जहां इन तिथियों पर एक भी सीट मिलना मुश्किल होता है, वहीं अब सैकड़ों सीटों का खाली होना स्पष्ट रूप से यह दर्शाता है कि बिहार के मतदाता, खासकर बाहर काम करने वाले, अपने मताधिकार का उपयोग करने को प्राथमिकता दे रहे हैं. चुनाव की तिथियों ने त्योहारों के बाद होने वाली सामान्य भीड़ को चुनावी रंग में बदल दिया है, जिससे 5 नवंबर को मुजफ्फरपुर से दिल्ली जाने का ”ट्रैफिक” थम सा गया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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