बड़ी मां कात्यायनी मंदिर को कटाव से बचाने के लिए निरोधात्मक कार्य शुरू, 2.72 करोड़ रूपये होगा खर्च

Published by :RAJKISHORE SINGH
Published at :28 Apr 2026 10:25 PM (IST)
विज्ञापन
बड़ी मां कात्यायनी मंदिर को कटाव से बचाने के लिए निरोधात्मक कार्य शुरू, 2.72 करोड़ रूपये होगा खर्च

मंदिर के साथ-साथ किसानों का सैकड़ों एकड़ कटाव से बचेगी खेती की जमीन

विज्ञापन

– बागमती नदी से मां कात्यायनी मंदिर का हो रहा था कटाव, 31 मई तक होगा कटाव निरोधात्मक कार्य खगड़िया. जिले के प्रसिद्ध बड़ी कात्यायनी मंदिर को बागमती नदी के कटाव से बचाने के लिए निरोधात्मक कार्य मंगलवार से शुरू किया गया है. आगामी 31 मई तक 200 मीटर लंबी कटाव सुरक्षा कार्य करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. जिला बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल टू के कार्यपालक अभियंता मनीष कुमार ने बताया कि बड़ी कात्यायनी मंदिर के समीप बागमती नदी के कटाव रोकने के लिए विभागीय अनुमिति बाद शुरू कर दिया गया है. कटाव सुरक्षात्मक कार्य में 2 करोड़ 72 लाख रुपये से अधिक खर्च किया जायेगा. उन्होंने बताया कि आगामी 31 मई 2026 तक कटाव सुरक्षात्मक कार्य पूरा कर लिया जायेगा. कटाव निरोधात्मक कार्य मां कात्यायनी मंदिर के समीप 200 मीटर लंबी कार्य किया जा रहा है. बताया कि कटाव निरोधात्मक कार्य में जिओ बैग, स्लो पिचिंग व पाइन प्लेन का कार्य किया जा रहा है. बताया कि जिओ बैग नदी के किनारे दिया जा रहा है. जिससे पानी के बहाव और लहरों को रोकने मदद मिलेगी. जिससे किनारे की मिट्टी कटकर नदी में नहीं जायेगी. स्लो पीचिंग नदी के किनारे को स्थिर करने की एक प्रक्रिया है. इसमें किनारे को एक निश्चित ढलान पर काटा जाता है और फिर उसे सुरक्षात्मक परत से ढका जाता है. कहा जाए तो आमतौर पर पहले नदी किनारे पर जिओ बैग या जिओटेक्सटाइल की परत बिछाई जाती है और उसके ऊपर पत्थर रखे जाते हैं. यह पानी की गति को कम करता है और किनारे को सीधे कटने से बचाता है. कहा कि पाइन प्लेन में चीड़ के पेड़ का उपयोग करके मिट्टी को बांधने में मदद मिलती है. कटाव सुरक्षात्क कार्य में पेड़ों की जड़ें मिट्टी को मजबूती से पकड़कर रखती हैं. जिससे तेज बारिश या हवा से मिट्टी का क्षरण कम होता है.

मंदिर के साथ-साथ किसानों का सैकड़ों एकड़ कटाव से बचेगी खेती की जमीन

जिला परिषद सदस्य प्रतिनिधि सुनील चौरसिया ने बताया कि विभाग द्वारा कटाव निरोधात्मक कार्य किया जा रहा है. क्योंकि नदी का कटाव इस ऐतिहासिक शक्तिपीठ के अस्तित्व के लिए खतरा बन गया था. बताया कि सदर प्रखंड के उत्तर माड़र, रसौंक, माड़र उत्तरी पंचायत के ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर प्राचीन धरोहर मां कात्यायनी मंदिर यानी माइजी थान को कटाव से बचाने के लिए संकल्प लिया था, अब पूरा होता दिख रहा है. कटाव निरोधी कार्य तीव्र गति से किया जा रहा है. कहा कि बदला-करांची तटबंध के 38.40 किलोमीटर के सामने प्राचीन मां कात्यायनी मंदिर बागमती नदी के दांए उत्तर माड़र में स्थापित है. कहा कि बागमती नदी के घटते जलस्तर के दौरान मंदिर परिसर का अधिकांश भाग नदी में समाहित हो गया है. इस मंदिर से लाखों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी है. कहा कि इस मंदिर में प्रत्येक सप्ताह के सोमवार व शुक्रवार को हजारों पशुपालक द्वारा मां कात्यायनी को दूध चढ़ाने व दही-चूड़ा लेकर ब्राह्मण को जमाने आते हैं. मंदिर के कटाव से आस-पास के लाखों श्रद्धालु मर्माहत था. बताया कि मंदिर के अलावे किसानों का 150 एकड़ से अधिक जमीन नदी में समा चुका है. मंदिर के साथ-साथ किसानों का सैकड़ों एकड़ जमीन भी कटाव से बचेगा.

विज्ञापन
RAJKISHORE SINGH

लेखक के बारे में

By RAJKISHORE SINGH

RAJKISHORE SINGH is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन