hajipur news. देवोत्थान पर श्रद्धालुओं ने संगम में लगायी डुबकी, पूजा कर की सुख-समृद्धि की कामना

Published by : Abhishek shaswat Updated At : 01 Nov 2025 7:28 PM

विज्ञापन

देवोत्थान के अवसर पर शनिवार को हरिहर क्षेत्र में उत्सवी माहौल रहा, बड़ी संख्या में श्रद्धालु नारायणी नदी के घाटों पर स्नान-ध्यान को जुटे

विज्ञापन

हाजीपुर. देवोत्थान के अवसर पर शनिवार को हरिहर क्षेत्र में उत्सवी माहौल रहा. बड़ी संख्या में श्रद्धालु नारायणी नदी के घाटों पर स्नान-ध्यान को जुटे. नगर के प्रसिद्ध कोनहारा घाट पर गंगा-गंडक के संगम में स्नान करने के बाद लोगों ने मंदिरों-देवालयों में पूजा-अर्चना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की. शनिवार को अहले सुबह से ही स्नान-पूजा के लिए घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गयी. देवोत्थान एकादशी को लेकर शहर में दिन भर चहल-पहल बनी रही. सुबह से ही कोनहारा घाट, सीढ़ी घाट, गंडक पुल घाट समेत अन्य घाटों की ओर जाने वाले मार्गों में वाहनों का तांता लगा रहा. दूर-दूर से श्रद्धालु स्नान-पूजन के लिए मोक्ष धाम पर आये. घाटों पर उमड़ने वाली भीड़ के कारण शहर में वाहनों का काफी दबाव रहा. इसके चलते रुक-रुक कर जाम लगता रहा.

उधर सोनपुर स्थित बाबा हरिहरनाथ मंदिर में विशेष रूप से पूजा-अर्चना और रुद्राभिषेक का कार्यक्रम हुआ. वहीं गजेंद्र मोक्ष देवस्थानम में देव दीपावली का आयोजन किया गया है. देवोत्थान एकादशी को देवी-देवताओं के जागरण का दिन माना जाता है. मान्यता है कि चार माह के शयन के बाद कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष एकादशी को भगवान विष्णु जागे थे.

मांगलिक कार्यों की शुरुआत, शाम में हुई गंगा आरती

पौराणिक ग्रंथों और लोक मान्यताओं के अनुसार जगत के पालनहार भगवान विष्णु चार माह के शयन के बाद कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष एकादशी को जग जाते हैं. इस दिन से सारे शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है. इस बीच चतुर्मास रहता है. पंडित नवेंदु तिवारी ने बताया कि आषाढ़ के शुक्ल पक्ष एकादशी को भगवान विष्णु सो जाते हैं. भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष एकादशी को करवट बदलते हैं और कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष एकादशी को वे जागृत हो जाते हैं. विष्णु मंदिरों में तीनों एकादशी के अवसर पर विशेष पूजन व अनुष्ठान के कार्यक्रम होते हैं. देवोत्थान एकादशी को जगह-जगह कथा, पूजन और धार्मिक अनुष्ठानों के आयोजन हुए. इस दौरान भक्तिमय वातावरण बना रहा. नदी घाटों पर सुबह से लेकर दोपहर बाद तक मुंडन संस्कार, सत्यनारायण कथा एवं अन्य अनुष्ठान होते रहे.

देवोत्थान के अवसर पर गंडक नदी के घाट पर शाम के समय गंगा आरती का आयोजन हुआ. काशी की तर्ज पर महाआरती की गयी और सैकड़ों दीप जलाकर नारायणी नदी में प्रवाहित किये गये. वाराणसी की आचार्य मंडली ने परंपरा के अनुसार नारायणी की विशेष पूजा और महाआरती का अनुष्ठान संपन्न कराया. अनेक साधु-संत, गणमान्य व बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा आरती में भाग लिया.

कार्तिक पूर्णिमा स्नान को जुटेंगे लाखों श्रद्धालु

पांच नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा है, जिस दिन हरिहर क्षेत्र में लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान करेंगे. नदी घाटों पर श्रद्धालुओं की सेवा, सुरक्षा और सुविधा के लिए आवश्यक तैयारी की जा रही है. कार्तिक पूर्णिमा स्नान के लिए सबसे ज्यादा भीड़ नगर के कौनहारा घाट पर जुटती है. साथ ही सोनपुर के काली घाट एवं गंडक नदी के दोनों छोर पर लगभग एक दर्जन घाट श्रद्धालुओं और तीर्थ यात्रियों से भरे रहते हैं. इस अवसर पर विधि व्यवस्था, तीर्थ यात्रियों की सुरक्षा, यातायात प्रबंध आदि को लेकर जिला प्रशासन की ओर से आवश्यक कदम उठाये गये हैं. जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने व्यवस्था को लेकर सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिया है. नदी घाटों की बैरिकेडिंग, नदी में गश्ती, चौक-चौराहों से लेकर सड़क तथा सभी स्नान घाटों पर सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किये गये हैं. दंडाधिकारियों के नेतृत्व में पुलिस बल की तैनाती, वाहनों की पार्किंग, आवागमन की सुविधा के लिए शहर के विभिन्न स्थानों पर ड्रॉप गेट समेत अन्य आवश्यक इंतजाम किये गये हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
Abhishek shaswat

लेखक के बारे में

By Abhishek shaswat

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन