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एसएससी की ओर से जारी 1806 अयोग्य उम्मीदवारों की तालिका में कई त्रुटियां : हाइकोर्ट

पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) की ओर से 1806 अयोग्य उम्मीदवारों की तालिका प्रकाशित की गयी थी, जिसे लेकर कलकत्ता हाइकोर्ट में मामला दायर किया गया था.

किस आधार पर हमें अयोग्य घोषित किया गया, अदालत में याचिका दायर कर मांगा जवाब

संवाददाता, कोलकाता

पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) की ओर से 1806 अयोग्य उम्मीदवारों की तालिका प्रकाशित की गयी थी, जिसे लेकर कलकत्ता हाइकोर्ट में मामला दायर किया गया था. इसकी सुनवाई करते हुए हाइकोर्ट की न्यायाधीश अमृता सिन्हा ने एसएससी से इस बारे में विस्तृत जानकारी मांगी थी. इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश अमृता सिन्हा ने कहा कि एसएससी की तरफ से जारी 1,806 अयोग्य उम्मीदवारों की सूची में कई कमियां हैं. न्यायाधीश अमृता सिन्हा ने कहा कि तालिका में ये उम्मीदवार किस स्कूल, जिले या कैटेगरी में शामिल थे, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है. हाइकोर्ट ने आयोग को सभी जरूरी जानकारी के साथ एक नयी पूरी सूची जारी करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने साफ किया है कि इन सभी कैटेगरी – रैंक जंप, ओएमआर शीट में छेड़छाड़, पैनल अवधि समाप्त होने के बाद हुई नियुक्तियां की अलग-अलग सूची प्रकाशित करनी होगी. हाइकोर्ट ने 11 फरवरी तक यह लिस्ट जारी करने का आदेश दिया है.

बुधवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील फिरदौस शमीम ने सवाल उठाया कि एसएससी के संपूर्ण तालिका से क्या मतलब है. उनके मुताबिक, इस जानकारी के बिना, कौन अयोग्य है और किस कैटेगरी में आता है. यह नहीं होने पर तालिका का कोई मतलब नहीं है.

वहीं, एसएससी नियुक्ति प्रक्रिया में अयोग्य उम्मीदवार के तौर पर चिह्नित उम्मीदवारों को लेकर एक बार फिर कलकत्ता हाइकोर्ट में याचिका दायर करने का फैसला है. उन्होंने अलीपुर सीबीआइ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और उन सभी दस्तावेज और चार्जशीट की कॉपी मांगी, जिनसे जुड़े जांच या दस्तावेजों में उन्हें दागी या अयोग्य के तौर पर पहचाना गया था. याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि जिन दस्तावेजों के आधार पर उन्हें दागी के तौर पर चिह्नित किया गया, उन्हें दिखाये बिना उनके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की गयी, जो गैर-कानूनी है. हालांकि, अलीपुर सीबीआइ कोर्ट ने यह याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा कि याचिका दायर करने वाले लोग इस मामले में आरोपी नहीं हैं, न ही वे गवाह हैं. इसलिए क्रिमिनल लॉ के मुताबिक, मामले में शामिल आरोपी और गवाह ही चार्जशीट और दस्तावेज की कॉपी पाने के हकदार हैं. इसी आधार पर कोर्ट ने पिटीशन खारिज कर दी. हालांकि, जल्द ही इसे लेकर हाइकोर्ट में भी याचिका दायर की जायेगी.

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