बाहर से आकर मधेपुरावासी को खिला रहे तिलकुट

Published at :08 Jan 2015 7:33 AM (IST)
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बाहर से आकर मधेपुरावासी को खिला रहे तिलकुट

मधेपुरा : मकर संक्राति बस अब छह दिन दूर रह गया है और मधेपुर शहर में तिलकुट का बाजार सज चुका है. भुने तिल और गुड़ की खुशबू से वातावरण सुगंधित है. रेवड़ी, गजक और विभिन्न तरह के तिलकुट की बिक्री उफान पर है. लोग अभी से ही इन तिलकुटों का आस्वादन कर रहे हैं. […]

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मधेपुरा : मकर संक्राति बस अब छह दिन दूर रह गया है और मधेपुर शहर में तिलकुट का बाजार सज चुका है. भुने तिल और गुड़ की खुशबू से वातावरण सुगंधित है. रेवड़ी, गजक और विभिन्न तरह के तिलकुट की बिक्री उफान पर है.
लोग अभी से ही इन तिलकुटों का आस्वादन कर रहे हैं. लेकिन इस स्वाद के पीछे उन कारीगरों का हाथ है जो गया तथा अन्य जगहों से यहां आ कर तिलकुट बना रहे हैं.
एक महीने के बाजार से एक साल की उम्मीद
गया जिले के निरहुआ गांव से कारीगरों का दल मधेपुरा पिछले आठ वर्ष से यहां आ कर अपने हाथों का जादू बिखेर रहा है. दल के कारीगर पंकज कहते हैं कि इस एक सेडेढ़ महीने के काम के लिए वे लोग पूर साल प्रतीक्षा करते हैं.
वहीं कारीगर केशव कुमार कहते हैं कि यह सिर्फ एक से डेढ़ महीने का बाजार नहीं, उनके एक साल की उम्मीद है. दल के ही सुनील कुमार कहते हैं कि मधेपुरा के लोगों ने उनके काम की कद्र की है. इसलिए हर साल वे यहां पहुंचते हैं. केशव को इस वर्ष की कमाई से घर की मरम्मत कराना है. वहीं पकंज इस बार अपने बिटिया का दाखिला अच्छे स्कूल में करायेंगे. सुनील इस बार खेती के लिए लिया गया कर्ज चुकायेंगे. इस एक माह के बाजार से सबकी अपनी जरूरत और उम्मीदें हैं.
हर वेरायटी होती है मौजूद
पहले लोग तिलकुट के लिए बाहर के बाजार पर निर्भर थे. कोई पटना तो कोई गया से तिलकुट मंगाया करते थे. लेकिन अब मधेपुरा में ही तिलकुट की हर वेराइटी मौजूद है.
गणपति तिलकुट भंडार के संचालक रमेश कुमार और प्रदीप कहते हैं कि जब नौ वर्ष पहले उन्होंने यह काम शुरू किया था तो गुणवत्ता पहली चुनौती थी. इसके लिए उन्होंने गया के कारीगर से संपर्क किया. राजकिशोर साह भी विगत छह वर्ष से गया के कारीगरों से ही तिलकुट दुकान चलाते हैं.
बढ़ रहा है तिलकुट बाजार
मधेपुरा में दिनों दिन तिलकुट का बाजार बढ़ता जा रहा है. पांच साल पहले जहां एक – दो दुकानें ही थी वहीं इस वर्ष एक दर्जन से अधिक दुकानें हैं. खगड़िया के प्रेमसागर इस वर्ष पहली बार मधेपुरा पहुंचे हैं. उन्होंने बताया कि उन्हें पता चला कि मधेपुरा में तिलकुट की काफी बिक्री होती है. प्रेमसागर सामान्य दिनों में खेती और पढ़ाई करते हैं. इस एक महीने की कमाई से खेती के लिए उन्नत यंत्र खरीदने की सोच रहे हैं.
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