मुंगेर मछली उत्पादन में बना रहा नया रिकॉर्ड, एक वर्ष में 0.76 मीट्रिक टन की बढ़ोतरी

Published by : BIRENDRA KUMAR SING Updated At : 16 May 2026 5:49 PM

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मुंगेर जिले में मछली उत्पादन के क्षेत्र में लगातार प्रगति दर्ज की जा रही है. हर साल उत्पादन में हो रही वृद्धि ने न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है

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मुंगेर. मुंगेर जिले में मछली उत्पादन के क्षेत्र में लगातार प्रगति दर्ज की जा रही है. हर साल उत्पादन में हो रही वृद्धि ने न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है, बल्कि जिले को क्षेत्रीय स्तर पर मत्स्य उत्पादन का महत्वपूर्ण केंद्र बना दिया है. तालाब से लेकर गंगा तक मछली उत्पादन हो रहा है. इससे जिले के 2500 से अधिक मछुआरा और कृषक मछली कारोबार से जुड़कर अपनी आय को बढ़ा रहे है.

हर साल मछली उत्पादन में हो रही बढ़ोतरी

जानकारी के अनुसार, जिले में मछली पालन के क्षेत्र में लगातार प्रगति पर है. वित्तीय वर्ष 2024-25 की बात करें तो 12.986 हजार मीट्रिक टन मछली का उत्पादन हुआ था. वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 13.7523 हजार मीट्रिक टन तक पहुंच गया है. यह वृद्धि मछली पालन के प्रति बढ़ती जागरूकता और सरकारी सहयोग का परिणाम मानी जा रही है. वहीं मुंगेर जिला मत्स्य विभाग (पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग) स्थानीय मछुआरों और मत्स्य पालकों को निःशुल्क प्रशिक्षण, और आर्थिक अनुदान (सब्सिडी) भी वृद्धि का एक बड़ा कारण माना जा रहा है.

जिले के 467 तालाब व गंगा से प्राप्त हो रही मछलियां

जिले में मछली उत्पादन के लिए सरकारी और निजी दोनों स्तरों पर व्यापक कार्य हो रहा है. जिले के कुल 467 तालाब, जलाशय में जहां मछली पालन हो रहा है. वहीं गंगा में बड़े पैमाने पर मछली का उत्पादन हो रहा है. वर्तमान में 190 सरकारी तालाब और 217 निजी तालाबों में मछली पालन किया जा रहा है. इन तालाबों में वैज्ञानिक पद्धति से मछली पालन होने के कारण उत्पादन में निरंतर बढ़ोतरी देखी जा रही है.

रेहु, कतला के साथ ही टेगरा व बुआरी मछली का हो रहा उत्पादन

मुंगेर में हर प्रजाति की मछलियों का उत्पादन किया जा रहा है. देशी प्रजातियों में प्रमुख रूप से रेहु, कतला और मीरका (नेनी) शामिल हैं. जो बाजार में काफी पसंद की जाती हैं. वहीं विदेशी प्रजातियों में सिल्वर कार्प, ग्रास कार्प और कॉमन कार्प का पालन भी बड़े पैमाने पर किया जा रहा है. इसके अलावा कैट फिश प्रजाति में टेंगरा और सीलन जैसी मछलियां भी उत्पादित की जा रही हैं, जिनकी मांग लगातार बढ़ रही है.

निःशुल्क प्रशिक्षण और आर्थिक अनुदान दे रहा बढ़ावा

सरकार द्वारा मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत सब्सिडी भी प्रदान की जा रही है. मछली पालकों को उन्नत मछली बीज (मछली का जीरा), पंप सेट और एरेटर (पानी में ऑक्सीजन बढ़ाने वाली मशीन) की खरीद पर 50 से 70 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है. इससे छोटे और मध्यम वर्ग के मछली पालकों को विशेष लाभ मिल रहा है और वे आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं. इतना ही नहीं मछली पालकों को निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है. साथ ही प्रशिक्षण के लिए दूसरे राज्य भी मछुआरा व किसानों को समय -समय पर भेजा जाता है.

कहते हैं अधिकारी

जिला मत्स्य पदाधिकारी मनीष रस्तोगी ने बताया कि जिले में मछली पालन को लेकर लोगों में जागरूकता आई है. जिसका परिणाम है कि हर साल मछली का उत्पादन बढ़ता जा रहा है. आकड़ों पर यदि गौर करें तो वित्तीय वर्ष 2024-25 की तुलना में 2025-26 में हजारों टन मछली उत्पादन में वृद्धि हुई है. मुंगेर से अब मछली दूसरे राज्य व जिलों में भी भेजा जा रहा है. स्थानीय मछुआरों और मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने निःशुल्क प्रशिक्षण, और आर्थिक अनुदान (सब्सिडी) दी जा रही है.

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