स्मार्ट फोन की लत बच्चों को बना रही मायोपिया का शिकार

आंख मानव जीवन के लिए अनमोल है, इसके बिना व्यक्ति का जीवन अंधकारमय है. इसके बावजूद अभिभावकों की लापरवाही के कारण छोटे-छोटे बच्चों को ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल करने से आंख की रोशनी कम होने लगी है.
जमुई. आंख मानव जीवन के लिए अनमोल है, इसके बिना व्यक्ति का जीवन अंधकारमय है. इसके बावजूद अभिभावकों की लापरवाही के कारण छोटे-छोटे बच्चों को ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल करने से आंख की रोशनी कम होने लगी है. ये बच्चे मायोपिया बीमारी के शिकार हो रहे हैं. इस बीमारी में दूर की वस्तु कम दिखने लगती है. यदि ऐसा रहा तो वर्ष 2045 तक हर दूसरा बच्चा इसका शिकार हो सकता है. उक्त बातें सदर अस्पताल में पदस्थापित नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ थनिष कुमार ने कही. उन्होंने बताया कि इस बीमारी की चपेट में 5 -14 साल तक के बच्चे अधिक प्रभावित हो रहे हैं. यदि शुरुआत में जांच के दौरान इसके बारे में पता चल जाये तो इसका इलाज कर रोका जा सकता है. ज्यादा देर होने पर अधिक परेशानी बढ़ जाती है. इस बीमारी में बच्चों के चश्मे का पावर माइनस में चला जाता है. ज्यादातर इस तरह के मामले शिक्षक के द्वारा भेजे जाते हैं. जब बच्चे क्लास में पीछे बैठते हैं तो उन्हें बोर्ड पर लिखे गये शब्द स्पष्ट नहीं दिखते. इसके कारण वह ज्यादातर गलती लिखने लगते हैं. जिसके अभिभावकों से इन बच्चों की आंख जांच करने की बात कही जाती है. डॉ कुमार ने बताया कि प्रत्येक माह ऐसे मरीजों की संख्या 50 से 60 या उससे अधिक भी रहती है, ऐसे बच्चे कुंठित भी रहते हैं. क्योंकि जब यह अपने माता पिता से यह कहते हैं कि उन्हें दूर की वस्तु दिखायी नहीं पड़ रही तो ज्यादातर अभिभावक इसे गंभीरता से नहीं लेते और बच्चे को ही डांट देते हैं. अभिभावक ऐसा ना करें और पांच वर्ष का अगर बच्चा है तो उसकी आंखों की जांच जरूर कराएं.
आउटडोर एक्टिविटी है जरूरी
बच्चों को मोबाइल की लत छुड़ाने के लिए आउटडोर एक्टिविटी जरूरी है. प्रतिदिन कम से कम दो घंटे अपने बच्चों को घर से बाहर खुले मैदान में खेलने के लिए ले जाएं. इससे वह दूर की वस्तु को देखे और उनके आंखों का भी व्यायाम हो सके. उन्होंने कहा कि जो बच्चे लैपटॉप चलाते है वैसे बच्चे बीच-बीच में 30 सेकेंड के लिए आंख की पलकों को झपकाएं और दूर की वस्तु को देखें.विटामिन डी की भी कमी है इसका कारण
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ थनिष कुमार ने बताया कि जो भी बच्चे मायोपिया बीमारी के मिले हैं. उनमें एक बात और कॉमन दिखी कि इन बच्चों की जब विटामिन डी की जांच करायी गयी तो सभी में सामान्य से काफी कम पाया गया. यह भी एक कारण है. इसलिए लोग अपने बच्चे के विटामिन डी की भी जांच जरूर कराएं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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By Prabhat Khabar News Desk
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