..तो बदल सकती है किसानों की तकदीर
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 16 Jan 2015 10:41 AM
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खगड़िया: जिले के किसान काफी उर्जावान हैं. यही कारण है कि यहां एशिया में सर्वाधिक मक्का का उत्पादन होता है. सिर्फ खगड़िया से डेढ़ लाख बोरे मक्का का व्यापार प्रत्येक वर्ष हो रहा है. फिर भी जिले के किसान बदहाली के कगार पर हैं. दूसरी तरफ इसी मक्का के निर्यात से रेलवे को करोड़ों रुपये […]
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खगड़िया: जिले के किसान काफी उर्जावान हैं. यही कारण है कि यहां एशिया में सर्वाधिक मक्का का उत्पादन होता है. सिर्फ खगड़िया से डेढ़ लाख बोरे मक्का का व्यापार प्रत्येक वर्ष हो रहा है. फिर भी जिले के किसान बदहाली के कगार पर हैं.
दूसरी तरफ इसी मक्का के निर्यात से रेलवे को करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त होता है. इसके बाद भी रैक प्वाइंट की स्थिति काफी खराब है. लोगों का कहना है कि इतनी अधिक मात्र में उपजने वाले मक्का को निर्यात करने की बजाय अगर जिले में ही रखा जाये और एक मक्का आधारित उद्योग की स्थापना की जाये तो यहां के किसानों के दिन फिर सकते हैं. रेल विभाग के आंकड़े के अनुसार यहां से मक्का के सीजन में 40 रैक मक्का का निर्यात किया जाता है.
बताया जाता है कि एक रैक में 42 हजार बोरी मक्का को यहां से बाहर भेजा जा रहा है. यहीं से उपजने वाले मक्का को दूसरे प्रदेश की कंपनी अलग-अलग चीजें बना कर देश के विभिन्न बाजार में बेचती है. इससे कंपनी को करोड़ों का मुनाफा हो रहा है, जबकि यहां के किसानों की माली हालत आज तक ठीक नहीं हो पायी है.
एक रैक में रेलवे सरकार को कितना लाभ
एक रैक बराबर पर रेलवे बोगी में लगभग 42 हजार मक्का की बोरी लोड किया जाता है. इससे रेलवे सरकार को लंबी दूरी के लिए 45 लाख रुपये की राजस्व की प्राप्ति होती है और कम दूरी के रैक प्रति रैक छह लाख रुपये की राजस्व प्राप्ति होती है.
कितना मक्का कहां भेजा गया
लंबी दूरी में दक्षिण भारत के यूरोड, तिरूपति, विशाखापत्तनम जैसे शहरों में 25 रेलवे रैक स्थानीय जंकशन के रेलवे रैक प्वाइंट से भेजा गया, जबकि कम दूरी के लिए पंजाब राज्य के जंगाघटी, बेंगा व राजपुरा जिला में भेजा जाता है.
कहां-कहां जाता है रैक
खगड़िया जंक्शन स्थित रैक प्वाइंट पर माह अप्रैल से नवंबर तक में लगभग 40 रैक मक्का इरोड, तिरूपति, विशाखापत्तनम, पटना, पंजाब आदि जगहों पर भेजा जाता है. इससे रेलवे को करोड़ों रुपये के राजस्व की प्राप्ति होती है. फिर भी बरसात के दिनों में मक्का को सुरक्षित रखने के लिए यहां अब तक शेड का निर्माण नहीं कराया गया है और न ही मक्का व्यवसायी के ठहरने के लिए कोई प्रबंध है. उनकी सुरक्षा की गारंटी की बात करना तो बेमानी ही होगी, जबकि फसल के मौसम में किसानों के साथ लूटपाट की घटना होते रहती है.
जन प्रतिनिधियों से सवाल
जिले में मक्का आधारित उद्योग की स्थापना की मांग एक अरसे से की जा रही है. जब कभी चुनाव आता है यह मुद्दा सबसे आगे होता है, लेकिन चुनाव के बाद जनप्रतिनिधि इसे भूल जाते हैं और जनता भी पस्त होती रहती है. उल्लेखनीय है कि खगड़िया कृषि प्रधान जिला है. यहां ना तो कोई उद्योग है ना ही धंधा. जिस कारण लोग छह माह तक खेती करने के बाद परिवार की आजीविका चलाने के लिए दूसरे प्रदेश की खाक छानते हैं. ऐसे में यहां उद्योग की स्थापना गरीब किसानों के लिए संजीवनी का काम करेगा.
किस माह से लगता है मक्का का रैक
एशिया महादेश में फरकिया नाम से यह जिला मक्का के उत्पादन में सर्वोच्च स्थान रखता है. एक वर्ष में दो बार मक्का का उत्पादन करने के लिए यह क्षेत्र जाना जाता है. लेकिन उपज के बाद यह क्षेत्र बाढ़ की समस्या से जूझने लगता है. इसके बाद मक्का व्यापारी इसका पूरा लाभ उठाते हैं. किसानों की मजबूरी को देखते हुए मक्का की खरीद औने-पौने दाम पर की जाती है.
किस माह में कितना मक्का हुआ लोड
वर्ष के मई 2014 में स्थानीय रेलवे प्वाइंट से आठ रैक अन्य प्रदेशों के लिए भेजा गया एक रैक व्यावसायिक बोगी होता है. एक बोगी में लगभग एक हजार मक्का का बोरी लोड किया जाता है. जबकि जून माह में नौ रैक, जुलाई में तीन रैक, अगस्त में छह रैक, सितंबर में एक रैक तथा अक्तूबर व नवंबर माह में एक-एक रैक अन्य प्रदेशों में भेजा गया.
कहते हैं सामाजिक कार्यकर्ता
सामाजिक कार्यकर्ता सुभाष चंद्र जोशी, युवा शक्ति के प्रदेश अध्यक्ष नागेंद्र सिंह त्यागी, महेंद्र त्यागी, संजय यादव, अशोक सिंह आदि ने बताया कि प्रत्येक वर्ष मक्का उत्पादन के समय इस जिले से लगभग एक हजार पांच सौ क्विंटल मक्का अन्य राज्य में भेजा जाता है. अगर इसी जिले में मक्का उद्योग का निर्माण हुआ रहता तो किसानों के तंगहाल जीवन से छुटकारा मिल जायेगा.
खर्च घटेगा, ज्यादा मुनाफा पायेंगे
किसानों का कहना है कि मानसी में एक फूड पार्क का निर्माण कराया जा रहा था. उस फूड पार्क के लिए जिस जमीन का चयन किया गया वह दो फसला बतायी जाती है. इससे किसानों को ही नुकसान हो रहा है. इसलिए किसानों ने बताया कि अगर एक उद्योग खगड़िया तथा दूसरा महेशखूंट में लगा दिया जाये, तो इन क्षेत्रों के किसान खगड़िया मुख्यालय मक्का ले आयेंगे. इससे उनको खर्च घटेगा व ज्यादा मुनाफा पायेंगे.
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