डीजे और कानफाडू साउंड में गुम हुई ढोल और शहनाई

डीजे और कानफाडू साउंड में गुम हुई ढोल और शहनाई शहनाई का लोगो लगा देंगे प्रतिनिधि, गोगरी शादी विवाह में डीजे व कानफोड़ू साउंड के आगे शहनाई और ढोल की धुन गुम होने लगी है. पहले शादी विवाह या मांगलिक कार्य आदि में शहनाई वादकों व ढोलकियों की खास भूमिका होती थी. हाइटेक युग में […]
डीजे और कानफाडू साउंड में गुम हुई ढोल और शहनाई शहनाई का लोगो लगा देंगे प्रतिनिधि, गोगरी शादी विवाह में डीजे व कानफोड़ू साउंड के आगे शहनाई और ढोल की धुन गुम होने लगी है. पहले शादी विवाह या मांगलिक कार्य आदि में शहनाई वादकों व ढोलकियों की खास भूमिका होती थी. हाइटेक युग में पुरानी परंपरा को लोग भुला चुके हैं. ढोल और शहनाई की जगह डीजे साउंड की डिमांड बढ़ने लगी है. चाहे शादी विवाह या कोई भी मांगलिक कार्य शुरू होने के पहले डीजे साउंड की अनिवार्यता देखी जा रही है. पहले शादी विवाह आते ही ढोल की थाप व शहनाई की धुन से पूरा माहौल गूंज उठता था. अब बदलते युग में पुरानी परंपराओं को लोग भूलने लगे हैं. इससे पुराने वाद्य यंत्र लुप्त होते जा रहे हैं. शादी विवाह में बिरले ही ढोल बजने की आवाज सुनायी पड़ती है. पहले शादी के समय ढोल का बजना शुभ माना जाता था. ग्रामीण महिलाएं ढोलक का पूजन भी करती थीं. इसके बाद ढोलक बजाना आरंभ किया जाता था. ढोल पूजन के समय वादक द्वारा सगुन लेने की भी परंपरा रही है. पर, डीजे की कानफाड़ू साउंड के कारण बुजुर्गों को ज्यादा परेशानी होती है. उन्होंने बताया कि आज के समय में डीजे कमजोर दिल वालों के लिए घातक साबित हो रही है. बावजूद इसके दिनों दिन इसका चलन और ही बढ़ता जा रहा है. शादी विवाह से लेकर मांगलिक और जागरण कार्यक्रमों में ढोल और शहनाई की धुन को काफी शुभ माना जाता था. पर, अब पूजा अर्चना में भी डीजे बजाया जाता है. लोगों के ऊपर इसका दुष्प्रभाव भी पड़ रहा है.कहते हैं ढोल वादकढोल वादक दिनेश दास, मंटू दास, प्रमोद दास ने बताया कि पुराने युग में ढोल, शहनाई की प्रधानता रहती थी. शौक से लोग इसकी बुकिंग करते थे. पर, डीजे साउंड के बाजार में आते ही लोग ढोल और शहनाई को लोग भूलने लगे हैं. इससे हमलोगों की रोजी-रोटी पर भी आफत आ गयी है. ग्रामीण क्षेत्रों में कुछेक लोगों के यहां ढोल शहनाई की अभी भी प्रधानता बनी हुई है.
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