हर्षोल्लास के साथ मनाया गया तीज व गणेश चौठ पर्व
Updated at : 03 Sep 2019 7:15 AM (IST)
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गलगालिया : गलगालिया सहित बंगाल के डागुजोत देवीगंज नेपाल के भद्रपुर में तीज पर्व व चंद्र दर्शन चौथ चंदा यानी (चर चन )पर्व बड़े ही हर्षोउल्लास से मनाया गया़ पर्व को लेकर सुबह से ही गलगालिया बाजार में काफी चहल-पहल देखी गयी़ श्रद्धालु फल, फूल, अक्षत, चंदन, दही, सिंदूर, चूड़ी व पूजन सामग्री खरीद रहे […]
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गलगालिया : गलगालिया सहित बंगाल के डागुजोत देवीगंज नेपाल के भद्रपुर में तीज पर्व व चंद्र दर्शन चौथ चंदा यानी (चर चन )पर्व बड़े ही हर्षोउल्लास से मनाया गया़ पर्व को लेकर सुबह से ही गलगालिया बाजार में काफी चहल-पहल देखी गयी़ श्रद्धालु फल, फूल, अक्षत, चंदन, दही, सिंदूर, चूड़ी व पूजन सामग्री खरीद रहे हैं.
यह दोनों पर्व एक ही दिन होने के कारण श्रद्धालु काफी प्रसन्न व आनंदित है. जानकार बताते है कि भाद्रपद मास में हस्त नक्षत्र शुक्ल तृतीय तिथि को तीज व्रत मनाया जाता है़ यह पर्व खासकर स्त्री जाति के लिए उत्तम व्रत है.
जिसमें तुलसी, बेलपत्र, फल-फूल, पंचमेव, मिष्ठान से भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा करेंगी. परिवार के सुख शांति व सौभाग्य के लिए महिलाएं एक दिन उपवास रख कर यह व्रत करती है. कैसे मनाते है चौथ चंदा महिलाएं व पुरुष दिन में व्रत रखकर रात में हाथों में केला, खीरा, दही, दूध लेकर चंद्रमा का दर्शन करते हैं. फिर परिवार के साथ पूजा-पाठ कर हलवा, खीर-पूड़ी व दही का भोग लगाते हैं. चंद्र देवता से परिवारजनों के कल्याण व दया की कामना करते है.
क्यों मनाया जाता है यह महापर्व मन में शांति व दोष कलंक से बचने के लिए रोहिणी नक्षत्र में यह पूर्व राज्य के सभी भागों में मनाया जाता है. इस महापर्व को ग्रामीण क्षेत्र में चौथा चंदा कहा जाता है. कुछ बच्चे पूर्व में चंद्र दर्शन कर ढेला फेंकते है. लेकिन धीरे- धीरे यह गलत प्रथा बंद हो रही है. श्रद्धालु अपने कलंक दोष से बचने के लिए चंद्र दर्शन करके पुआ-पकवान, फल फूल का भोग लगा कर प्रसन्न करते हैं.
हरितालिका तीज व्रत की महत्ता
इस बार हरितालिका तीज पर तृतीया संग चतुर्थी और हस्त नक्षत्र का भी संयोग बन रहा है और ऐसा संयोग व्रती के हर मनोकामना को पूर्ण करने वाला माना जा रहा है. इस पूजा को करना जितना कठिन है, उतना ही कठिन है इसका व्रत रखना. क्योंकि इस व्रत को भी बगैर पानी के रखा जाता है. उत्तर भारत में हरितालिका तीज धूमधाम से मनाई जाती है.
मान्यता है कि इस व्रत को करने वाली सुहागिन महिलाओं का सौभाग्य अखंड बना रहता है और उसे सात जन्मों तक पति का साथ मिलता है. क्या है मान्यता इस व्रत को सबसे पहले शिव जी को पति के रूप में पाने के लिए पार्वती जी ने शादी से पहले किया था. इसलिए इस व्रत की बहुत मान्यता है.
कहते हैं मां पार्वती ने जंगल में जाकर भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कई सालों तक ताप किया था और उन्होंने ये व्रत बिना पानी पिये लगातार किया था. जिसके बाद भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकारा था. यह शिव-पार्वती की आराधना का सौभाग्य व्रत है, जो महिलाओं के लिए बेहद पुण्य और फलदायी माना जाता है.
घर में पधारो गजानन जी…
किशनगंज. बुद्धि प्रदाता भगवान श्री गणेश के जन्म उत्सव अर्थात गणेश चतुर्थी के अवसर पर किशनगंज शहर के विष्णुपद मंदिर परिसर, बहादुरगंज प्रखंड के लोहगाडा हाट में सोमवार को पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ भगवान गजानन की मूर्ति स्थापित की गयी. अगले तीन दिनों तक यहां गणेश उत्सव की धूम रहेगी. गौरतलब है कि पिछले 17 वर्षों से हर साल भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर गणेश पूजा का आयोजन होता रहा है.
जिसमें स्थानीय नवयुवक संघ की भूमिका सराहनीय होती है. इस बार भी पूजा स्थल बजरंगबली मंदिर को पूरी तरह सजा दिया गया है. पूजा कमेटी के सदस्य मंजय कुमार साह ने बताया कि सोमवार से शुरू होकर बुधवार तक कुल तीन दिनों तक गणेश महोत्सव मनाया जायेगा. इस आयोजन में लोहागाड़ा के नव युवक एवं युवक संघ लोहागाडा के सभी सदस्य सराहनीय भूमिका निभा रहे हैं.
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