दो शिफ्ट की व्यवस्था बनी चुनौती, दोपहर में स्कूल जाने को मजबूर छात्र-छात्राएं

Updated at : 11 Apr 2026 4:47 PM (IST)
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दो शिफ्ट की व्यवस्था बनी चुनौती, दोपहर में स्कूल जाने को मजबूर छात्र-छात्राएं

नयी व्यवस्था़ एक दर्जन से अधिक विद्यालयों में 11:30 बजे लग रही घंटी

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नयी व्यवस्था़ एक दर्जन से अधिक विद्यालयों में 11:30 बजे लग रही घंटी गर्मी से बचाव के लिए विद्यालय हुए मॉर्निंग, तो दो शिफ्ट वाले डे होंगे संचालित भभुआ नगर. जिले के सभी माध्यमिक, उच्च माध्यमिक व प्रारंभिक व मध्य विद्यालयों में छह अप्रैल से मॉर्निंग शिफ्ट लागू कर दिया गया है. इसके तहत अधिकतर विद्यालय सुबह 6:30 बजे से 11:30 बजे तक संचालित हो रहे हैं. हालांकि, एक दर्जन से अधिक ऐसे विद्यालय भी हैं जहां दो शिफ्ट में पढ़ाई की व्यवस्था की गयी है. इन विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक के बच्चों की पढ़ाई सुबह 6:30 से 11:30 बजे तक होती है, जबकि कक्षा 9 से 12 वीं तक के छात्र-छात्राओं की कक्षाएं 11:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक चल रही हैं. हास्यास्पद यह है कि इस नयी व्यवस्था का उद्देश्य गर्मी से बचाव करना बताया गया है, लेकिन इसके कारण कई नयी समस्याएं सामने आ रही हैं. दरअसल, सभी बच्चे पढ़ कर घर लौट जायेंगे तो दो शिफ्ट में संचालित विद्यालयों के बच्चे भरी दोपहर में पढ़ने के लिए घर से निकलेंगे, यानी अन्य विद्यालय मॉर्निंग संचालित होंगे, लेकिन दो शिफ्ट वाले विद्यालय के बच्चों को अप्रैल, मई व जून महीने में भी लू लहर के बीच दोपहर में विद्यालय जाना पड़ेगा. = दोपहर की तपती धूप बनी बड़ी परेशानी दोपहर के समय तेज धूप और बढ़ते तापमान के बीच विद्यालय जाना छात्र-छात्राओं और शिक्षकों दोनों के लिए चुनौती बन गया है. खासकर कक्षा 9 से 12 वीं तक के विद्यार्थियों को तपती धूप में घर से निकलकर स्कूल जाना पड़ रहा है. सुबह की अपेक्षा दोपहर में तापमान काफी अधिक रहता है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर भी पड़ सकता है. अभी भले ही तापमान सामान्य है, लेकिन आने वाले दिनों में यदि पारा 40 डिग्री के पार चला जाता है, तो यह स्थिति छात्र छात्राओं के लिए और भी गंभीर हो सकती है. = अभिभावकों सहित शिक्षकों की भी बढ़ी चिंता इस व्यवस्था को लेकर अभिभावकों में चिंता का माहौल है. उनका कहना है कि छोटे बच्चों को तो सुबह भेजना ठीक है, लेकिन बड़े बच्चों को दोपहर की भीषण गर्मी में स्कूल भेजना जोखिम भरा हो सकता है. वहीं, शिक्षकों को भी दोपहर के समय विद्यालय आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कई शिक्षकों का कहना है कि गर्मी के कारण थकान और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं, जिससे पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है. = ग्रीष्म अवकाश तक जारी रहेगी यह व्यवस्था गौरतलब है कि यह दो शिफ्ट की व्यवस्था ग्रीष्म अवकाश तक लागू रहेगी. यानी जब तक गर्मी की छुट्टियां नहीं हो जातीं, तब तक छात्रों और शिक्षकों को इसी समय-सारणी के अनुसार विद्यालय आना-जाना होगा. प्रशासन का मानना है कि इससे पढ़ाई का समय प्रभावित नहीं होगा, लेकिन स्थानीय स्तर पर इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग भी उठने लगी है. कई लोगों का सुझाव है कि सभी कक्षाओं के लिए केवल सुबह का शिफ्ट ही लागू रखा जाये, ताकि छात्रों को तेज धूप से राहत मिल सके. कुल मिलाकर, दो शिफ्ट में संचालित विद्यालयों की यह व्यवस्था जहां एक ओर शैक्षणिक निरंतरता बनाये रखने का बेहतर प्रयास है, वहीं दूसरी तरफ भीषण गर्मी में छात्रों व शिक्षकों के लिए भारी परेशानियों का कारण भी बनती नजर आ रही है.

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