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एनएच किनारे विद्यालय होने के बावजूद चाहरदीवारी का नहीं कराया गया निर्माण

Updated at : 17 Jul 2024 9:20 PM (IST)
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एनएच किनारे विद्यालय होने के बावजूद चाहरदीवारी का नहीं कराया गया निर्माण

प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत उत्क्रमित मध्य विद्यालय पिपरा में स्कूल चारदीवारी नहीं रहने से छात्रों को काफी परेशानी होती है

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हलसी. प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत उत्क्रमित मध्य विद्यालय पिपरा में स्कूल चारदीवारी नहीं रहने से छात्रों को काफी परेशानी होती है एवं सड़क किनारे विद्यालय रहने से स्कूल परिवार को खतरे की आशंका बनी रहती है. वहीं छुट्टी के बाद विद्यालय परिसर में आवारा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है. जिससे स्कूल परिसर को पशुओं के द्वारा गंदा कर दिया जाता है. जिससे छात्र एवं शिक्षकों परेशानी उठानी पड़ती है. विद्यालय प्रधानाध्यापक के द्वारा शिक्षा विभाग अधिकारियों को इसकी सूचना बार-बार दी जाती है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं देखने को मिली है. जिससे शिक्षक एवं अभिभावकों छात्रों में परेशानी बढ़ती जा रही है. जानकारी के अनुसार विद्यालय विद्यालय में लगभग 112 से अधिक छात्र नामांकित है. प्रतिदिन विद्यालय आने वाले छात्रों के बीच दुर्घटना घटने की संभावना बनी रहती है. बताया कि इस विद्यालय का स्थापना 1970 में प्राथमिक विद्यालय के रूप में हुई थी. वहीं 2010 में इसे अपग्रेड कर उत्क्रमित मध्य विद्यालय बना दिया गया है. यह विद्यालय सिकंदरा-शेखपुरा एनएच 333ए के किनारे स्थित है, फिर भी इसपर ध्यान देने वाला कोई नजर नहीं आ रहा है.

स्कूल में छुट्टी के बाद आवारा पशुओं का रहता है जमावड़ा

सिकंदरा-शेखपुरा मुख्य मार्ग के बगल में स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय पिपरा के स्थापित हुए 54 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन अभी तक चार दिवारी का विद्यालय परिवार नसीब नहीं हुआ है. जिसे लेकर कई बार विभाग को आवेदन दिया गया, लेकिन इस दिशा में सुनवाई नहीं हो रही. इस संबंध में प्रधानाध्यापिका माधुरी कुमारी ने बताया कि उनके विद्यालय में 112 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं एवं छह शिक्षक-शिक्षिका पदस्थापित है. उन्होंने कहा कि विद्यालय में बाउंड्री नहीं होने से बच्चों के प्रति शिक्षक को ज्यादा ध्यान देना पड़ता है. मुख्य सड़क पर विद्यालय होने के कारण हमेशा बड़ा हादसा होने का भय बना रहता है. अक्सर बच्चे खेलते खेलते सड़क पार चले जाते हैं. जिससे बड़ा हादसा होने का खतरा बना रहता है. उन्होंने कहा कि विद्यालय में बाउंड्री को लेकर कई बार विभाग को आवेदन भी दिया गया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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