आस्था केे आगे नतमस्तक हुए चोर

Published at :06 Dec 2015 6:51 PM (IST)
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आस्था केे आगे नतमस्तक हुए चोर

आस्था केे आगे नतमस्तक हुए चोर पूर्व में भी जिले के कई देव स्थलों से चोरी हो चुकी है बेशकीमती मूर्ति विभूति भूषण , जमुई जिले के खैरा थाना क्षेत्र के जन्मस्थान से विगत 27 नवंबर को चोरी हुई भगवान महावीर की प्रतिमा को आखिर पुलिस ने रविवार को सुबह में सिकंदरा थाना क्षेत्र के […]

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आस्था केे आगे नतमस्तक हुए चोर पूर्व में भी जिले के कई देव स्थलों से चोरी हो चुकी है बेशकीमती मूर्ति विभूति भूषण , जमुई जिले के खैरा थाना क्षेत्र के जन्मस्थान से विगत 27 नवंबर को चोरी हुई भगवान महावीर की प्रतिमा को आखिर पुलिस ने रविवार को सुबह में सिकंदरा थाना क्षेत्र के बिछवे गांव से बरामद कर लिया. पुलिस की सूत्रों की माने तो चोरों ने पुलिस दबिश और सीबीआइ जांच को परेशानी का सबब मान कर मूर्ति को बिछवे गांव के समीप सुनसान स्थान में ले जाकर फेंक दिया.बरामदगी के लिए जैन धर्म के लोगों ने की थी पूजा अर्चना जन्मस्थान से चोरी हुई मूर्ति के बरामदगी के लिए जैन धर्मावलंबियों ने भगवान महावीर की मूर्ति की फोटो रख कर चोरी के घटना के दिन से अनवरत पूजा अर्चना किया और उपवास भी रखा. कई जैन धर्मावलंबियों ने तो मूर्ति बरामदगी के लिए निर्जला उपवास भी रखा. इसको लेकर पूरे देश में श्वेतांबर संप्रदाय के जैन श्रद्धालुओं ने भी अपने-अपने तरीके से पूजा अर्चना की और कहीं ना कहीं उनकी आस्था रंग लायी. छात्र-छात्राओं ने भी की थी प्रार्थना जन्मस्थान से भगवान महावीर की करसौटी पत्थर से निर्मित 2600 वर्ष पुरानी प्रतिमा के बरामदगी के लिए लछुआड़ स्थित तीर्थंकर महावीर विद्या मंदिर के छात्र-छात्राओं ने मूर्ति की वापसी के लिए विशेष प्रार्थना की थी. जैन परंपरा के अनुसार महावीर स्त्रोत व नवकार मंत्र के साथ ग्रह शांति पाठ किया था. विरायतन के मुख्य संरक्षिका जैन साध्वी चंदना जी व डा. संप्रज्ञा जी के निर्देश पर सैकड़ों छात्र-छात्राओं व अध्यापकों ने भी पूजा अर्चना की थी. आदिवासी समाज के लोगों ने भी की विशेष खोजबीनभगवान महावीर की मूर्ति बरामदगी के लिए खैरा थाना क्षेत्र के हरखार पंचायत केआदिवासी समुदाय के लोगों ने तीर-धनुष समेत पारंपरिक हथियार लेकर शनिवार को दीपाकरहर, बटिया, कालीपहाड़ी, गायघाट, प्रतापपुर, झिलार,आदि जगहों में खेत खलिहान तथा नदियों में मूर्ति की खोज की थी. वहीं इलाके के कई लोगों ने भी मूर्ति की खोज में अपने-अपने स्तर से प्रयास किया था. पूर्व में भी चोरी हुई थी प्रतिमाएंबताते चलें कि वर्ष 1980 में कुंडघाट स्थित महावीर मंदिर से च्यवन कल्याणक व विश्व कल्याण प्रतिमा की चोरी हुई थी. यह प्रतिमा भी 25 सौ वर्ष पुरानी बतायी जाती है और इसकी कीमत भी करोड़ों रुपये बतायी गयी थी. वर्ष 2002 में सिमुलतला स्थित लट्टू पहाड़ से चोरी गये माता वैष्णवी दुर्गा की प्रतिमा, वर्ष 2003 में गिद्धौर के ऐतिहासिक पंच शिवमंदिर से भगवान सूर्य की प्रतिमा, वर्ष 2012 में शहर के पुरानी बाजार स्थित ठाकुरबाड़ी से राधा-कृष्ण की प्रतिमा, वर्ष 2014 में खैरा बाजार के रामनेश्वर मंदिर से राधा कृष्ण की प्रतिमा, वर्ष 2014 में ही सिकंदरा प्रखंड के महादेव सिमेरिया स्थित मंदिर से कार्तिक भगवान की प्रतिमा, वर्ष 2014 में ही सिकंदरा प्रखंड के ही पोहे गांव से मां पार्वती की प्रतिमा, चौडीहा गांव से ही तीन सौ वर्ष पुरानी चोरी गयी मां पार्वती की प्रतिमा को लेकर पुलिस को आजतक कोई सुराग नहीं मिल सकी है. इन मूर्तियों की कीमत भी लाखों में है.

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