gopalganj news : बैरिया में सुधा डेयरी प्लांट निर्माण की रफ्तार सुस्त, किसानों की उम्मीदों पर लगा ब्रेक

Edited by SHAILESH KUMAR
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gopalganj news : अफसरों की सुस्ती से बैरिया में औद्योगिक विकास की उम्मीद पर लगा ब्रेक, एक वर्ष बाद भी चहारदीवारी से आगे नहीं बढ़ सका निर्माण कार्य, एक वर्ष पहले सीएम ने किया था शिलान्यास, प्रतिदिन एक लाख लीटर दूध खपत वाली परियोजना की धीमी प्रगति से किसानों व पशुपालकों में बढ़ी चिंता

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gopalganj news : कटेया. भोरे विधानसभा क्षेत्र में औद्योगिक विकास और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किया गया सुधा डेयरी प्लांट का निर्माण कार्य एक वर्ष बीत जाने के बावजूद अब तक जमीन पर ठोस रूप नहीं ले सका है. कटेया प्रखंड की बैरिया पंचायत में प्रस्तावित इस महत्वाकांक्षी परियोजना की प्रगति बेहद धीमी होने से क्षेत्र के किसानों और आम लोगों में निराशा गहराने लगी है.

बिहार सरकार ने बैरिया पंचायत क्षेत्र को औद्योगिक क्षेत्र घोषित करते हुए यहां सुधा डेयरी प्लांट की स्थापना की घोषणा की थी. बताया गया था कि प्लांट चालू होने के बाद प्रतिदिन लगभग एक लाख लीटर दूध की खपत होगी, जिससे आसपास के हजारों किसान और पशुपालक परिवार सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे. इससे दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नयी दिशा मिलने की उम्मीद जगी थी. गौरतलब है कि एक वर्ष पूर्व सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कटेया प्रखंड के बैरिया में सुधा डेयरी प्लांट का शिलान्यास किया था. शिलान्यास समारोह के दौरान मंच से दावा किया गया था कि निर्धारित समय सीमा के भीतर प्लांट को चालू कर दिया जायेगा. उस समय क्षेत्र के लोगों को भरोसा दिलाया गया था कि यह परियोजना किसानों की आमदनी बढ़ाने और युवाओं को रोजगार देने में मील का पत्थर साबित होगी. इस परियोजना के पीछे स्थानीय विधायक सह मंत्री सुनील कुमार के प्रयास बताये जाते हैं. लोगों को उम्मीद थी कि यह परियोजना क्षेत्र के आर्थिक विकास की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी.

दावों के विपरीत दिख रही जमीनी हकीकत

वर्तमान स्थिति इन दावों के ठीक उलट दिखायी दे रही है. निर्माण स्थल पर जाकर देखने से स्पष्ट होता है कि अब तक केवल चहारदीवारी का काम ही आंशिक रूप से पूरा किया गया है. भवन निर्माण, मशीनरी स्थापना और अन्य बुनियादी ढांचे का कार्य अभी तक शुरू भी नहीं हो सका है. जिस रफ्तार से निर्माण कार्य चल रहा है, उसे देखकर स्थानीय लोगों को आशंका है कि परियोजना तय समय सीमा के भीतर पूरी हो पायेगी या नहीं.

रफ्तार धीमी होने पर समय-सीमा पर उठने लगे सवाल

सुधा डेयरी प्लांट को पांच वर्षों के भीतर पूरी तरह चालू किया जाना है. लेकिन, पहले ही साल में निर्माण कार्य केवल चहारदीवारी तक सीमित रह जाना कई सवाल खड़े कर रहा है. किसानों का कहना है कि यदि यही रफ्तार बनी रही तो यह परियोजना अगले 10 वर्षों में भी पूरी नहीं हो पायेगी. क्षेत्र के किसानों ने इस डेयरी प्लांट से बड़ी उम्मीदें लगा रखी थीं. उनका मानना था कि प्लांट शुरू होने के बाद उन्हें दूध बेचने के लिए दूर-दराज के बाजारों में नहीं जाना पड़ेगा, जिससे उनकी लागत कम होगी और आय बढ़ेगी. प्रतिदिन एक लाख लीटर दूध की खपत से हजारों पशुपालक परिवारों की आमदनी सुनिश्चित होती. इससे न सिर्फ किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नयी गति मिलती.

कार्रवाई की मांग, सपने जल्द साकार होने की उम्मीद

निर्माण की धीमी रफ्तार ने फिलहाल इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. स्थानीय लोगों और किसानों में चिंता बढ़ती जा रही है कि कहीं यह परियोजना भी अधूरी योजनाओं की तरह फाइलों में सिमट कर न रह जाये. अब क्षेत्रवासियों की निगाहें सरकार और संबंधित विभागों पर टिकी हैं कि वे कब इस परियोजना को गति देकर भोरे विधानसभा क्षेत्र के विकास के सपनों को साकार करते हैं.

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