संयुक्त खेत मजदूर संघर्ष मोर्चा ने किया प्रदर्शन

Updated at : 06 Jan 2026 11:01 PM (IST)
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संयुक्त खेत मजदूर संघर्ष मोर्चा ने किया प्रदर्शन

संयुक्त खेत मजदूर संघर्ष मोर्चा, जिला इकाई के बैनर तले 14 सूत्री मांगों को लेकर मंगलवार को सदर प्रखंड मुख्यालय में धरना-प्रदर्शन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता बिहार खेत मजदूर यूनियन के संतोष कुमार सिंह, बिहार प्रांतीय खेतिहर मजदूर यूनियन के दीनबंधु प्रसाद एवं अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा के रामबाबू भगत ने संयुक्त रूप से की.

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हाजीपुर. संयुक्त खेत मजदूर संघर्ष मोर्चा, जिला इकाई के बैनर तले 14 सूत्री मांगों को लेकर मंगलवार को सदर प्रखंड मुख्यालय में धरना-प्रदर्शन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता बिहार खेत मजदूर यूनियन के संतोष कुमार सिंह, बिहार प्रांतीय खेतिहर मजदूर यूनियन के दीनबंधु प्रसाद एवं अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा के रामबाबू भगत ने संयुक्त रूप से की. धरना सभा में बोलते हुए नेताओं ने कहा कि विभिन्न स्थानों पर भूमिहीन व आवास विहीन खेत मजदूर व ग्रामीण गरीब परिवार वर्षों से सड़क किनारे, नहर, पोखर, रैयती व सरकारी जमीन पर मजबूरन झोपड़ी और मकान बनाकर जीवन बसर कर रहे हैं, जिन्हें उजड़ने का डर बना रहता है. सरकार वर्षों से अभियान बसेरा चला रही है, लेकिन यह आज तक पूरा नहीं हो सका. इससे भूमिहीनों में निराशा है. दूसरी ओर शासन-प्रशासन बुलडोजर चलाकर उन्हें उजाड़ने में लगा है. मोर्चा की ओर से सरकार के नाम बीडीओ को सौंपे गये ज्ञापन में बुलडोजर एक्शन पर अविलंब रोक लगाने, गरीबों को उजाड़े जाने से पहले वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने, भूमिहीनों को पांच-पांच डिसमिल जमीन व पर्चा देने, रामभद्र, रामचौरा व अंधरवाड़ा मे बसे हुए भूमिहीनों को पर्चा देने, बंदोबस्ती व भूदान के पर्चाधारियों को जमीन पर कब्जा दिलाने, दाखिल खारिज एवं परिमार्जन में अनियमितता बंद करने, मनरेगा को समाप्त कर वीबी- जीरामजी बनाकर बजट में कटौती करने और राज्यों पर 40 प्रतिशत बोझ डालने की जगह मनरेगा को बनाये रखने तथा दो सौ दिन काम, सात सौ रुपये मजदूरी देने, मनरेगा को कृषि से जोड़ने, मजदूर विरोधी चार श्रम कोड को रद कर पुराना कानून बहाल करने, खाद की काला बाजारी पर रोक लगाने, धान की खरीद में अनियमितता बंद करने, नीलगाय, घोड़परास, जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा की गारंटी करने समेत अन्य मांगें थीं. सभा में ट्रेड यूनियन नेता अमृत गिरि, किसान महासभा के गोपाल पासवान, खेमयू की शीला देवी, शमशाद अहमद, रामप्रवेश पासवान, केदार चौधरी, मजिंद्र साह आदि ने विचार रखे.

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