Kaimur News : आठ घंटे में कैमूर में अक्तूबर माह के कोटे से तीन गुना अधिक बरसा पानी

Published by : PRABHANJAY KUMAR Updated At : 04 Oct 2025 9:01 PM

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शुक्रवार को रात आठ घंटे के अंदर जिले में अक्तूबर माह के पूरा कोटा से तीन गुना अधिक बारिश दर्ज किया गया. रात भर झमाझम बारिश और तड़तड़ा रही बिजली से लोगों की पूरी रात सहमे-सहमे कटी

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भभुआ. शुक्रवार को रात आठ घंटे के अंदर जिले में अक्तूबर माह के पूरा कोटा से तीन गुना अधिक बारिश दर्ज किया गया. रात भर झमाझम बारिश और तड़तड़ा रही बिजली से लोगों की पूरी रात सहमे-सहमे कटी. गौरतलब है कि जिले में बरसात का सबसे अहम माने जाने वाला अभी हथिया नक्षत्र चल रहा है. इसके प्रभाव को ओडिशा व पश्चिम बंगाल के चक्रवात ने और भी आक्रामक बना दिया है, जिसका नजारा शुक्रवार को दिन से ही जिले में दिखायी देने लगा था. हालांकि, दिन में रुक रुक कर बारिश होती रही. लेकिन, रात 10 बजे के बाद बारिश ने अपना मिजाज बदला और रात भर भारी बारिश का दौर जारी रहा. तेज हवा के साथ चल रही इस बारिश में लगातार कड़क रही बिजली मानो ऐसी लग रही थी की कभी भी किसी के आंगन में गिर सकती है. भारी बारिश, तेज हवा और लगातार मिनट दर मिनट तड़तडा रही बिजली से लोग रात भर सहमे रहे. किसी तरह रात कटने के बाद सुबह माहौल सामान्य दिखायी दिया, तो लोगों के जान में जान आयी. लेकिन, जिले में गांव से लेकर बधार, नदी से लेकर नाले, झरानों से लेकर तालाब, खेत से लेकर घरों तक पानी का उफान दिखायी दे रहा था. इधर, सांख्यिकी विभाग से मिली रिपोर्ट के अनुसार, अक्तूबर माह में जिले में कुल 3737.40 एमएम वर्षा की दरकार थी, लेकिन मात्र आठ घंटे में जिले में शुक्रवार की रात 101.13 एमएम वर्षा रिकार्ड की गयी. नदियों से लेकर खेतों तक लबालब पानी मारने लगा उछाल शुक्रवार की रात जिले में भारी बारिश के बाद पहाड़ी झरनों का मुंह पूरी तरह खुल गया. पहाड़ पर भारी बारिश के बाद पहाड़ी झरनों से पानी का जखीरा फूट पड़ा. जिले के तेल्हाड कुंड, करकटगढ़, तुतुआइन झरना, रसयना झरना सहित तमाम पहाड़ी झरनाें से पानी पहाड़ों से नीचे सरक कर जिले के नदियों में उफान मारने लगा. पहाड़ से गिरने वाले रसयना झरना, तुतुआईन झरना, तेल्हाड कुंड, करकटगढ़ आदि में पानी का बहाव तेज रफ्तार पकड़ चुका है. इसका नतीजा है जिले के दुर्गावती नदी से लेकर कर्मनाशा, सुवर्णा, गोरिया, कोहिरा आदि नदियां भी पानी से लबालब भर कर चल रही थी. यही नहीं बालियां ले रहे धान के बधार भी पानी में डूबे थे. भारी वर्षा से कई बस्तियों, गांवों और टोलों को घेरने के साथ घरों के दरवाजे और सड़कों पर भी पानी उछाल मार रहा था. इनसेट जून से सितंबर तक जरूरत से कम हुई बारिश भभुआ. सांख्यिकी विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार, जून माह में जिले में धान के खेती के लिए लगभग 127 एमएम वर्षा की जरूरत थी. लेकिन, पूरे जून माह तक 108 एमएम वर्षा ही रिकार्ड की गयी थी. जून माह में कम बरसात होने के कारण किसानों को धान के बिचड़ों को बचाने के लिए काफी मशक्कत करनी पडी. इसी तरह जुलाई माह में 296 एमएम वर्षा की जरूरत थी. लेकिन, पूरे जुलाई माह में 230 एमएम वर्षा ही रिकार्ड की जा सकी, जो जरूरत से लगभग 66 एमएम कम थी. सितंबर माह में 225.00 एमएम वर्षा की जरूरत थी, लेकिन सितंबर माह में भी 95.85 एमएम वर्षा ही दर्ज की गयी, यानी सितंबर में भी 129.15 एमएम कम बारिश दर्ज की गयी है.

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