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स्वास्थ्य सेवाओं में वैशाली दूसरे नंबर पर

Updated at : 21 Apr 2020 5:12 AM (IST)
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स्वास्थ्य सेवाओं में वैशाली दूसरे नंबर पर

वैशाली : जिले के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. शायद यही वजह है कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को उपलब्ध कराने के मामले में वैशाली ने लगातार दूसरे महीने में भी सूबे में दूसरा स्थान प्राप्त किया है. यह रैंकिंग राज्य स्वास्थ्य समिति ने जारी की है. गुणवत्तापूर्ण […]

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वैशाली : जिले के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. शायद यही वजह है कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को उपलब्ध कराने के मामले में वैशाली ने लगातार दूसरे महीने में भी सूबे में दूसरा स्थान प्राप्त किया है. यह रैंकिंग राज्य स्वास्थ्य समिति ने जारी की है. गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की इसके लिए राज्य स्वास्थ्य समिति नियमित नियमित रूप समीक्षा भी कर रही है. राज्य स्वास्थ्य समिति की ओर से जारी फरवरी माह की रैंकिंग में वैशाली जिले को 60.4 प्रतिशत अंक प्राप्त हुआ है. यह रैंकिंग राज्य स्वास्थ्य समिति ने 34 स्वास्थ्य सूचकांकों की समीक्षा कर जिलावार रैंकिंग जारी की है. जनवरी माह की रैंकिंग में वैशाली 57.6 प्रतिशत अंक के साथ दूसरे स्थान पर था. डीपीएम मणिभूषण झा ने बताया राज्य स्वास्थ्य समिति ने 34 स्वास्थ्य सूचकांकों के आधार पर राज्य स्तरीय रैंकिंग जारी की है, जिसमें हमने अपनी स्थिति में सुधार किया है. अगले महीने फिर से उच्च पायदान पर काबिज होंगे.

इस उपलब्धि से जिले के स्वास्थ्य कर्मियों का उत्साह बढ़ा है. साथ ही, और बेहतर करने की चुनौती भी अब बढ़ी है. इसके लिए जिले के सभी स्वास्थ्य कर्मियों को बेहतर प्रदर्शन करने होंगे.इन सूचकांकों को किया गया शामिलराज्य स्वास्थ्य समिति ने 34 स्वास्थ्य सूचकांकों पर रैंकिंग तैयार की है. इसके लिए 800 अंक निर्धारित किये गये थे. इसमें गर्भवती महिलाओं का निबंधन, प्रसव पूर्व पहली तिमाही में महिलाओं का निबंधन, संस्थागत प्रसव, आधुनिक परिवार कल्याण के उपायों की दर, सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट में भर्ती बच्चों की संख्या व भर्ती रहे दिनों की संख्या, पूर्ण टीकाकरण, खून की कमी दूर करने में आयरन टैबलेट की आपूर्ति, एंबुलेंस का प्रतिदिन परिवहन की दर, पीएचसी स्तर पर प्रति लाख जनसंख्या में हर माह ओपीडी की सेवा उठाने वाले मरीजों की संख्या, लेबोरेटरी में स्वास्थ्य जांच कराने वाले लोगों की संख्या, अल्ट्रासाउंड की उपयोगिता दर, खोजे गए नए टीबी मरीजों की संख्या, टीबी और कालाजार मरीजों के लिए दवा उपलब्धता की स्थिति, ओपीडी दवाओं की उपलब्धता, पैसे का खर्च, आशा का प्रशिक्षण, आशा का भुगतान, कन्या उत्थान योजना का भुगतान और चिकित्सकों का ओपीडी में प्रदर्शन शामिल किया गया है.

स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में हो रही बढ़ोतरीजिले के सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ है. राज्य स्वास्थ्य समिति की ओर से जारी की रैंकिंग में जिले को दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है. यह स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को दर्शाता है. सभी स्वास्थ्य कार्यक्रमों का लाभ समुदाय के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना जरूरी है. इसके लिए जिला स्वास्थ्य विभाग निरंतर प्रयासरत है. आने वाले समय में इससे भी बेहतर रैंकिंग की उम्मीद की जा सकती है. डॉ इंद्रदेव रंजन, सिविल सर्जन

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