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नौकरी की मांग को लेकर फिर सड़कों पर उतरे अपर प्राइमरी के उम्मीदवार

एक दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद नौकरी की कोई स्पष्ट राह न दिखने से हताश अपर प्राइमरी अभ्यर्थी बुधवार को एक बार फिर सड़कों पर उतर आये.

संवाददाता, कोलकाता

एक दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद नौकरी की कोई स्पष्ट राह न दिखने से हताश अपर प्राइमरी अभ्यर्थी बुधवार को एक बार फिर सड़कों पर उतर आये. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे वर्षों से नौकरी की आस में भटक रहे हैं और कष्टकर जीवन जीने को मजबूर हैं.

अपर प्राइमरी नौकरी की मांग कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य अंधकार में है, क्योंकि इंटरव्यू न होने के कारण नियुक्ति प्रक्रिया लंबे समय से रुकी हुई है. अपनी मांगों को लेकर वे एक बार फिर विरोध प्रदर्शन के लिए सड़क पर उतरे.

इंटरव्यू से वंचित अपर प्राइमरी अभ्यर्थियों के संगठन आइबीयूपीसीपीबी के अनुसार, 2016 के अपर प्राइमरी गजट के तहत नियुक्ति प्रक्रिया पूरी न होने से अभ्यर्थियों के जीवन के 11 कीमती वर्ष बर्बाद हो चुके हैं. प्रदर्शनकारियों ने सरकार से यह स्पष्ट जवाब मांगा कि इस देरी के लिए जिम्मेदार कौन है.

धर्मतला इलाके में अभ्यर्थियों ने लाठियां भांजकर और सड़क पर रेंगते हुए विरोध जताया. उनका कहना है कि वे 16 जून 2022 से कोलकाता में शहीद मातंगिनी हाजरा की प्रतिमा के समक्ष धरना दे रहे हैं और अब यह आंदोलन 1300 दिनों का आंकड़ा पार कर चुका है. उनकी मुख्य मांग गजट के अनुसार इंटरव्यू के माध्यम से नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करना है.

अभ्यर्थियों का आरोप है कि अपर प्राइमरी गजट 2016 के नियम 8.3 बी के तहत इंटरव्यू से कम से कम 15 दिन पहले अपडेटेड वैकेंसी प्रकाशित करना अनिवार्य है, लेकिन इस नियम का पालन नहीं होने के कारण ही नियुक्ति प्रक्रिया ठप पड़ी है.

प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि नियुक्ति न होने से केवल नौकरी के अभ्यर्थी ही नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है. अपर प्राइमरी स्तर यानी कक्षा पांच से आठ में शिक्षक और छात्र अनुपात 1:35 बनाये न रख पाने से पढ़ाई की गुणवत्ता लगातार गिर रही है और कई स्कूल बंद होने की कगार पर पहुंच गये हैं.

आंदोलनकारियों का आरोप है कि नियुक्ति में देरी के कारण कई अभ्यर्थी नौकरी की निर्धारित उम्र भी पार कर चुके हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार उन लोगों के भविष्य की जिम्मेदारी से बच सकती है, जिनका जीवन अनिश्चितता में चला गया है. अभ्यर्थियों का कहना है कि इस मामले को हाइकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को मानवीय दृष्टिकोण से देखना चाहिए. साथ ही उन्हें उम्मीद है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मानवीय हस्तक्षेप से यह लंबा संघर्ष समाप्त हो सकेगा.

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