नोटबंदी से दवा से रोटी तक का संकट

Published at :08 Dec 2016 5:04 AM (IST)
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नोटबंदी से दवा से रोटी तक का संकट

कैश का दर्द बैकों को नहीं मिल रही आरबीआइ से मांगी गयी राशि, वेतन मिलना भी हो गया है मुश्किल घर में रोटी के लाले गोपालगंज : बैंक शाखाओं में नोट की कमी से अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा है. बैंकों में कम राशि ग्राहकों को निर्गत की जा रही है. एसबीआइ, यूबीआइ, पीएनबी, सेंट्रल […]

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कैश का दर्द बैकों को नहीं मिल रही आरबीआइ से मांगी गयी राशि, वेतन मिलना भी हो गया है मुश्किल घर में रोटी के लाले

गोपालगंज : बैंक शाखाओं में नोट की कमी से अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा है. बैंकों में कम राशि ग्राहकों को निर्गत की जा रही है. एसबीआइ, यूबीआइ, पीएनबी, सेंट्रल बैंक, ग्रामीण बैंक, सिंडिकेट बैंक, इलाहाबाद बैंक आइसीआइसीआइ, एचडीएफसी की शाखाओं में कतार तो कम है, फिर भी ग्राहकों को पूरा भुगतान नहीं मिल रहा है.
कहीं देर से कैश मिल रहा तो कहीं कम. सुबह उठ कर लोग अपनी शाखाओं में कैश का जायजा ले रहे हैं. दिसंबर के प्रथम सप्ताह में स्थिति और संकटमय होगी. वेतनभोगी वर्ग बैंकों की ओर अग्रसर होगा. इससे शाखाओं में कतार बढ़ेगी और कामकाज का दबाव होगा. शाखा प्रबंधकों का कहना है कि करेंसी चेस्ट से जितना रोजाना मिल रहा उसका वितरण हो रहा है. कैश संकट तो सभी जगह है, लेकिन उसी में मैनेज किया जा रहा है. ग्राहक भी वक्त की नजाकत को समझते हुए सामान्य भुगतान से मान जा रहे हैं.
ग्रामीण बैंक में हर दिन हो रही झड़प : कैश नहीं मिलने के कारण ग्रामीण बैंक के शाखा में प्रतिदिन झड़प जैसी स्थिति बन रही है. ग्रामीण बैंक को तत्काल 32 करोड़ रुपये की जरूरत है. इसके एवज में 20 से 25 लाख रुपये ही मिल पा रहे हैं. इसके कारण ग्रामीण बैंक में कैश का संकट बना हुआ है. ग्रामीण बैंक के कर्मचारी यूनियन की तरफ से सड़क पर उतरने की चेतावनी का भी असर आरबीआइ को नहीं हो रहा है. आरबीआइ से ग्रामीण बैंक के लिए अलग से राशि उपलब्ध कराने की मांग की गयी है.
एटीएम के हाल में सुधार नहीं
छोटे नोट के अभाव में जिले की अधिकतम एटीएम के शटर गिरे हुए हैं. शहर की 27 एटीएम नौ नवंबर से कैश की कमी झेल रही है. जो एटीएम चल रही है उनको दोपहर बाद भरा जा रहा है. अब ज्यादातर एटीएम से दो हजार के ही नोट मिल रहे हैं. एटीएम में तकनीकी तौर पर सुधार करने की प्रक्रिया चल रही है. शाखाओं से जुड़ी एटीएम ही ज्यादातर चल रही हैं.
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