ए-ग्रेड नर्स के सहारे नशा मुक्ति केंद्र, विभाग उदासीन

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 14 Sep 2016 4:33 AM

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मधुबनी : सरकार ने शराब बंदी की घोषणा के बाद सूबे के सभी जिलों में ताम झाम के साथ नशा मुक्ति केंद्र खोली, पर , मधुबनी स्थित सदर अस्पताल में नशा मुक्ति केंद्र खुलने के तीन -चार माह बाद ही दम तोड़ती नजर आ रही है. दरअसल वर्तमान में नशा मुक्ति केंद्र पर तैनात चिकित्सक […]

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मधुबनी : सरकार ने शराब बंदी की घोषणा के बाद सूबे के सभी जिलों में ताम झाम के साथ नशा मुक्ति केंद्र खोली, पर , मधुबनी स्थित सदर अस्पताल में नशा मुक्ति केंद्र खुलने के तीन -चार माह बाद ही दम तोड़ती नजर आ रही है. दरअसल वर्तमान में नशा मुक्ति केंद्र पर तैनात चिकित्सक व कर्मी की प्रतिनियुक्ति 12 अगस्त को समाप्त कर दी गई. फिलहाल यह केंद्र ए ग्रेड नर्स व डाटा आपरेटर के जिम्मे है. शुरुआत में 17 पदाधिकारियों व कर्मियों की भारी भरकम टीम बनायी गयी . पांच चिकित्सकों समेत 12 कर्मियों की प्रतिनियुक्ति की गई थी. प्रतिनियुक्ति सभी कर्मी व चिकित्सक अपने अपने मूल पदस्थापित संस्थान में योगदान के लिए चले गये हैं .

ऐसे में अब मरीजों की काउंसेलिंग ए ग्रेड नर्स के जरिये की जा रही है. दवा भी दी जा रही है. नशा मुक्ति केंद्र पर वर्तमान में ए ग्रेड नर्स ब्रजेश ठाकुर व डाटा ऑपरेटर मोहन कुमार झा के द्वारा नशामुक्ति केंद्र का संचालन किया जा रहा है. वर्तमान में उक्त केंद्र में परामर्शी भी नहीं है. नशा मुक्ति केंद्र की स्थापना शराब बंदी के बाद नशा से निजात दिलाने के उद्देश्य से की गई थी. लगभग 20 लाख रुपये खर्च कर नशा मुक्ति वार्ड, कार्यालय कक्ष, परामर्श कक्ष समेत चिकित्सीय कक्ष का निर्माण किया गया.

113 मरीजों का पंजीकरण
नशा मुक्ति केंद्र पर अब तक 1 अप्रैल से 12 सितंबर तक 113 मरीजों का रजिस्ट्रेशन किया गया. पिछले एक माह से मरीजों का इलाज बिना चिकित्सक के ही हो रहा है. वैसे अब नशा मुक्ति केंद्र में मरीजों की संख्या पहले से कम हुई है. पर अब भी मरीज आ रहे हैं. चिकित्सक के नहीं रहने के कारण नशा मुक्ति केंद्र पर आने वाले मरीजों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. ए ग्रेड नर्स के सहारे अब इस नशा मुक्ति केंद्र का कार्य संपादन किया जा रहा है. आंकड़ों पर गौर करें तो पंजीकृत 113 मरीजों में 95 प्रतिशत मरीज अल्कोहल का सेवन करने वाले थे. जबकि 5 प्रतिशत मरीज भांग व गाजा का भारी मात्र से सेवन करते थे.
की जायेगी वैकल्पिक व्यवस्था
सिविल सर्जन डा. अमर नाथ झा बताते है कि प्रतिनियुक्ति समाप्त होने से चिकित्सक व कर्मियों की कमी हुई है. लेकिन इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जायेगी. केंद्र में आने वाले मरीजों को जो सुविधा मिलती थी वह दी जायेगी.
आये मरीजों का आंकड़ा
अप्रैल 40
मई 30
जून 22
जुलाई 10
अगस्त 07
सितंबर 04
नशा मुक्ति केंद्र में नहीं हैं चिकित्सक
प्रतिनियुक्त पांच चिकित्सक व 12 कर्मी गये अपने मूल पद स्थान पर
भरती मरीजों में 95 प्रतिशत अल्कोहल सेवन करने वाले
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