मां का दर्जा ईश्वर से ऊपर : कृष्णा बापू
लखीसराय. मां का दर्जा ईश्वर से भी बड़ा होता है. वह नौ माह तक नि:स्वार्थ भाव से संतान को अपनी गर्भ में रखती है लेकिन आज के समाज में मां-बाप का कोई विशेष महत्व नहीं दिखता है. वृंदावन से आये श्री कृष्णा बापू सरकार ने शनिवार की शाम स्थानीय केआरके मैदान में आयोजित श्रीमद्भागवत पुराण […]
लखीसराय. मां का दर्जा ईश्वर से भी बड़ा होता है. वह नौ माह तक नि:स्वार्थ भाव से संतान को अपनी गर्भ में रखती है लेकिन आज के समाज में मां-बाप का कोई विशेष महत्व नहीं दिखता है. वृंदावन से आये श्री कृष्णा बापू सरकार ने शनिवार की शाम स्थानीय केआरके मैदान में आयोजित श्रीमद्भागवत पुराण कथा के पांचवें दिन अपने प्रवचन के दौरान कही. उन्होंने भगवान श्री कृष्ण के बाल चरित्र का जीवंत चित्रण करते हुए अपने प्रवचन में श्री कृष्णा का सखा संग गोपियो के घर माखन चुरा कर खाना व शिकायत के बाद मां यशोदा के पूछने पर इनकार करने का बड़ा ही सजीव चित्रण प्रस्तुत किया. उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण का उदाहरण देते हुए कहा कि किस कदर वह अपने माता-पिता को पूज्य समझते थे, उनकी राह पर चलो. बापू ने कहा कि भागवत पुराण का सच्चा उपदेश है मां ही सर्वोपरि है.
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