कोलकाता में मिला पलामू का मंदीस, 10 साल मां-बाप से मिलते ही छलके आंसू

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Kolkata News Palamu Boy Mandis Parhaiya Met Family After 10 Years

झारखंड के एक युवक को बांग्लादेश की सीमा से सटे दक्षिण 24 परगना जिले से झारखंड और पश्चिम बंगाल की पुलिस ने संयुक्त रूप से अभियान चलाकर उसके परिवार से मिलवाया. घर से 9 साल की आयु में निकला बच्चा अब 19 साल का युवा हो चुका है. पलामू में जब वह अपने माता-पिता से मिला, तो यह क्षण बेहद भावुक कर देने वाला था.

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झारखंड के पलामू जिले का एक आदिवासी युवक करीब 10 साल बाद अपने परिवार से मिला. पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में खोजे गये 19 साल के मंदीस परहैया की घर वापसी ने पूरे परिवार को भावुक कर दिया.

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काम दिलाने के बहाने कोलकाता ले गये थे पड़ोसी

पुलिस के अनुसार, पलामू के छतरपुर थाना क्षेत्र के कला गांव निवासी मंदीस 9 साल का था, जब वह अपने माता-पिता से बिछड़ गया था. परिवार का आरोप है कि गांव के 2 पड़ोसी उसे काम दिलाने के बहाने कोलकाता ले गये थे. बाद में कभी उन्हें अपने बेटे से नहीं मिलने दिया गया.

18 दिसंबर 2025 को माता-पिता ने दर्ज करायी शिकायत

मामले में औपचारिक शिकायत पिछले वर्ष 18 दिसंबर को दर्ज करायी गयी. पलामू की पुलिस अधीक्षक रीष्मा रमेशन ने बताया कि परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को देखते हुए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया. टीम को युवक का पता लगाकर सुरक्षित वापस लाने के निर्देश दिये गये.

संदिग्ध पड़ोसियों से पूछताछ में पुलिस को मिले सुराग

जांच के दौरान संदिग्ध पड़ोसियों से पूछताछ और तकनीकी निगरानी के आधार पर पुलिस को सुराग मिला कि मंदीस कोलकाता से सटे दक्षिण 24 परगना जिले में रह रहा है. स्थानीय पुलिस की मदद से आखिरकार उसका पता लगा लिया गया.

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मंदीस को गांव और माता-पिता का ही नाम था याद

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, 10 वर्ष बाद मंदीस को सिर्फ अपने गांव और माता-पिता के नाम याद थे. इन्हीं जानकारियों के आधार पर उसकी पहचान की पुष्टि हुई. 22 फरवरी को उसे सुरक्षित उसके घर पहुंचा दिया गया.

जब हमने उनसे पूछा कि इतने वर्षों बाद औपचारिक शिकायत क्यों दर्ज करा रहे हैं, तो उन्होंने बताया कि करीब 10 वर्ष पहले उनके दो पड़ोसी उनके बेटे को काम की तलाश में कोलकाता ले गये थे. फिर उन्होंने उन्हें बेटे से मिलने नहीं दिया. मैंने टीम को मामले की गहन जांच के निर्देश दिये और उनके बेटे को वापस लाने को कहा.

रीष्मा रमेशन, एसपी, पलामू, झारखंड

बेटे से मिलते ही माता-पिता की आंखों से बहे आंसू

करीब एक दशक की अनिश्चितता और इंतजार के बाद जब मंदीस अपने गांव लौटा, तो माता-पिता की आंखों से आंसू बहने लगे. उनके आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे. पिता मंगल परहैया ने कहा कि उन्होंने बेटे से मिलने की कई कोशिशें कीं, लेकिन हर बार निराशा हाथ लगी.

पलामू जिले में है पुलिस की संवेदनशीलता के चर्चे

अब बेटे की सुरक्षित वापसी ने परिवार को नयी उम्मीद दी है. गांव में भी इस पुनर्मिलन की चर्चा है. लोग इसे पुलिस की सतर्कता और संवेदनशीलता का नतीजा बता रहे हैं.

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