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BJP State Committee: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से 3 महीने पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पुराने नेताओं को साथ लेकर चलते हुए, आंतरिक गुटबाजी को नियंत्रित करने के लिए बुधवार को अपनी राज्य समिति का गठन किया. राज्य समिति का गठन लंबे समय से लंबित था.
जुलाई में अध्यक्ष बने थे शमिक भट्टाचार्य
जुलाई 2025 में शमिक भट्टाचार्य ने पश्चिम बंगाल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला. इसके लगभग 6 महीने बाद 35 सदस्यीय समिति की घोषणा की गयी. हालांकि, नेतृत्व ने शुरू में दुर्गा पूजा से पहले टीम को मैदान में उतारने की योजना बनायी थी, लेकिन पार्टी के पुराने नेताओं और वर्ष 2019 के बाद शामिल हुए लोगों के बीच लगातार टकराव के कारण यह प्रक्रिया बार-बार टलती रही.
बड़े टकराव को सुधारने की हुई है कोशिश
अंतिम सूची से साफ होता है कि पार्टी ने बिना किसी बड़े टकराव के समिति की दिशा सुधारने की कोशिश की है. समिति में वरिष्ठ संगठनात्मक नेताओं का वर्चस्व है, लेकिन सुनियोजित तरीके से नेताओं को शामिल करने और बाहर रखने के फैसले से संकेत मिलता है कि वर्ष 2026 के चुनाव से पहले गुटबाजी को शांत करने का प्रयास किया गया है.
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BJP State Committee: दिलीप घोष प्रदेश समिति से बाहर
बंगाल के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष को प्रदेश समिति से बाहर रखा गया है. केंद्रीय नेतृत्व ने हाल ही में वरिष्ठ नेताओं से राजनीतिक रूप से सक्रिय रहने का आग्रह किया था. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल में एक यात्रा के दौरान घोष से कथित तौर पर अपनी सक्रिय भागीदारी बढ़ाने के लिए कहा था, जिससे उन्हें एक औपचारिक संगठनात्मक भूमिका मिलने की उम्मीदें बढ़ गयीं.
सौमित्र खान और लॉकेट चटर्जी की कमेटी में हुई वापसी
विधानसभा चुनाव में संभावित उम्मीदवार माने जाने वाले कई वरिष्ठ नेताओं को जान-बूझकर समिति से बाहर रखा गया है, ताकि चुनाव प्रचार के दौरान व्यवस्थाएं बेहतर रहें. इस फेरबदल से सबसे ज्यादा फायदा विष्णुपुर के सांसद सौमित्र खान को मिला है, जिन्हें पार्टी का महासचिव बनाया गया है. उनके साथ लॉकेट चटर्जी और लोकसभा सदस्य ज्योतिर्मय सिंह महतो जैसे नेताओं की भी कमेटी में वापसी हुई है.
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