शिशु वार्ड में नहीं पहुंचे चिकित्सक
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 04 May 2016 4:47 AM
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सदर अस्पताल. चरमरायी ओपीडी व्यवस्था, अधिकारी नहीं ले रहे खबर मुंगेर : सदर अस्पताल में ओपीडी व्यवस्था अब पूरी तरह चरमरा गयी है. जिसकी खबर लेने के लिए शायद अस्पताल के अधिकारी को समय नहीं है. मंगलवार को शिशु विभाग के संध्याकालीन ओपीडी में चिकित्सक नहीं पहुंचे. जिसके कारण शिशु रोगियों के परिजन को खासे […]
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सदर अस्पताल. चरमरायी ओपीडी व्यवस्था, अधिकारी नहीं ले रहे खबर
मुंगेर : सदर अस्पताल में ओपीडी व्यवस्था अब पूरी तरह चरमरा गयी है. जिसकी खबर लेने के लिए शायद अस्पताल के अधिकारी को समय नहीं है. मंगलवार को शिशु विभाग के संध्याकालीन ओपीडी में चिकित्सक नहीं पहुंचे. जिसके कारण शिशु रोगियों के परिजन को खासे परेशानियों का सामना करना पड़ा. कई लोग जहां जीओपीडी में अपने बच्चों का इलाज कराने पहुंचे, वहीं कई लोग बिना इलाज कराये ही वापस घर लौट गये.
खाली रही चिकित्सक की कुरसी
मंगलवार को शिशु ओपीडी में डॉ दिलीप कुमार की ड्यूटी थी. वे प्रात:कालीन ओपीडी के दौरान तो उपस्थित थे. किंतु संध्याकालीन ओपीडी में नहीं पहुंचे. उनके आने के इंतजार में लोग अपने बच्चों को गोद में लिये काफी देर तक खड़े रहे. किंतु शाम 5 बजे तक जब चिकित्सक ओपीडी में नहीं पहुंचे तो उनमें से कई लोग अपने बच्चे का इलाज करवाने जीओपीडी पहुंचे.
कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षक
अस्पताल उपाधीक्षक डॉ राकेश कुमार सिन्हा ने बताया कि डॉ दिलीप को एसएनसीयू के प्रशिक्षण के लिए पटना जाना पड़ गया. जिसके कारण संध्या ओपीडी में शिशु विभाग खाली पड़ा रहा. हालांकि मरीजों के इलाज के लिए जीओपीडी में मौजूद चिकित्सकों को बोल दिया गया था.
मरीजों को भेजा जा रहा था जीओपीडी
शिशु वार्ड में चिकित्सक के नहीं पहुंचने पर वहां पर मौजूद चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी मरीजों को जीओपीडी में इलाज के लिए भेजने लगे. जबकि जीओपीडी में शिशु रोग विशेषज्ञ मौजूद नहीं थे. मरीजों के परिजनों का कहना था कि जब किसी एमबीबीएस चिकित्सक से ही बच्चे का इलाज कराना पड़ा, तो फिर नेत्र रोग विशेषज्ञ से ही क्यों नहीं इलाज करवाया गया. जबकि शिशु ओपीडी नेत्र विभाग में ही चलता है. अकारण ही उनलोगों को जीओपीडी भेज दिया गया. जिससे साफ पता चलता है कि अस्पताल प्रबंधन मरीजों को सिर्फ परेशान करना चाहती है.
परेशान रहे परिजन : लाल दरबाजा से आयी महिला कौशल्या देवी ने बताया कि उन्हें अपने बच्चे का इलाज करवाना था. वह शाम चार बजे से ही चिकित्सक के आने का इंतजार कर रही थी. वहीं हजरतगंज निवासी मीना देवी ने बताया यहां जानबूझ कर मरीजों को परेशान किया जाता है. ताकि मरीज तंग आकर निजी क्लिनिक का सहारा लेने लगे. उन्होंने बताया कि कभी तो यहां चिकित्सक काफी पहले ही ड्यूटी छोड़ कर चले जाते हैं, कभी काफी लेट से ड्यूटी पर पहुंचते हैं.
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